रेलवे स्टेशन पर टिकट के लिए लगी लंबी कतारें अब इतिहास बनने जा रही हैं। अब वही काम जो पहले खिड़की पर घंटों की मशक्कत के बाद होता था — वह कुछ सेकंड में आपके मोबाइल स्क्रीन पर हो जाएगा।

भारतीय रेलवे का “UTS ऑन मोबाइल ऐप” (Unreserved Ticketing System) अब यात्रियों को यह सुविधा दे रहा है कि वे घर बैठे ही जनरल टिकट बुक कर सकें — बिना किसी लाइन, बिना किसी काउंटर और बिना किसी पेपर टिकट के।
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क्या है “UTS ऑन मोबाइल ऐप”?
UTS यानी Unreserved Ticketing System — यह भारतीय रेलवे द्वारा जारी किया गया एक आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसके ज़रिए आप अनारक्षित (जनरल) टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट, और सीजन पास अपने मोबाइल से ही बुक कर सकते हैं।
यह ऐप Android और iOS दोनों पर उपलब्ध है और इसे रेलवे की डिजिटल इंडिया पहल का हिस्सा माना जा रहा है।
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भोपाल मंडल बना डिजिटल टिकटिंग का रोल मॉडल
भोपाल रेल मंडल ने इस दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है।
मंडल रेल प्रबंधक पंकज त्यागी और वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के नेतृत्व में यात्रियों को लगातार ऐप के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
वाणिज्य विभाग के कर्मचारियों ने स्टेशन परिसर, टिकट काउंटर और प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को ऐप डाउनलोड करवाने और लाइव डेमो देने की पहल की।
> “हम चाहते हैं कि हर यात्री को डिजिटल सुविधा का लाभ मिले। यह ऐप न सिर्फ आसान है, बल्कि पेपरलेस और इको-फ्रेंडली भी है,”
— सौरभ कटारिया, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, भोपाल मंडल
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आँकड़े बताते हैं – जनता अब डिजिटल हो रही है!
अक्टूबर 2025 के ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक,
भोपाल मंडल में 2,53,968 यात्रियों ने “UTS ऑन मोबाइल” ऐप का उपयोग किया। इनमें से 48,557 टिकट मोबाइल से बुक किए गए, जिससे रेलवे को ₹61,65,575 का राजस्व प्राप्त हुआ।
यह आँकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 48.5% की बढ़ोतरी दर्शाता है — यानी लगभग आधा अधिक डिजिटल लेन-देन।
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क्या है इस ऐप की सबसे बड़ी खासियतें?
1. बिना लाइन, बिना झंझट: अब टिकट खिड़की पर खड़े होने की जरूरत नहीं।
2. QR कोड स्कैन से एंट्री: स्टेशन के प्रवेश द्वार पर QR स्कैन कर सकते हैं।
3. पेपरलेस टिकट: मोबाइल स्क्रीन ही आपका टिकट है — प्रिंट की जरूरत नहीं।
4. पास विकल्प: सीजन टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट भी मोबाइल से खरीदे जा सकते हैं।
5. ऑनलाइन वॉलेट: R-Wallet से सीधे भुगतान — कोई तीसरा ऐप नहीं चाहिए।
6. Geo-fencing फीचर: केवल स्टेशन सीमा में रहते हुए ही टिकट बुकिंग की अनुमति।
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बदलाव का असर: रेलवे और यात्रियों दोनों को फायदा
इस डिजिटल पहल से रेलवे को राजस्व पारदर्शिता और तेज़ ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग का फायदा हुआ है।
वहीं यात्रियों को मिल रहा है समय की बचत, भीड़ से राहत, और डिजिटल ट्रैकिंग की सुविधा।
भोपाल निवासी यात्री निखिल जोशी बताते हैं –
> “पहले सुबह-सुबह टिकट के लिए लाइन में लगना पड़ता था। अब बस मोबाइल खोलो, टिकट बुक करो और निकल पड़ो। यह डिजिटल इंडिया की असली झलक है।”
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कैसे करें टिकट बुकिंग?
