मध्यप्रदेश बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (MPBSE) की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं आगामी वर्ष 2026 के लिए 7 फरवरी से आयोजित की जाने वाली हैं। हालांकि, छात्रों और अभिभावकों के लिए यह खबर चिंता का विषय बनी हुई है कि अब तक परीक्षाओं की तैयारी में काफी देरी दिखाई दे रही है।
मध्यप्रदेश बोर्ड की ओर से सैंपल पेपर तैयार नहीं हुए, न ही परीक्षा केंद्रों की सूची अंतिम रूप से निर्धारित की गई है। वहीं, शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव कार्य में लगाई जाने के कारण भी तैयारी में धीमापन आया है।

परीक्षा केंद्र और व्यवस्थाओं की देरी
हर साल लगभग 4,000 परीक्षा केंद्र बनाए जाते हैं, जिनमें आवश्यक व्यवस्थाओं और सुरक्षा के उपाय सुनिश्चित किए जाते हैं। आमतौर पर, इन केंद्रों की सूची सितंबर तक तैयार हो जाती है, ताकि वहां व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जा सके। लेकिन इस बार, सचिव का पद खाली होने और शिक्षकों के चुनावी कार्य में लगे होने के कारण यह प्रक्रिया पिछड़ गई है।
बोर्ड सचिवालय की ओर से अब तक सैंपल पेपर अपलोड नहीं किए गए, जिससे छात्रों के लिए मार्गदर्शन और अभ्यास में भी कठिनाई आ रही है। इस वजह से छात्रों और अभिभावकों में परीक्षा के समय और तैयारी को लेकर बेचैनी और तनाव बढ़ा है।
नकल रोकने के उपाय
मध्यप्रदेश बोर्ड ने नकल रोकने के लिए इस बार 200 परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम विद्यार्थियों की सुरक्षा और परीक्षा की ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आधुनिक तकनीक छात्रों के लिए परीक्षा के समय अनुशासन और निष्पक्षता सुनिश्चित करेगी।
शिक्षकों की भूमिका और चुनौतियाँ
शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव कार्य में लगने से परीक्षा केंद्र की तैयारी में और भी देरी हुई है। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि चुनावी कार्य में लगे शिक्षकों को परीक्षा की तैयारियों में शामिल करना चुनौतीपूर्ण है। इसके कारण, परीक्षाओं के संचालन के लिए आवश्यक कर्मियों की कमी और भी स्पष्ट हो रही है।
सिस्टम में पद रिक्तता का प्रभाव
सचिव के पद के खाली होने से प्रशासनिक कार्यों की धीमी गति और निर्णय लेने में देरी हुई है। यह स्थिति परीक्षा की समयबद्ध तैयारी के लिए बाधक साबित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सचिव का पद शीघ्र भर दिया जाता, तो सैंपल पेपर और परीक्षा केंद्रों की सूची समय पर तैयार हो सकती थी।
छात्र और अभिभावक चिंतित
छात्र और अभिभावक दोनों ही इस देरी को लेकर गंभीर चिंतित हैं। बोर्ड की तैयारी में पिछड़ापन और चुनावी कार्य में शिक्षकों की व्यस्तता से छात्रों को अभ्यास और परीक्षा केंद्र के बारे में सही जानकारी नहीं मिल रही है। अभिभावकों ने कहा कि यदि समय पर व्यवस्था नहीं की गई, तो यह छात्रों की मानसिक स्थिति और परिणामों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
राज्यभर में तैयारियों का मापन
बोर्ड की तैयारियों के अनुसार, अब तक केंद्रों का निर्धारण दिसंबर में संभव हो पाएगा। इसके अलावा, सैंपल पेपर और अन्य परीक्षा सामग्री का वितरण भी देरी से हो सकता है। छात्रों को अपने अध्ययन को स्वयं व्यवस्थित करना पड़ेगा और पुराने सैंपल पेपर के आधार पर अभ्यास करना होगा।
तकनीकी उपाय और सुधार
मध्यप्रदेश बोर्ड ने परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी उपायों को अपनाया है। 200 केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे, परीक्षा केंद्रों में सुपरवाइजर की नियुक्ति और केंद्रों में तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह आवश्यक है कि बोर्ड शीघ्र ही सभी परीक्षा केंद्रों का निर्धारण और सैंपल पेपर अपलोडिंग सुनिश्चित करे। इससे छात्रों को समय पर तैयारी और अभ्यास के लिए पर्याप्त मार्गदर्शन मिलेगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि छात्रों के मानसिक तनाव को कम करने के लिए बोर्ड को नियमित अपडेट जारी करना चाहिए।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश बोर्ड की 10वीं और 12वीं परीक्षा 2026 के लिए तैयारी अभी भी अधूरी है। चुनावी व्यस्तता, सचिव पद का रिक्त होना और सैंपल पेपर अपलोड न होना छात्रों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। तकनीकी उपाय जैसे सीसीटीवी कैमरे, सुपरवाइजर और अन्य संसाधन इस प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने में मदद करेंगे, लेकिन बोर्ड को समयबद्ध और व्यवस्थित कार्रवाई करना अत्यंत आवश्यक है।
छात्रों को चाहिए कि वे समय रहते अभ्यास और तैयारी पर ध्यान दें, और बोर्ड के अपडेट और सूचनाओं को नियमित रूप से फॉलो करें।
