आज के समय में टैटू युवाओं की पसंद बन चुका है, लेकिन जैसे टैटू बनवाना आसान लगने लगा है, वैसा टैटू हटवाना बिल्कुल भी नहीं। इंदौर से सामने आया ताज़ा मामला उन खतरों को उजागर करता है, जिन्हें लोग अनदेखा कर देते हैं। ये घटना सिर्फ एक मेडिकल लापरवाही नहीं, बल्कि एक ऐसे रैकेट का संकेत है जहाँ फर्जी डॉक्टर बिना प्रमाणपत्र के गंभीर प्रक्रियाएँ कर रहे हैं। और परिणाम—जीवनभर के घाव, आर्थिक नुकसान और टूटते करियर।
इंदौर की युवती ईशा जायसवाल का मामला इसी व्यापक समस्या का हिस्सा है। एयर होस्टेस बनने के सपने के साथ एविएशन कोर्स कर रही यह युवती एक मामूली सी दिखने वाली प्रक्रिया—टैटू हटाने—के लिए गई थीं। लेकिन नतीजा ऐसा आया जिसने उसका भविष्य अंधेरे में धकेल दिया।

यह रिपोर्ट बताती है—कैसे गलत लेजर तकनीक, अनट्रेंड व्यक्ति, फर्जी प्रमाणपत्र और क्लीनिक की लापरवाही ने एक लड़की का करियर तोड़ दिया।
मामले की शुरुआत: टैटू हटाने की सामान्य प्रक्रिया से शुरू हुआ दर्द का सफर
ईशा जायसवाल अपने हाथ पर बने टैटू को हटवाना चाहती थीं, क्योंकि एयरलाइंस सेक्टर में स्किन विजिबिलिटी, ग्रूमिंग और टैटू पॉलिसी महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने इंटरनेट पर विज्ञापन देख कर “प्योरशेडो क्लीनिक” (ओल्ड पलासिया, इंदौर) का चयन किया। क्लीनिक ने दावा किया—
- सुरक्षित लेजर ट्रीटमेंट
- अनुभवी डॉक्टर
- फास्ट रिजल्ट
- बिना दर्द प्रक्रिया
क्लीनिक की सिफारिश करने वाला युवक दीपक खुद को डॉक्टर बताता था। यही इस मामले का पहला संदेह बना।
गलत लेजर ट्रीटमेंट कैसे हुआ? युवती का बयान
ईशा के अनुसार—
- 10 सत्रों तक लेजर किया गया
- हर सत्र के बाद दर्द बढ़ता गया
- त्वचा कालिख की तरह काली पड़ने लगी
- जलन, फफोले और जलने के निशान बनने लगे
- सुधार दूर-दूर तक नहीं दिखा
यहाँ दो बड़े मेडिकल गलती साफ नज़र आती हैं:
1. गलत वेवलेंथ का लेजर
टैटू हटाने के लिए Q-Switched Laser का उपयोग किया जाता है। गलत लेजर स्किन को जला देता है।
2. पेशेवर डर्मेटोलॉजिस्ट का अभाव
लेजर एक मेडिकल प्रक्रिया है, इसे केवल MD Dermatologist ही कर सकता है। यहाँ ऐसा कोई एक्सपर्ट मौजूद नहीं था, सिर्फ एक युवक “डॉक्टर” बनकर ट्रीटमेंट कर रहा था।
युवती की स्थिति: प्लास्टिक सर्जन ने भी हाथ खड़े किए
जब हालत बिगड़ गई, ईशा ने एक स्किन स्पेशलिस्ट के पास उपचार लिया। डॉक्टरों ने घरेलू भाषा में कहा—
“यह गलत लेजर से हुआ Burns है।
अब इसे सुधारना बेहद मुश्किल है।
Complete Recovery संभव नहीं।”
कुछ मामलों में प्लास्टिक सर्जरी ही विकल्प होती है, लेकिन डॉक्टर ने बताया— “यहां वह भी संभव नहीं है।” यही वक्त था जब ईशा को समझ आया कि उनके साथ धोखा हुआ है।
एयर होस्टेस बनने का सपना — क्या अब खत्म?
एविएशन इंडस्ट्री में—
- त्वचा साफ होना
- कोई Burn Mark न होना
- Tattoo न होना
- Hands Visible Grooming का हिस्सा
ये सब आवश्यक होता है।
ईशा का हाथ कई जगह से जला, काला पड़ा और स्किन लेयर डैमेज हुई।
इससे—
- इंटरव्यू रिजेक्ट होने
- मेडिकल क्लीयरेंस फेल होने
- और ग्राउंड स्टाफ तक सीमित होने
का खतरा बढ़ गया है।
इसलिए ईशा कहती हैं—
“क्लीनिक की लापरवाही ने मेरा करियर खत्म कर दिया।”
क्लीनिक पर पहले भी लगे आरोप — कहीं यह बड़ा रैकेट तो नहीं?
