बॉलीवुड अभिनेता ज़ायेद खान इन दिनों अपनी मां और मशहूर फिल्मकार संजय खान की पत्नी जरीन खान के निधन से गहरे सदमे में हैं।
लेकिन इस दुखद समय में एक ऐसी बात ने सभी का ध्यान खींचा—जब ज़ायेद खान ने अपनी मां का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों से किया। यह कदम न केवल फिल्मी दुनिया में बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया।

कई लोगों के मन में सवाल उठे — एक मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाले अभिनेता ने ऐसा निर्णय क्यों लिया? इसके पीछे क्या कारण था? क्या यह धार्मिक आस्था से जुड़ा था या मां की आखिरी इच्छा का सम्मान? इन सभी सवालों के जवाब ज़ायेद खान की भावनाओं और जरीन खान की जीवन यात्रा में छिपे हैं, जो प्रेम, सहिष्णुता और भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाते हैं।
कौन थीं जरीन खान?
जरीन खान बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और निर्माता संजय खान की पत्नी थीं। उन्होंने अपने जीवन में ग्लैमर और गरिमा का ऐसा संगम दिखाया जिसे आज भी लोग याद करते हैं। जरीन खान न केवल अपने पति के करियर में प्रेरणा का स्त्रोत थीं बल्कि अपने चारों बच्चों – फराह खान, सिमोन खान, सुजैन खान (हृतिक रोशन की पूर्व पत्नी) और ज़ायेद खान – की मजबूत मार्गदर्शक भी थीं।
अपने जीवन के हर पड़ाव पर जरीन ने अपने परिवार को एकजुट रखा। वे समाजसेवी कार्यों और कला से गहरे जुड़ी रहीं। उनकी पहचान केवल “संजय खान की पत्नी” या “हृतिक रोशन की सास” के रूप में नहीं थी, बल्कि एक संस्कारी, समझदार और सहृदय महिला के रूप में भी थी।
निधन की खबर ने तोड़ दिया परिवार को
8 नवंबर 2025 को मुंबई से यह दुखद समाचार आया कि जरीन खान का निधन हो गया। काफी समय से वे बीमार चल रही थीं और पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, उनका स्वास्थ्य पिछले कुछ महीनों से लगातार गिर रहा था। अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और अंततः उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके निधन के बाद पूरा खान परिवार शोक में डूब गया। संजय खान, जो खुद भी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, अपनी पत्नी के जाने से बेहद टूट गए। ज़ायेद खान और उनकी बहनों ने पूरे सम्मान और गरिमा के साथ अंतिम संस्कार की तैयारियां कीं।
हिंदू रीति से हुआ अंतिम संस्कार — क्यों लिया गया यह निर्णय?
जब अंतिम संस्कार के दृश्य सामने आए, तो सभी को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि जरीन खान का अंतिम संस्कार हिंदू परंपरा के अनुसार किया गया। ज़ायेद खान ने खुद उनकी चिता को मुखाग्नि दी — यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। लोगों के मन में सवाल उठा कि मुस्लिम परिवार में ऐसा क्यों हुआ? इस पर परिवार के करीबी सूत्रों ने बताया कि यह फैसला पूरी तरह से जरीन खान की इच्छा के अनुसार लिया गया।
जरीन खान बचपन से ही एक बहुधार्मिक और सांस्कृतिक परिवार में पली-बढ़ी थीं। उन्होंने हमेशा कहा था कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है और सभी धर्मों में समानता का भाव होना चाहिए। वे हिंदू रीति-रिवाजों, संस्कृत मंत्रों और भारतीय परंपराओं से बहुत प्रभावित थीं। उनकी इच्छा थी कि जब उनका अंत समय आए, तो उनका शरीर उसी मिट्टी में विलीन हो, जिससे उन्होंने अपने जीवन की प्रेरणा ली — भारतीय संस्कृति और अध्यात्म।
