
दोहा की एक शांत-सी शाम अचानक शोर से गूंज उठती है। गेंद हवा चीरती हुई जाती है, बल्ले से टकराती है और स्टेडियम के किसी भी कोने में गिरने की बजाय, सीधे इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाती है।
यह कोई फ़िल्मी सीन नहीं था—यह 14 साल के भारतीय बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी की असाधारण, विस्फोटक और इतिहास-रचने वाली पारी थी, जिसमें उन्होंने सिर्फ 32 गेंदों में शतक ठोक दिया, और अपनी पारी को 42 गेंदों में 144 रन तक ले गए।
एशिया कप राइजिंग स्टार्स के मैच में, इंडिया ए और यूएई के बीच हो रहे मुकाबले में ऐसा लगा मानो वैभव किसी दूसरी ही दुनिया के बल्लेबाज़ हों—जहाँ गेंद का आकार छोटा और उनका आत्मविश्वास विराट हो।
उनकी पारी ने न सिर्फ गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया कि क्या इतनी कम उम्र में ऐसा प्रदर्शन संभव है?
इतना खतरनाक कौन होता है 14 साल की उम्र में?
आज की क्रिकेट दुनिया में जहां तकनीक, फिटनेस और अनुभव को सफलता का सबसे बड़ा आधार माना जाता है, वहीं वैभव ने मानो सारे नियमों को फिर से परिभाषित कर दिया।
14 साल में
इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की टीम के खिलाफ
15 छक्के
11 चौके
100 सिर्फ 31 गेंदों में
कुल 144 रन 42 गेंदों में
यह आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि जुनून और जीनियस का नज़ारा था।
इतना टैलेंट, इतनी निडरता और इतनी तेजी शायद ही किसी युवा खिलाड़ी में कभी दिखी हो। वैभव की यह पारी इतनी तेज थी कि दर्शक स्कोरबोर्ड को देख-देखकर खुद हैरान थे। हर 2–3 गेंद बाद स्कोर में छक्का जुड़ जाता था। यूएई के गेंदबाज़ बार-बार लाइन बदलते, लेंथ बदलते, गति बदलते—लेकिन वैभव का जवाब हमेशा एक ही होता था: “बाउंड्री या उससे बाहर।”
पारी की शुरुआत होते ही मचा कोहराम
भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। पिच पर एकदम सामान्य शुरुआत थी, लेकिन क्रीज पर आते ही वैभव ने संकेत दे दिया कि आज कुछ खास होने वाला है।
पहले 50 रन उन्होंने सिर्फ 17 गेंदों में बनाए—जिसमें 7 छक्के और 5 चौके शामिल थे।
इसके बाद जो हुआ, वो क्रिकेट इतिहास में एक अलग अध्याय बन गया।
वो:
शॉर्ट गेंद को स्क्वायर लेग पार पहुँचा रहे थे,
फुल लेंथ गेंद को लंबी दूरी की यात्रा करा रहे थे,
और स्पिनर की हर गेंद को कट, पुल, स्विंग या फ़्लिक करते हुए दर्शकों के बीच भेज रहे थे।
यूएई के कप्तान के चेहरे पर हताशा दिख रही थी। फील्ड बदलने से फर्क नहीं पड़ा। गेंदबाज़ बदलने से फर्क नहीं पड़ा। वैभव ने हर बदलाव को अपनी बल्लेबाजी का ईंधन बना लिया।
दोहरा शतक भी बन सकता था…
जब पारी का 9वाँ ओवर चल रहा था, दर्शकों को साफ लग रहा था कि वैभव आज टी-20 में डबल सेंचुरी मार देंगे।
गति, आत्मविश्वास और स्ट्राइक रेट—सब कुछ दोहरे शतक की ओर इशारा कर रहा था।
लेकिन एक शानदार शॉट खेलने की कोशिश में वह बाउंड्री पर कैच दे बैठे।
स्टेडियम में एक सेकंड के लिए सन्नाटा छा गया।
144 रन – सिर्फ 42 गेंदों में।