पहले भी प्योरशेडो क्लीनिक पर गंभीर आरोप लगे थे। पूर्व कर्मचारी शीतल शर्मा के अनुसार—
- संचालक ने ₹25,000 लेकर “UK Board London Certificate” देने का दावा किया
- न कोर्स कराया, न सर्टिफिकेट दिया
- क्लीनिक बिना लाइसेंस के कॉस्मेटिक प्रक्रियाएँ करता है
ऐसे आरोप दिखाते हैं कि यह कोई एक-दो दिन का खेल नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा “फर्जी ब्यूटी ट्रीटमेंट नेटवर्क” हो सकता है।
फर्जी डॉक्टर का असली चेहरा: दीपक कौन है?
क्लीनिक के अनुसार— “दीपक सिर्फ ट्रेनिंग पर आया था।” लेकिन युवती के अनुसार—
- वह खुद को डॉक्टर बताता था
- वह ट्रीटमेंट करता था
- उसने फर्जी भरोसा दिलाया
- फोन पर “डॉ. जानवी” से बात कराई
यहाँ कई सवाल खड़े होते हैं:
- ट्रेनिंग पर आया व्यक्ति मरीज पर लेजर क्यों चला रहा था?
- क्या क्लीनिक के पास मशीन चलाने का लाइसेंस था?
- क्या डॉक्टर की मौजूदगी में प्रक्रिया हुई?
- फर्जी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
प्रशासन और पुलिस: कार्रवाई क्यों रुकी?
ईशा ने शिकायत दर्ज की—
- सीएमएचओ कार्यालय में
- पुलिस के पास
- जांच कमेटी को बयान दिए
लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई। इससे सिस्टम पर भी गंभीर सवाल उठते हैं—
- क्या क्लीनिक किसी बड़े मेडिकल नेटवर्क से जुड़ा है?
- क्या अधिकारियों को जानकारी है, पर कार्रवाई से बचा जा रहा है?
- क्या शहर में ऐसे दर्जनों क्लीनिक चल रहे हैं?
विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह: टैटू हटवाना इतना जोखिम भरा क्यों होता है?
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. संजय पंचोली कहते हैं—
- टैटू हटाना 6–10 महीनों की लंबी प्रक्रिया है
- गलत मशीन, गलत वेवलेंथ स्किन जला देती है
- हर टैटू की इंक, रंग, उम्र अलग होती है
- काले टैटू आसानी से हटते हैं
- हरे, पीले, लाल टैटू हटाना कठिन है
- ये काम सिर्फ MD स्किन डॉक्टर को ही करना चाहिए
गलत लेजर से—
- स्थायी निशान
- हाइपरपिग्मेंटेशन
- Burn marks
- स्किन पतली होना
- Infection
- Patchy skin
हो सकती है।
टैटू हटवाने से पहले कैसे पहचाने असली डॉक्टर?
यह रिपोर्ट पढ़ने वालों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव:
✔ डॉक्टर के पास MD Dermatology होना चाहिए
✔ क्लीनिक का MP Registration होना चाहिए
✔ Laser Machine FDA Approved हो
✔ मशीन चलाने वाला व्यक्ति मेडिकल प्रशिक्षित हो
✔ Written consent लिया जाए
✔ Before–After Photos दिखाए जाएँ
✔ One Session में चमत्कारिक रिजल्ट का दावा = फर्जी
जांच की वर्तमान स्थिति
जांच कमेटी की प्रक्रिया—
- दोनों पक्षों के बयान
- डॉक्टरों की टीम द्वारा केस स्टडी
- मशीन और लाइसेंस की जांच
- फर्जी डॉक्टर की पहचान
- प्रशासन की रिपोर्ट
अभी रिपोर्ट लंबित है।
निष्कर्ष: यह सिर्फ एक मामला नहीं, एक चेतावनी है
यह घटना पूरे शहर और देश के लिए चेतावनी है।
ब्यूटी क्लीनिकों में—
- गलत इंजेक्शन
- गलत लेजर
- फर्जी डॉक्टर
- बिना ट्रेनिंग स्टाफ
- नकली सर्टिफिकेट
- अनरजिस्टर्ड मशीनें
तेजी से बढ़ रही हैं। ईशा का मामला एक लड़की का सपना ही नहीं, बल्कि उस मेडिकल सिस्टम का काला सच दिखाता है जो बिना योग्यता के लोगों को “डॉक्टर” बनने देता है।
