भोपाल का 500 करोड़ का रेलवे स्टेशन यात्रियों के लिए ‘लॉक’ क्यों है?

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित निशातपुरा रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर तीन साल पहले पूरी तरह तैयार कर लिया गया था। करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित यह स्टेशन राजधानी के रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने और मुख्य भोपाल जंक्शन के दबाव को कम करने के उद्देश्य से बनाया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज, यानी तीन साल बाद भी, इस स्टेशन से एक भी ट्रेन नहीं गुजरी है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, स्टेशन की इमारत, प्लेटफॉर्म, टिकट काउंटर, वेटिंग एरिया, पार्किंग ज़ोन और फुटओवर ब्रिज सब कुछ पूरी तरह तैयार है। सफाई व्यवस्था भी नियमित रूप से होती है। फिर भी स्टेशन पर पहली ट्रेन के आगमन का इंतजार जारी है।
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स्टेशन की शानदार बनावट और सुविधाएं
निशातपुरा रेलवे स्टेशन को भारतीय रेलवे के आधुनिकतम मानकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
यह स्टेशन न सिर्फ विशाल और व्यवस्थित है, बल्कि पर्यावरण अनुकूल डिजाइन में भी उत्कृष्ट उदाहरण है।
यहाँ यात्रियों के लिए निम्न सुविधाएं उपलब्ध हैं:
विस्तृत प्लेटफार्म और पारदर्शी छत वाला फुटओवर ब्रिज
आरामदायक वेटिंग एरिया और टिकट काउंटर
वाशरूम और पेयजल की समुचित व्यवस्था
सर्कुलेटिंग एरिया में गाड़ियों की पार्किंग स्पेस
साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था
इन सभी के बावजूद, स्टेशन अब तक केवल सफाई कर्मचारियों और सुरक्षा गार्डों की आवाजाही तक सीमित है।
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भोपाल स्टेशन पर लोड कम करने का उद्देश्य
भोपाल जंक्शन मध्य भारत के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है। यहां से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रेनें गुजरती हैं, जिससे प्लेटफार्म की कमी और इंजन रिवर्सल जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए निशातपुरा स्टेशन का निर्माण किया गया था ताकि:
1. इंदौर और पश्चिम रेलवे की ओर से आने वाली ट्रेनों को यहां ठहराया जा सके।
2. भोपाल जंक्शन पर प्लेटफॉर्म की कमी का दबाव घटाया जा सके।
3. इंजन रिवर्सल प्रक्रिया (जहां इंजन को दिशा बदलनी होती है) को भोपाल की बजाय निशातपुरा में किया जा सके, जिससे समय की बचत हो।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इंजन रिवर्सल के कारण 30 से 40 मिनट का समय व्यर्थ होता है। निशातपुरा में इस सुविधा से न केवल समय की बचत होगी बल्कि भीड़भाड़ भी कम होगी।
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रेलवे ने घोषित की ट्रेनें, पर तारीख तय नहीं
रेलवे बोर्ड ने हाल ही में दो महत्वपूर्ण ट्रेनों — मालवा एक्सप्रेस और सोमनाथ एक्सप्रेस — को निशातपुरा स्टेशन पर ठहराने की घोषणा की थी। लेकिन अभी तक इनके ठहराव की कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई है।
यात्रियों में इसको लेकर निराशा है। आस-पास के इलाकों के लोगों को उम्मीद थी कि अब उन्हें भोपाल या रानी कमलापति स्टेशन तक लंबा सफर नहीं करना पड़ेगा। लेकिन फिलहाल, स्टेशन पर सन्नाटा है और प्लेटफॉर्म यात्रियों का इंतजार कर रहे हैं।
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लॉजिस्टिक दृष्टि से रणनीतिक स्थान
निशातपुरा स्टेशन का निर्माण शहर के उत्तरी हिस्से में किया गया है, जो कि औद्योगिक क्षेत्र के नजदीक है। यह स्थान गोदामों और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
इसलिए, यहां से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों दोनों के संचालन के लिए यह एक उपयुक्त केंद्र साबित हो सकता है।
रेलवे इंजीनियरिंग टीम ने इस स्टेशन को ड्यूल एंट्री सिस्टम के साथ डिजाइन किया है — एक ओर से यात्रियों के प्रवेश के लिए और दूसरी ओर से ट्रेनों के संचालन के लिए। इसके दोनों प्लेटफॉर्म फुटओवर ब्रिज से जुड़े हैं ताकि भीड़ प्रबंधन आसान हो सके।
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500 करोड़ का खर्च और ‘मूक गवाह’ स्टेशन
करीब 500 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह स्टेशन अब भोपाल का पांचवां सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन माना जाता है। रानी कमलापति, भोपाल जंक्शन, संत हिरदाराम और मंडीदीप के बाद निशातपुरा एक और मुख्य कड़ी बन सकता था।
लेकिन वर्तमान स्थिति में यह केवल एक “मूक गवाह” बनकर रह गया है, जो यह सवाल उठाता है कि आखिर करोड़ों खर्च कर बनाए गए ऐसे प्रोजेक्ट्स का क्या फायदा अगर वे जनता के उपयोग में नहीं आएं?
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स्थानीय लोगों की उम्मीदें और सवाल
भोपाल और आसपास के निवासियों का कहना है कि निशातपुरा स्टेशन चालू होने से उनके रोज़ाना के सफर में आसानी होगी।
गांधी नगर, करोंद, लालघाटी, और कोलार रोड जैसे क्षेत्रों के यात्रियों को मुख्य स्टेशन तक आने में काफी समय और खर्च लगता है।
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि रेलवे जल्द से जल्द यहां ट्रेनों का संचालन शुरू करे ताकि स्टेशन का सही उपयोग हो सके और क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिले।
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निष्कर्ष: तैयार स्टेशन, लेकिन मंज़िल अभी दूर
निशातपुरा रेलवे स्टेशन भोपाल के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है, लेकिन जब तक यहां ट्रेनें नहीं चलतीं, यह केवल एक “तैयार मगर ठहरा हुआ सपना” बना रहेगा।
आवश्यक है कि रेलवे बोर्ड जल्द निर्णय लेकर इसे सक्रिय करे ताकि जनता को करोड़ों की इस परियोजना का वास्तविक लाभ मिल सके।