1. Google Play Store या App Store से “UTS on Mobile” डाउनलोड करें।
2. R-Wallet बनाएं और उसमें पैसा जोड़ें।
3. “Book Ticket” पर क्लिक करें और यात्रा की स्रोत और गंतव्य स्टेशन चुनें।
4. टिकट टाइप चुनें — Journey Ticket / Platform Ticket / Season Ticket।
5. पेमेंट करें और डिजिटल टिकट तैयार!
नोट: प्लेटफॉर्म पर खड़े रहते हुए या स्टेशन के भीतर GPS एक्टिवेट करके ही टिकट बुक करें।
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भोपाल मंडल की रणनीति: जागरूकता अभियान
रेलवे अधिकारियों ने स्टेशन परिसर में “डिजिटल यात्रा – स्मार्ट इंडिया” नाम से अभियान शुरू किया है।
यात्रियों को ऐप के माध्यम से टिकट खरीदने के लाभ बताए जा रहे हैं।
स्कूल और कॉलेज छात्रों को भी इस ऐप के बारे में शिक्षित किया जा रहा है ताकि वे भविष्य के “डिजिटल सिटिज़न” बनें।
> “हमारे लक्ष्य का नाम है — No Queue India! अगर हर यात्री मोबाइल से टिकट खरीदे तो स्टेशन की भीड़ आधी हो जाएगी,”
— पंकज त्यागी, मंडल रेल प्रबंधक, भोपाल
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पर्यावरण के लिए भी लाभकारी
पेपर टिकट खत्म होने से हर महीने लाखों टिकट स्लिप्स की बचत हो रही है।
रेलवे अधिकारियों का अनुमान है कि इस डिजिटल सिस्टम से प्रति वर्ष हजारों टन कागज़ की बचत होगी।
> “UTS ऐप न सिर्फ यात्रियों के लिए सुविधाजनक है, बल्कि यह ग्रीन इंडिया मिशन को भी आगे बढ़ा रहा है,”
— सौरभ कटारिया
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आने वाला भविष्य: एआई और वॉयस आधारित टिकटिंग!
रेल मंत्रालय ने घोषणा की है कि आने वाले संस्करणों में
वॉयस कमांड टिकटिंग, AI आधारित सुझाव, और रीयल-टाइम ट्रैफिक एनालिटिक्स जैसी सुविधाएँ जोड़ी जाएंगी।
जैसे ही आप कहें – “भोपाल से इंदौर का टिकट बुक करो”,
ऐप स्वतः टिकट जनरेट कर देगा।
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यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण टिप्स
मोबाइल की लोकेशन ऑन रखें ताकि GPS टिकटिंग सक्रिय रहे।
बिना टिकट ट्रेन में यात्रा करना अपराध है, इसलिए हमेशा वैध डिजिटल टिकट रखें।
टिकट का स्क्रीनशॉट न लें — ऐप के “Show Ticket” सेक्शन से ही दिखाएं।
R-Wallet में बैलेंस पहले से रखें ताकि नेटवर्क न होने पर भी भुगतान हो सके।
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चुनौतियाँ और सुधार के अवसर
हालांकि ऐप बेहद उपयोगी है, फिर भी कुछ यात्रियों ने नेटवर्क दिक्कतों और R-Wallet में पैसे न जुड़ने की शिकायत की है। रेलवे ने कहा है कि वे इन समस्याओं को हल करने के लिए 24×7 हेल्पलाइन और ऑटो-रिफंड सिस्टम शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
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डिजिटल इंडिया के सपने की दिशा में एक और कदम
UTS ऑन मोबाइल सिर्फ एक ऐप नहीं — यह भारत की डिजिटल यात्रा का प्रतीक बन चुका है। जहां कभी टिकट के लिए सुबह से लाइन लगती थी, वहीं अब एक क्लिक से पूरी यात्रा बुक हो जाती है।
यह वही भारत है जो 21वीं सदी की ओर तेज़ी से दौड़ रहा है| जहां “रेलवे टिकट” भी अब स्मार्टफोन की जेब में समा गया है।
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निष्कर्ष
भोपाल मंडल ने यह साबित कर दिया है कि अगर तकनीक का उपयोग सही दिशा में किया जाए, तो हर समस्या का समाधान संभव है — चाहे वह लंबी कतारें हों या पेपर वेस्टेज।
“UTS ऑन मोबाइल” ऐप सिर्फ टिकट बुक करने का माध्यम नहीं, बल्कि डिजिटल सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण का नया प्रतीक है।
