14 अगस्त 2025 — एक दिन जो अब भारतीय निवेश इतिहास में काले अक्षरों में लिखा जाएगा। सूरत के एक छोटे-से ऑफिस में बैठे निवेशक ने जब अपने ट्रेडिंग अकाउंट में लॉगिन किया, तो उसे एक झटका लगा — अकाउंट “डिसेबल्ड” दिखा रहा था। कुछ ही घंटों में, ऐसे दर्जनों कॉल और ईमेल ग्रीन वॉल एंटरप्राइजेज नामक एक फर्म के क्लाइंट्स की ओर से आने लगे। किसी का पैसा फंसा था, किसी का पोर्टफोलियो गायब था।

शुरुआती भ्रम जल्द ही एक बड़े ₹150 करोड़ के प्रॉप ट्रेडिंग स्कैम में तब्दील हो गया — जिसने न सिर्फ सूरत बल्कि जयपुर, रांची और कोल्हापुर तक निवेशकों की नींद उड़ा दी।
—
ग्रीन वॉल एंटरप्राइजेज: भरोसे के नाम पर जालसाजी
यह पूरा मामला Green Wall Enterprises से जुड़ा हुआ है — एक ऐसी फर्म जो खुद को एक प्रोफेशनल शेयर ट्रेडिंग एजेंसी बताती थी। फर्म के मालिकों ने जयनाम ब्रोकिंग (Jainam Broking) के एजेंट होने का दावा किया था — जो अपने आप में एक प्रतिष्ठित नाम है। लेकिन हकीकत में, यह रिश्ता सिर्फ एक दिखावा था।
फर्म कथित तौर पर क्लाइंट्स से पैसा लेकर खुद के ट्रेड्स चला रही थी और ग्राहकों को झूठे प्रॉफिट रिपोर्ट्स दिखा रही थी। कई निवेशकों ने बताया कि उन्हें हर महीने “गैरेन्टी रिटर्न” का वादा किया गया था — 10% तक का, जो किसी भी वैध निवेश प्लेटफॉर्म में अविश्वसनीय है।
—
कैसे बढ़ता गया घोटाला: एक नेटवर्क की कहानी
शुरुआत सूरत से हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह जाल राजस्थान, झारखंड और महाराष्ट्र तक फैल गया। ग्रीन वॉल के एजेंट्स बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे निवेशकों तक भी पहुंचे — व्हाट्सऐप ग्रुप्स, टेलीग्राम चैनल्स, और ऑनलाइन विज्ञापनों के ज़रिए।
जयपुर के 38 वर्षीय व्यापारी संजय अग्रवाल बताते हैं —
> “हमें लगा कि यह कोई हाई-टेक ट्रेडिंग कंपनी है जो एल्गोरिदम से पैसा बढ़ाती है। 10 लाख लगाए और कुछ महीनों तक छोटे प्रॉफिट दिखे, फिर अचानक सब बंद हो गया।”
ऐसी ही कहानियाँ रांची और कोल्हापुर से भी सामने आईं। कुल मिलाकर, अब तक 150 करोड़ रुपये तक की रकम डूबने की आशंका है।
—
पुलिस जांच: इकोनॉमिक ऑफेंसेज विंग (EoW) की कार्रवाई
सूरत पुलिस की Economic Offences Wing (EoW) अब इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक:
कई बैंक अकाउंट्स को फ्रीज़ किया गया है।
संदिग्धों के ट्रांजैक्शन ट्रेल की जांच चल रही है।
देशभर के 200 से अधिक पीड़ित निवेशकों के बयान लिए गए हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुछ मुख्य आरोपी देश छोड़ने की कोशिश में थे — जिन्हें समय रहते एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया।
—
ट्रेडिंग की आड़ में ठगी का नया मॉडल
यह घोटाला एक नए तरह की ठगी का उदाहरण है — “Prop Trading Fraud” (Proprietary Trading Scam)।
इस मॉडल में फर्म खुद के नाम पर ट्रेड करती है, लेकिन पैसा निवेशकों से लेती है। ग्राहक को ऐसा महसूस कराया जाता है कि वह “मार्केट में ट्रेड कर रहा है”, जबकि वास्तव में उसके पैसे से कोई और सट्टा खेला जा रहा होता है।
