मुख्य बातें
- मध्यप्रदेश में आईएएस अधिकारियों की पदोन्नति के लिए विभागीय स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं।
- तीन अधिकारियों को प्रमुख सचिव और 2011 बैच के 16 अधिकारियों को सचिव पद पर पदोन्नति मिल सकती है।
- विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक दिसंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में प्रस्तावित है।
- लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ से नवंबर के दूसरे सप्ताह तक जांच रिपोर्ट मांगी गई है।

मध्यप्रदेश में नए साल की शुरुआत के साथ प्रशासनिक अधिकारियों के पदों में बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रस्तावित सूची के अनुसार, तीन अधिकारियों को प्रमुख सचिव और 2011 बैच के 16 आईएएस अधिकारियों को सचिव पद पर पदोन्नत किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक और संबंधित जांच रिपोर्टों के आधार पर होगा।
सामान्य प्रशासन विभाग ने पदोन्नति से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों की विभागीय स्थिति और उनके खिलाफ लंबित जांच से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है। इसके लिए लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से भी रिपोर्ट मांगी गई है।
दिसंबर में होगी पदोन्नति समिति की बैठक
पदोन्नति की प्रक्रिया में विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह बैठक दिसंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में आयोजित किए जाने की तैयारी है।
इस बैठक में पात्र अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, उपलब्ध पदों और संबंधित विभागों से प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर पदोन्नति के प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक आदेश जारी किए जाने की संभावना जताई गई है।
प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक, पदोन्नति एक जनवरी 2027 से प्रभावी हो सकती है। हालांकि, इसे अंतिम आदेश जारी होने से पहले निश्चित निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।
लोकायुक्त और EOW से मांगी रिपोर्ट
पदोन्नति प्रक्रिया में अधिकारियों से संबंधित जांच की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। सामान्य प्रशासन विभाग ने लोकायुक्त संगठन और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ से नवंबर के दूसरे सप्ताह तक रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है।
इन रिपोर्टों के जरिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लंबित शिकायतों, जांच और अन्य प्रासंगिक मामलों की स्थिति की जानकारी जुटाई जाएगी। विभागीय पदोन्नति समिति के सामने उपलब्ध रिकॉर्ड रखा जाएगा, ताकि पात्रता पर विचार करते समय जरूरी तथ्यों को ध्यान में रखा जा सके।
इस समय यह स्पष्ट नहीं है कि किसी अधिकारी की पदोन्नति पर जांच के कारण कोई विशेष रोक या आपत्ति सामने आई है। इसलिए रिपोर्ट आने और समिति की बैठक होने से पहले सभी प्रस्तावित नामों को अंतिम सूची मानना उचित नहीं होगा।
तीन अधिकारियों को प्रमुख सचिव पद
प्रस्तावित पदोन्नति में तीन अधिकारियों के नाम प्रमुख सचिव पद के लिए सामने आए हैं। इनमें स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव संजय गोयल, कृषि सचिव निशांत वरवड़े और मुंबई में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ ज्ञानेश्वर पाटिल शामिल हैं।
यदि विभागीय प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताएं पूरी होती हैं, तो इन अधिकारियों को प्रमुख सचिव पद पर पदोन्नति मिल सकती है। यह पद राज्य प्रशासन में वरिष्ठ स्तर का महत्वपूर्ण पद माना जाता है। प्रमुख सचिव विभिन्न विभागों के प्रशासनिक संचालन, नीतिगत फैसलों और विभागीय समन्वय में अहम जिम्मेदारी निभाते हैं।
2011 बैच के 16 अधिकारी बन सकते हैं सचिव
