टीवी सीरियल अनुपमा से घर-घर में पहचान बनाने वाले एक्टर सुधांशु पांडे ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे कठिन दौर के बारे में खुलासा किया है। लोगों की नज़रों में सफल, आत्मविश्वासी और ग्लैमर से भरे इस कलाकार के अंदर एक ऐसा तूफान चल रहा था, जिसका दर्द बहुत गहरा था।

सुधांशु ने बताया कि वे लंबे समय तक डिप्रेशन और पैनिक अटैक से जूझते रहे। यह वो वक्त था जब उनकी ज़िंदगी और करियर दोनों पर खतरा मंडरा रहा था। उनके शब्दों में, “वो वक्त ऐसा था कि मुझे लगा सब खत्म हो गया है। मैं खुद को खो रहा था।”
ग्लैमरस दुनिया के पीछे का अंधेरा
टीवी और फिल्म इंडस्ट्री की चमक-दमक जितनी खूबसूरत बाहर से दिखती है, अंदर से उतनी ही कठिन होती है।
सुधांशु पांडे जैसे कलाकार, जो दर्शकों के दिलों में ‘वनराज शाह’ बनकर राज करते हैं, असल जिंदगी में बेहद अकेलापन महसूस कर रहे थे।
उन्होंने खुलकर कहा —
“लोग सोचते हैं कि कैमरे के सामने मुस्कुराने वाले हम कलाकारों की जिंदगी परफेक्ट होती है।
लेकिन सच तो ये है कि कई बार हम अंदर से टूट चुके होते हैं, पर मुस्कान ओढ़े रहते हैं।”
डिप्रेशन और पैनिक अटैक का दौर
सुधांशु ने बताया कि कुछ साल पहले वे लगातार बेचैनी, नींद न आना और घबराहट जैसी समस्याओं से गुजर रहे थे।
पहले तो उन्होंने इसे थकान समझा, लेकिन बाद में जब स्थिति बिगड़ने लगी, तो उन्हें समझ आया कि यह डिप्रेशन और पैनिक डिसऑर्डर है।
उन्होंने कहा,
“मुझे लगता था कि दिल की धड़कन रुक जाएगी, सांस नहीं आ रही…
मैं कई बार आधी रात को उठकर सोचता कि अब सब खत्म हो गया।”
ऐसे पैनिक अटैक कई बार आए। वे शूटिंग के बीच में भी घबरा जाते थे।
“मैं कैमरे के सामने खड़ा होता था, लेकिन अंदर से डर, बेचैनी और उदासी का ज्वालामुखी फूट रहा था।”
परिवार बना सहारा
इस कठिन समय में सुधांशु के परिवार ने उनका साथ नहीं छोड़ा।
उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी और दोनों बेटों ने उन्हें इस अंधेरे से निकालने में बड़ी भूमिका निभाई।
“जब मुझे लगता था कि अब सब खत्म हो गया है, तब मेरी पत्नी ने मेरा हाथ थामा।
उन्होंने कहा, ‘तुम गिर सकते हो, लेकिन हार नहीं सकते।’
शायद उसी प्यार ने मुझे दोबारा खड़ा किया।”
उनकी यह कहानी उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा है, जो मानसिक स्वास्थ्य की लड़ाई अकेले लड़ रहे हैं।
करियर का दबाव और असुरक्षा
सुधांशु पांडे लंबे समय से इंडस्ट्री में हैं। अनुपमा से पहले उन्होंने कई फिल्मों और सीरियल्स में काम किया, लेकिन उन्हें बड़ी पहचान ‘वनराज शाह’ के किरदार से मिली।
इस किरदार ने उन्हें रातोंरात फेम दिलाया, लेकिन सफलता के साथ दबाव भी आया।
“जब शो हिट हुआ, तो मुझ पर उम्मीदों का पहाड़ टूट पड़ा।
मैं खुद को हर समय साबित करने की कोशिश में था।
धीरे-धीरे यह तनाव मेरे मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालने लगा।”
उन्होंने स्वीकार किया कि पब्लिक लाइफ में रहना हमेशा आसान नहीं होता।
“हर दिन कैमरे के सामने रहना, आलोचना झेलना, और परफेक्ट दिखने की कोशिश करना… ये सब अंदर से तोड़ देता है।”