ग्रीन वॉल एंटरप्राइजेज ने कई क्लाइंट्स के लिए फर्जी डैशबोर्ड तैयार किए थे — जिन पर “रियल टाइम ट्रेडिंग डेटा” दिखाई देता था। लेकिन जब EoW ने इन सर्वरों की जांच की, तो पता चला कि वे लोकल सॉफ्टवेयर से बनाए गए एनिमेटेड ग्राफिक्स थे — जिनका असल मार्केट से कोई संबंध नहीं था।
—
मनोवैज्ञानिक चालें और सोशल इंजीनियरिंग
इस स्कैम का एक अहम पहलू यह भी है कि इसमें निवेशकों को ट्रस्ट और लोभ दोनों के जरिए फंसाया गया।
1. फेक रेफरेंसिंग:
कंपनी ने खुद को जयनाम ब्रोकिंग का पार्टनर बताया — जिससे लोगों का भरोसा बढ़ा।
2. गैरेन्टी प्रॉफिट:
10–12% मासिक रिटर्न का झांसा दिया गया — जो बैंक या म्यूचुअल फंड से कहीं ज्यादा है।
3. ऑनलाइन फॉलो-अप:
हर महीने “प्रॉफिट रिपोर्ट” और “ट्रेडिंग अपडेट्स” भेजे जाते रहे ताकि निवेशक को लगे सब ठीक चल रहा है।
4. पर्सनल रिलेशन बिल्डिंग:
एजेंट्स ने क्लाइंट्स के साथ दोस्ती और भरोसे का रिश्ता बनाया — शादी-ब्याह और त्यौहारों पर शुभकामनाएं भेजना तक आम था।
—
नुकसान का असर: मिडल क्लास की कमाई पर सबसे बड़ा झटका
घोटाले का सबसे बड़ा असर मिडल क्लास निवेशकों पर पड़ा — वे लोग जो छोटे सपनों के साथ बड़ी उम्मीदें लेकर निवेश की दुनिया में आए थे। कई लोगों ने घर गिरवी रखकर पैसा लगाया, कुछ ने रिटायरमेंट सेविंग्स को दांव पर लगा दिया।
कोल्हापुर की गृहिणी सरिता देशमुख कहती हैं:
> “हमने बेटी की शादी के लिए जो पैसे बचाए थे, वो सब ग्रीन वॉल में लगा दिए। अब हमें नहीं पता कि वो कभी मिलेंगे या नहीं।”
—
नियामक चूक और सबक
यह मामला भारतीय सेबी (SEBI) और एनएसई (NSE) के लिए भी चेतावनी है। हालांकि जयनाम ब्रोकिंग ने इस घोटाले से खुद को अलग बताया है, पर सवाल यह उठता है कि बिना किसी वैध रजिस्टर्ड अनुमति के एक फर्म इतने निवेशक कैसे जोड़ सकी?
विशेषज्ञों के अनुसार, फिनटेक और प्रॉप ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी निगरानी की जरूरत है। हर साल भारत में 30 से अधिक ऐसे घोटाले दर्ज होते हैं जिनका पैमाना करोड़ों में होता है।
—
निवेशकों के लिए चेतावनी संकेत (Red Flags)
1. “गैरेन्टी रिटर्न” की बात सुनते ही सतर्क हो जाएं।
2. किसी भी प्लेटफॉर्म का SEBI रजिस्ट्रेशन नंबर जरूर चेक करें।
3. फिजिकल मीटिंग या डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट के बिना पैसे न भेजें।
4. रियल-टाइम ट्रेडिंग स्क्रीनशॉट्स या रिपोर्ट्स पर भरोसा न करें।
5. रेफरेंस या फेमस नाम के सहारे निवेश न करें।
—
घोटाले की जड़ में डिजिटल भरोसे की विफलता
डिजिटल युग में जब निवेश मोबाइल स्क्रीन तक सीमित हो गया है, तब भरोसे और डेटा का यह मेल कई बार निवेशकों को भ्रमित कर देता है। लोग “ऑनलाइन ब्रांडिंग” देखकर यह मान लेते हैं कि सब वैध है, जबकि असल में उनके पीछे नकली कंपनियां सक्रिय हैं।
यह स्कैम बताता है कि तकनीक जितनी तेजी से अवसर दे रही है, उतनी ही तेजी से जोखिम भी बढ़ा रही है।
—
निष्कर्ष: सूरत से सबक, भविष्य के लिए सावधानी
सूरत प्रॉप ट्रेडिंग स्कैम सिर्फ एक शहर या कंपनी की कहानी नहीं है — यह भारत के लाखों निवेशकों के लिए सबक है।
पैसे की दुनिया में भरोसा सबसे बड़ी पूंजी है, और जब यही भरोसा टूटता है, तो सबसे बड़ी क्षति इंसान की उम्मीदों की होती है।
ग्रीन वॉल एंटरप्राइजेज का पर्दाफाश इस बात का प्रतीक है कि फर्जी निवेश मॉडलों की उम्र छोटी होती है, लेकिन उनका नुकसान बहुत गहरा।
