मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक घटना ने मतदाता सूची से जुड़े कार्यों की गंभीरता को केंद्र में ला दिया है। यहां सहायक बीएलओ मल्हानवाड़ा क्षेत्र से मतदाता पुनरीक्षण संबंधी दस्तावेज लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, लेकिन जिस स्थिति में पहुंचे, वह पूरे प्रशासनिक ढांचे पर सवाल खड़े करती है। कर्मचारी नशे में थे, लड़खड़ा रहे थे, कदम संभल नहीं रहे थे और चेहरे पर बेहिसाब नशा साफ दिखाई दे रहा था। उनकी वाणी अस्पष्ट थी और संदर्भहीन बातें करते हुए वे कार्यालय में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे।

कर्मचारी हाथ में दस्तावेज़ व गणना पत्रक लेकर आए थे, जो सामान्यत: निर्वाचन कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। जब वे कार्यालय परिसर में प्रवेश कर रहे थे, वहां मौजूद लोगों ने यह दृश्य देखा और इसे देखकर आश्चर्य और असंतोष की मिश्रित प्रतिक्रिया दिखाई। वीडियो रिकॉर्ड हुआ, सोशल मीडिया पर पहुंचा और देखते ही देखते वायरल हो गया।
इस घटना ने कई प्रमुख प्रश्न पैदा कर दिए, जैसे कि निर्वाचन जैसे संवेदनशील कार्य में कर्मचारियों के लिए कितनी जिम्मेदारी अपेक्षित है और इस प्रकार की घटना प्रशासनिक ढांचे में मौजूद कमियों को कैसे उजागर करती है।
कार्यालय परिसर में किया हंगामा, वर्दीधारी कर्मचारियों ने बाहर किया
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब सहायक बीएलओ कार्यालय में दाखिल हुए, तो वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उनकी हालत को देखते हुए उन्हें कार्यालय के भीतर प्रवेश करने से रोक दिया। बताया जाता है कि कार्यालय के भीतर जिम्मेदार अधिकारी मौजूद थे। इस स्थिति ने कर्मचारियों को बाहर रोकना आवश्यक समझा ताकि परिसर में अनुशासन बना रहे।
बाहर रोके जाने के बाद कर्मचारी वहीं पर काफी देर तक असंबद्ध बातों को बड़बड़ाते दिखाई दिए। कभी वे किसी अधिकारी के खिलाफ शिकायत करते, कभी कार्यभार अधिक होने का हवाला देते, तो कभी अपनी सेवाओं की अनदेखी होने की बात करते। वहां मौजूद कुछ कर्मचारियों ने शांत करने की कोशिश भी की, लेकिन नशे की हालत में वे अनियंत्रित दिखाई दिए।
उनके अनुसार कार्य का दबाव बहुत अधिक है और अधिकारी कथित रूप से अपमानजनक भाषा का उपयोग करते हैं। मगर उनकी यह बात तथ्यात्मक है या नशे में दिया गया बयान, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने बढ़ाई चिंता
घटना का वीडियो जैसे ही इंटरनेट पर पहुंचा, तुरंत चर्चा शुरू हो गई। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि मतदाता सूची जैसे संवेदनशील विषय पर अपेक्षा होती है कि अधिकारी व कर्मचारी अत्यंत अनुशासित हों।
वीडियो को देखकर कुछ लोग मनोरंजन के दृष्टिकोण से भी प्रतिक्रिया दे रहे थे। लेकिन बड़ी संख्या में नागरिकों और जागरूक वर्ग ने इसे गंभीर चिंता का विषय माना।
लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि यदि कोई व्यक्ति नशे की हालत में दस्तावेज जमा करने पहुंचता है, तो उन दस्तावेज़ों की सटीकता कितनी विश्वसनीय होगी।
ऐसी स्थिति में मतदाता सूची में त्रुटियों की संभावना बढ़ सकती है।
मतदाता सूची में गड़बड़ी होने से कई नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
इसी कारण कई नागरिकों ने आवश्यक प्रशासनिक योजना, उचित प्रशिक्षण और कर्मचारियों पर नियंत्रण की मांग की है।
विभाग जांच में जुटा, कार्यवाही की संभावना
घटना के बाद संबंधित विभाग ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार कर्मचारियों के उच्च अधिकारी ने वीडियो का संज्ञान लिया है।
माना जा रहा है कि मामले की औपचारिक जांच की जाएगी और परिस्थितियों सहित कर्मचारी के आचरण का परीक्षण होगा।
इस प्रकार की स्थिति में कार्रवाई संभावित है, जिसमें निलंबन, सेवा समीक्षा या विभागीय चेतावनी शामिल हो सकती है।
हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक सूचना सार्वजनिक रूप से जारी नहीं हुई है।
मतदाता सूची कार्य व उसकी संवेदनशीलता
मतदाता सूची का संशोधन एक समयबद्ध कार्य होता है, जिसमें कई सूत्रगत प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं।
कर्मचारियों का घर–घर जाना, प्राप्त दस्तावेजों का सत्यापन, पुराने डेटा में सुधार, नए मतदाताओं का सम्मिलन और मृतकों के नाम हटाने जैसे कार्य शामिल हैं।
इनमें से किसी भी चरण में त्रुटि रहने पर चुनाव प्रभावित होते हैं।
यही वजह है कि निर्वाचन कार्यों में कर्मचारियों की कार्यशैली व अनुशासन सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है।
मामले पर कई संगठनों ने जताई चिंता
घटना के बाद कुछ सामाजिक संगठन सक्रिय हुए हैं। लोगों ने कहा कि मतदान अधिकार नागरिकों का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अधिकार है।
यदि कर्मचारी ही संवेदनशीलता नहीं रखेंगे, तो यह लोकतांत्रिक संतुलन को हानि पहुंचा सकता है।
एक स्थानीय नागरिक के अनुसार, यह कोई मनोरंजन का विषय नहीं है। यह पूरे तंत्र की मर्यादा पर प्रश्नचिन्ह लगाने वाला विषय है।
निष्कर्ष
यह घटना केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि इस घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को आईना दिखाया है।
यदि कर्मचारी कार्यस्थल पर शराब पीकर पहुंचता है, तो यह काम के प्रति असम्मान ही नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों को खतरे में डालने जैसा है।
अब सभी की नजरें इस पर होंगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और आने वाले समय में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए क्या व्यवस्था बनती है।
