भोपाल की सड़कों पर गुरुवार का दिन अलग ही नज़ारा पेश कर रहा था — हर बड़े चौराहे पर पुलिस जवानों की तैनाती, चालान मशीनें चमकतीं, और वाहन चालकों के चेहरे पर हल्की बेचैनी। वजह? शहर में दोपहिया वाहनों पर पीछे बैठने वालों के लिए भी हेलमेट पहनना अब अनिवार्य कर दिया गया है।

मोटर व्हीकल एक्ट के इस पुराने नियम को अब पूरे जोर-शोर से लागू किया जा रहा है। और पुलिस ने साफ संदेश दिया है — “सड़क सुरक्षा में समझौता नहीं चलेगा।”
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दूसरे दिन भी चला चेकिंग अभियान
अभियान का आज दूसरा दिन था, लेकिन पुलिस की सख्ती देखकर ऐसा लगा मानो यह किसी बड़ी मुहिम की शुरुआत हो।
भोपाल में 18 चेकिंग पॉइंट्स पर ट्रैफिक पुलिस ने पूरे दिन चालान कार्रवाई की।
जिनके सिर पर हेलमेट नहीं था — चाहे वह ड्राइवर हों या पीछे बैठे सवार — उन्हें रोककर चालान बनाया गया।
ट्रैफिक पुलिस के एक जवान ने बताया,
> “लोगों को कई दिनों से जागरूक किया जा रहा था। अब नियम तोड़ने पर कार्रवाई ज़रूरी है, वरना हादसे नहीं रुकेंगे।”
चालान और जुर्माना — जानिए कितना कटेगा
बिना हेलमेट चलाने पर: ₹250 का समन शुल्क
पिलियन राइडर (पीछे बैठा व्यक्ति) के बिना हेलमेट पर: ₹300 का चालान
पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई न केवल नियम पालन के लिए, बल्कि जनहानि को रोकने के उद्देश्य से है।
हर महीने भोपाल ट्रैफिक पुलिस आईटीएमएस (Integrated Traffic Management System) के जरिए करीब 5,000 चालान और चेकिंग पॉइंट्स से 3,000 चालान बनाती है।
इस तरह हर महीने करीब 8,000 लोगों को चालान भरना पड़ता है — जिससे लगभग ₹20 लाख का समन शुल्क वसूला जाता है।
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हर ज़ोन में चलित टीमें और POS मशीनें
डीसीपी ट्रैफिक जितेंद्र पवार ने बताया कि शहर में 70 पीओएस मशीनें मौजूद हैं, जिनसे मौके पर ही चालान काटा जाता है।
अब यह कोशिश है कि सभी चालान डिजिटल रूप में (POS मशीन से) बनाए जाएं, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
जिन लोगों के पास ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा नहीं है, उन्हें भी रसीद मशीन से ही दी जाएगी।
यानी अब “मौखिक समझौते” या “जुगाड़” की गुंजाइश नहीं रहेगी।
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स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान
ट्रैफिक विभाग पिछले पखवाड़े से शहर के प्रमुख चौराहों और शिक्षण संस्थानों में लगातार सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चला रहा है।
छात्रों को बताया जा रहा है कि हादसों में सबसे अधिक मौतें 18 से 30 वर्ष की उम्र के युवाओं की होती हैं।
डीसीपी पवार ने अपील की —
> “हेलमेट सिर्फ कानून नहीं, जीवन रक्षा का कवच है। कृपया खुद भी पहनें और अपने साथ बैठे व्यक्ति को भी पहनाएं।”
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भोपाल के प्रमुख 20 पॉइंट्स पर 100 जवान तैनात
शहर में टीटी नगर, लालघाटी, न्यू मार्केट, MP नगर, बोर्ड ऑफिस, और कोलार जैसे 20 प्रमुख स्थानों पर पुलिस जवान पूरे दिन मुस्तैद रहे।
सिर्फ एक दिन में सैकड़ों चालान बनाए गए।
कई लोग हेलमेट नहीं पहनने पर माफी मांगते दिखे, तो कुछ अपनी गलती मानने के बजाय बहाने बनाते नजर आए।
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अजब-गजब बहाने: “बच्ची एडमिट है”, “पुलिसकर्मी ने पहले क्यों नहीं रोका?”