प्रमुख सचिव पद के अलावा सचिव स्तर पर भी पदोन्नति की तैयारी है। जानकारी के अनुसार, 2011 बैच के 16 आईएएस अधिकारियों को सचिव पद पर पदोन्नत किए जाने का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित नामों में ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम की अधिकारी नेहा मारव्या, जल निगम के प्रबंध संचालक वीएस चौधरी कोलसानी और मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर सचिव चंद्रमौली शुक्ला शामिल हैं।
इसके अलावा कृषि विभाग के संचालक उमाशंकर भार्गव और हाउसिंग बोर्ड आयुक्त गौतम सिंह का नाम भी संभावित पदोन्नति सूची में बताया गया है। शेष अधिकारियों के नामों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर क्या होगा असर
आईएएस अधिकारियों की पदोन्नति केवल पदनाम में बदलाव नहीं होती। वरिष्ठता और पद के अनुरूप अधिकारियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव हो सकता है। प्रमुख सचिव और सचिव स्तर पर पदोन्नति से राज्य के विभिन्न विभागों में प्रशासनिक नेतृत्व की संरचना प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, पदोन्नति के बाद किस अधिकारी को कौन-सा विभाग या नई जिम्मेदारी मिलेगी, इस बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई विवरण नहीं है। पदोन्नति आदेश और उसके बाद होने वाले संभावित प्रशासनिक फेरबदल को अलग-अलग प्रक्रियाओं के रूप में देखना होगा।
फिलहाल सामान्य प्रशासन विभाग के सामने नवंबर में जांच रिपोर्ट प्राप्त करने और दिसंबर में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित करने की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य है। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित तीन अधिकारियों और 2011 बैच के 16 अफसरों में से कितनों को पदोन्नति मिलती है।
FAQ’s
1. मध्यप्रदेश में IAS अधिकारियों की पदोन्नति कब से प्रभावी हो सकती है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित पदोन्नति एक जनवरी 2027 से प्रभावी हो सकती है। इसके लिए दिसंबर में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित करने की तैयारी है। अंतिम तारीख और पदोन्नति की पुष्टि सरकारी आदेश जारी होने के बाद ही होगी।
2. MP IAS Promotion में कितने अधिकारियों को पदोन्नति मिल सकती है?
प्रस्तावित योजना के अनुसार, तीन अधिकारियों को प्रमुख सचिव और 2011 बैच के 16 अधिकारियों को सचिव पद पर पदोन्नत किया जा सकता है। यानी कुल 19 अधिकारियों के पदोन्नति प्रस्ताव पर विचार होना है। यह संख्या अंतिम निर्णय और विभागीय प्रक्रिया के अधीन है।
3. विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक कब होगी?
विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक दिसंबर 2026 के पहले या दूसरे सप्ताह में आयोजित किए जाने की तैयारी है। इस बैठक में अधिकारियों की पात्रता और संबंधित रिकॉर्ड पर विचार किया जाएगा। इसके बाद दिसंबर के अंतिम सप्ताह में आदेश जारी होने की संभावना है।
4. पदोन्नति से पहले लोकायुक्त और EOW की रिपोर्ट क्यों मांगी गई है?
पदोन्नति प्रक्रिया के दौरान संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लंबित जांच और शिकायतों की स्थिति जानना जरूरी होता है। इसी उद्देश्य से लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ से रिपोर्ट मांगी गई है। इन रिपोर्टों को विभागीय पदोन्नति समिति के विचार के लिए उपलब्ध कराया जाना है।
5. प्रमुख सचिव पद के लिए किन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं?
प्रस्तावित सूची में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव संजय गोयल, कृषि सचिव निशांत वरवड़े और मुंबई में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ ज्ञानेश्वर पाटिल के नाम शामिल हैं। इन्हें प्रमुख सचिव पद पर पदोन्नत किए जाने की संभावना बताई गई है।
6. क्या पदोन्नति के बाद अधिकारियों के विभाग भी बदलेंगे?
पदोन्नति और विभागों का आवंटन दो अलग-अलग प्रशासनिक प्रक्रियाएं हैं। पदोन्नति के बाद अधिकारियों की नई जिम्मेदारियां तय की जा सकती हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी में विभागों के संभावित बदलाव का कोई विवरण नहीं है। इसके लिए अलग से जारी होने वाले सरकारी आदेशों का इंतजार करना होगा।