सोशल मीडिया का असर
सुधांशु ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया ने मानसिक तनाव को और बढ़ा दिया।
“आप चाहे कितने भी अच्छे हों, कोई न कोई आपको जज करेगा।
जब लोग बिना जाने आपकी निजी जिंदगी पर टिप्पणी करते हैं, तो वो बहुत तकलीफ देता है।”
उन्होंने कहा कि उन्हें कई बार ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा।
कभी किसी सीन को लेकर, तो कभी उनके को-स्टार्स के साथ अफवाहों की वजह से।
“हर बार खुद को समझाना मुश्किल था कि मैं गलत नहीं हूं। लेकिन अंत में मैंने सीखा कि खुद से प्यार करना जरूरी है।”
स्वस्थ होने की यात्रा
सुधांशु ने अपनी रिकवरी की कहानी भी साझा की।
उन्होंने कहा कि उन्होंने थेरेपी, मेडिटेशन, योग और प्रकृति के साथ समय बिताने को अपने जीवन का हिस्सा बनाया।
“शुरुआत में मुझे लगा कि थेरेपी लेना कमजोरी है, लेकिन असल में वही मेरी ताकत बनी।
धीरे-धीरे मैंने खुद को समझा, अपनी भावनाओं को स्वीकार किया।”
आज वे मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर खुलकर बात करते हैं।
“डिप्रेशन शर्म की बात नहीं है। ये एक बीमारी है और इसका इलाज मुमकिन है,” उन्होंने कहा।
‘अनुपमा’ से मिली नई पहचान
शो अनुपमा ने सुधांशु को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
उन्होंने बताया कि इस शो के दौरान ही वे खुद के प्रति और सजग हुए।
“वनराज का किरदार कई मायनों में मुझसे जुड़ता था।
वो भी अपने अहंकार, असुरक्षा और रिश्तों के बोझ से जूझता था।
उस किरदार को निभाते हुए मैंने खुद को पहचाना।”
सुधांशु मानते हैं कि इस किरदार ने उन्हें न केवल प्रोफेशनल बल्कि भावनात्मक रूप से भी मजबूत बनाया।
मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बोले सुधांशु
उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर कोई डिप्रेशन या एंग्जायटी जैसी समस्या से जूझ रहा है, तो उसे छिपाना नहीं चाहिए।
“किसी भरोसेमंद से बात करें। हेल्प लें।
अकेले मत झेलिए, क्योंकि जिंदगी बहुत खूबसूरत है।”
उन्होंने कहा कि आज भी वे अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देते हैं।
योग, संगीत और ध्यान उन्हें संतुलित रहने में मदद करते हैं।
“मैं अब जान चुका हूं कि लाइफ में सबसे जरूरी है – खुद की शांति।”
फैंस की प्रतिक्रियाएं
सुधांशु के इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने उन्हें भरपूर समर्थन दिया।
लोगों ने लिखा,
“आपने जो साहस दिखाया, वह प्रेरणादायक है।”
“आपके शब्दों ने हमें हिम्मत दी कि हम भी अपनी मानसिक सेहत पर बात करें।”
कई सेलेब्रिटीज़ ने भी उनकी हिम्मत की सराहना की और कहा कि ऐसे बयान समाज में बदलाव लाने में मदद करते हैं।
सुधांशु का संदेश
लेख के अंत में सुधांशु ने कहा —
“अगर मैं इस दौर से गुजरकर यहां तक पहुंचा हूं, तो कोई भी पहुंच सकता है।
बस खुद पर विश्वास रखें। हर अंधेरे के बाद एक नया सवेरा आता है।”
उनकी यह कहानी न केवल एक कलाकार की निजी जंग की दास्तान है, बल्कि हर उस व्यक्ति की भी है जो अंदर ही अंदर लड़ रहा है लेकिन मुस्कुरा रहा है।