पहले दिन की कार्रवाई में पुलिस को कई दिलचस्प किस्से भी सुनने को मिले।
किसी ने कहा — “मेरी बच्ची अस्पताल में भर्ती है, जल्दी में निकल गया।”
तो कोई बोला — “पुलिसकर्मी तो सामने से गुज़रा, उसने कुछ नहीं कहा तो आपने क्यों रोका?”
टीटी नगर इलाके में एक व्यक्ति तो पुलिस के हाथ जोड़कर माफी मांगता नजर आया।
वहीं, कई बाइक सवार चेकिंग देखकर बाइक घुमाकर भाग निकले।
लालघाटी पर तो कुछ स्थानों पर पुलिस और सवारों के बीच बहस भी देखने को मिली।
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पुलिस का लक्ष्य — हादसे घटाना, नहीं चालान बढ़ाना
भले ही कई लोग इस सख्ती को “राजस्व वसूली” मान रहे हों, लेकिन ट्रैफिक पुलिस का तर्क साफ है —
“हमारा मकसद जुर्माना वसूलना नहीं, जानें बचाना है।”
पिछले साल भोपाल में सड़क हादसों में 400 से अधिक लोगों की मौत दर्ज की गई थी।
इनमें से 70% मामलों में पीड़ित हेलमेट नहीं पहने हुए थे।
यही वजह है कि इस बार प्रशासन ने इस नियम को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है।
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डिजिटलीकरण और पारदर्शिता: ट्रैफिक सिस्टम का नया चेहरा
भोपाल ट्रैफिक पुलिस अब पुराने तरीकों को छोड़कर तकनीकी सिस्टम्स पर निर्भर हो रही है।
हर चालान POS मशीन से बनने के अलावा, आईटीएमएस के जरिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों से भी ट्रैफिक उल्लंघन पकड़ जा रहे हैं।
भविष्य में, पुलिस विभाग चाहता है कि हर चालान और भुगतान रीयल टाइम में मॉनिटर हो — ताकि न कोई चालक जुर्माने से बचे, न कोई अधिकारी लापरवाह हो।
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ट्रैफिक नियम तोड़ने के पीछे की मानसिकता
भोपाल के ट्रैफिक एक्सपर्ट और समाजशास्त्री डॉ. सुनील जोशी कहते हैं:
> “भारत में हेलमेट को लोग कानून नहीं, बोझ समझते हैं। लेकिन वही हेलमेट जब ज़िंदगी बचाता है, तब अहसास होता है कि यह सबसे बड़ा सुरक्षा कवच था।”
उन्होंने बताया कि नियम तोड़ने वालों में ज़्यादातर युवा हैं, जो ‘कुछ नहीं होगा’ वाली सोच के साथ चलते हैं।
लेकिन पुलिस की इस कार्रवाई से धीरे-धीरे यह मानसिकता बदलने की उम्मीद है।
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आम जनता की प्रतिक्रिया — “ठीक है नियम, लेकिन सुविधाएँ भी दें”
कई नागरिकों ने पुलिस की पहल का स्वागत किया, लेकिन कुछ सवाल भी उठाए।
कुछ लोगों ने कहा कि शहर के कई इलाकों में हेलमेट की क्वालिटी और कीमत बड़ी चिंता का विषय है।
कई दुकानदार अभी भी घटिया गुणवत्ता वाले हेलमेट बेच रहे हैं।
एक युवक ने कहा —
> “सरकार को सख्ती करनी है तो पहले हेलमेट सस्ते और भरोसेमंद कराए जाएं।”