यह पारी भले 150 या 200 तक नहीं पहुंची, लेकिन इसके बाद जो तालियां गूंजी, वह शायद किसी दोहरे शतक पर भी न गूंजतीं। क्योंकि वैभव ने खेल को सिर्फ खेल नहीं बनाया—बल्कि वो हर उस युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा बन गए जो बड़े सपने देखता है।
अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया – IPL 2025 का शतक भी हो गया पीछे
वैभव सूर्यवंशी वैसे भी क्रिकेट जगत में नया नाम नहीं हैं।
2025 के IPL में राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए उन्होंने गुजरात टाइटंस के खिलाफ 35 गेंद में शतक ठोका था।
अब 32 गेंद में नया शतक जमाकर उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया।
क्रिकेट प्रेमियों का कहना है कि अगर वही लय वैभव आगे भी दिखाते रहे, तो आने वाले वर्षों में उन्हें:
टीम इंडिया का अक्रामक ओपनर
विश्व कप का मैच विनर
और टी-20 का सबसे बड़ा रिकॉर्ड होल्डर
बनने से कोई नहीं रोक पाएगा।
भारत-पाकिस्तान की जंग – अब सबकी निगाहें वैभव पर
16 नवंबर को भारत बनाम पाकिस्तान का हाई-वोल्टेज मुकाबला होगा।
क्रिकेट दुनिया में भारत-पाकिस्तान का मैच वैसे ही सबसे बड़ा रोमांच होता है, और जब ऐसा खिलाड़ी मैदान में हो जिसने अभी-अभी टूर्नामेंट को हिला दिया हो, तो उम्मीदें और भी बढ़ जाती हैं।
पाकिस्तान के गेंदबाज जानते हैं कि वैभव को रोकना आसान नहीं होगा।
इंडिया ए के फैंस उम्मीदों से भरे ज़रूर हैं, लेकिन साथ ही इस युवा खिलाड़ी पर दुनिया की नजरें भी टिक चुकी हैं।
इंडिया A स्क्वॉड: नई प्रतिभाओं की उभरती टोली
इस टूर्नामेंट के लिए टीम इंडिया A में कई युवा और धुरंधर खिलाड़ी शामिल हैं:
प्रियांश आर्य
वैभव सूर्यवंशी
नेहल वढेरा
नमन धीर (उपकप्तान)
सूर्यांश शेडगे
जितेश शर्मा (कप्तान + विकेटकीपर)
रमनदीप सिंह
हर्ष दुबे
आशुतोष शर्मा
यश ठाकुर
गुरजापनीत सिंह
विजय कुमार वैश्य
युद्धवीर सिंह चरक
अभिषेक पोरेल (विकेटकीपर)
सुयश शर्मा
स्टैंडबाय में:
गुरनूर सिंह बराड़, कुमार कुशाग्र, तनुश कोटियन, समीर रिजवी और शेख रशीद।
यह टीम भारत के उभरते सितारों का मिश्रण है, लेकिन इस समय चमक की सबसे बड़ी किरण—वैभव सूर्यवंशी—ही हैं।
एक विश्लेषण – क्यों यह पारी सिर्फ रन नहीं, बल्कि एक संदेश है?
वैभव सूर्यवंशी की यह पारी केवल स्कोरकार्ड में अंक जोड़ने वाली नहीं थी।
यह संदेश था—
1. उम्र सिर्फ एक संख्या है।
जब टैलेंट, मेहनत और आत्मविश्वास एक साथ हों, तो 14, 18 या 20 का आंकड़ा मायने नहीं रखता।
2. क्रिकेट का भविष्य बदल रहा है।
नई पीढ़ी की बल्लेबाजी पुरानी तकनीकों को पीछे छोड़कर पावर-हिटिंग को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।
3. भारत में प्रतिभा अनंत है।
वैभव जैसे युवा खिलाड़ी यह साबित कर रहे हैं कि देश में हर गली, मोहल्ले, शहर और गाँव में छुपा हुआ एक सितारा मौका मिलने का इंतजार कर रहा है।
4. बड़े मंच पर प्रदर्शन ही खिलाड़ी की पहचान बनाता है।
IPL का शतक एक उपलब्धि था, लेकिन इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के टूर्नामेंट में ये 144 रन—यह वैभव को ‘नेक्स्ट बिग थिंग’ घोषित करने के लिए काफी हैं।