ज़ायेद खान का भावनात्मक बयान
अंतिम संस्कार के बाद ज़ायेद खान ने मीडिया से कोई औपचारिक बातचीत नहीं की, लेकिन उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट लिखी।
“मां सिर्फ एक धर्म की नहीं होतीं… वो सृष्टि का रूप होती हैं।
आपने मुझे सिखाया कि प्रेम सबसे बड़ा धर्म है।
मैं आपको हमेशा उसी तरह विदा करना चाहता था, जैसे आप चाहती थीं — शांति, गरिमा और प्रेम के साथ।”
उनकी इस पोस्ट को हजारों लोगों ने शेयर किया। बॉलीवुड से लेकर आम दर्शक तक, सभी ने ज़ायेद खान के इस कदम की सराहना की।
बॉलीवुड जगत की प्रतिक्रियाएं
सिनेमा जगत में इस खबर ने गहरी संवेदना पैदा की। हृतिक रोशन, जो जरीन खान के दामाद रह चुके हैं, ने उन्हें “एक सुंदर आत्मा” बताया।
उन्होंने लिखा,
“मां जरीन सिर्फ परिवार की नहीं, हम सबकी मां थीं। उनका दिल बहुत बड़ा था। उनके संस्कार हम सबके भीतर हैं।”
संजय दत्त, शाहरुख खान, फराह खान अली, सुजैन खान, और सिमी ग्रेवाल जैसी हस्तियों ने भी श्रद्धांजलि दी। सभी ने कहा कि जरीन खान का जीवन सहिष्णुता, गरिमा और भारतीयता का प्रतीक था।
धर्म और प्रेम का संगम: खान परिवार का उदाहरण
संजय खान और जरीन खान का विवाह अपने समय में बहुत चर्चा में रहा था। संजय खान मुस्लिम परिवार से थे, जबकि जरीन पारसी और हिंदू संस्कृति से प्रभावित पृष्ठभूमि से थीं। दोनों ने हमेशा एक-दूसरे के धर्म और परंपराओं का सम्मान किया। घर में सभी त्योहार मनाए जाते थे —ईद, दिवाली, क्रिसमस और गणेश चतुर्थी तक। जरीन खान अक्सर कहा करती थीं,
“धर्म अलग हो सकता है, लेकिन इंसानियत और प्रेम का रास्ता एक ही है।”
सोशल मीडिया पर मिली मिश्रित प्रतिक्रियाएं
कुछ लोगों ने इस निर्णय की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह “भारत की गंगा-जमुनी तहजीब” का सबसे सुंदर उदाहरण है।
वहीं कुछ ने धार्मिक दृष्टिकोण से सवाल भी उठाए।
लेकिन बहुसंख्य लोगों ने ज़ायेद खान के इस कदम को मां की इच्छा का सम्मान और धार्मिक एकता का प्रतीक बताया। यह संदेश आज के समाज के लिए बहुत बड़ा सबक है — जहां अक्सर धर्म के नाम पर विभाजन होता है, वहां एक बेटे ने दिखाया कि प्रेम सबसे बड़ा धर्म है।
जरीन खान की विरासत और यादें
जरीन खान भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सीख, उनकी गरिमा और उनकी आत्मीयता हमेशा याद की जाएगी।
उनका परिवार आज भी उसी संस्कार के साथ आगे बढ़ रहा है — जहां आस्था का अर्थ भेदभाव नहीं, बल्कि एकता और प्रेम है। ज़ायेद खान ने अपनी मां को सिर्फ “मां” नहीं, बल्कि “जीवन की दिशा” कहा था। उन्होंने लिखा,
“आपने मुझे सिखाया कि धर्म नहीं, कर्म बड़ा होता है। मैं हमेशा आपको गर्व महसूस करवाने की कोशिश करूंगा।”
निष्कर्ष
जरीन खान की अंतिम यात्रा सिर्फ एक पारिवारिक क्षण नहीं थी — यह एक संवेदनात्मक संदेश थी, जो समाज को याद दिलाती है कि हर धर्म का सार एक ही है — प्रेम और सम्मान। ज़ायेद खान का यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है कि धार्मिक सीमाएं तब मिट जाती हैं, जब बात मां के प्रेम की हो।
