मंगलवार सुबह देश की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई एक बड़ी और समन्वित कार्रवाई ने राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसियों ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े 25 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की, जिससे पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई। यह कार्रवाई अचानक नहीं, बल्कि एक विस्तृत खुफिया जानकारी के विश्लेषण के बाद की गई, जिसमें दिल्ली ब्लास्ट और फरीदाबाद में बरामद विस्फोटकों की जांच से कुछ महत्वपूर्ण सुराग सामने आए थे।

इन सुरागों के मिलते ही जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की रफ्तार बढ़ा दी। देश की सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही दिल्ली धमाके के बाद हाई अलर्ट पर थीं, और जैसे ही इन घटनाओं का नया लिंक सामने आया, जांच का दायरा और बड़ा कर दिया गया। अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर की गई यह कार्रवाई सिर्फ छापेमारी नहीं, बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा ऑपरेशन का हिस्सा बताई जा रही है।
दिल्ली ब्लास्ट: घटना का संक्षिप्त पृष्ठभूमि और सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता
कुछ सप्ताह पहले दिल्ली में हुए ब्लास्ट ने पूरे देश के सुरक्षा तंत्र को हिला दिया था। राजधानी में इस तरह की घटना सिर्फ कानून व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है।
इस घटना के बाद NIA, IB, RAW और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल जैसी कई एजेंसियां लगातार जांच में लगी हुई हैं। जांच में कई तकनीकी सुराग, डिजिटल फुटप्रिंट और कुछ भौतिक प्रमाण मिले, जिनकी बारीकी से पड़ताल चल रही थी।
इसी बीच फरीदाबाद में बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद होने से जांच का दायरा और बढ़ गया। यह बरामदगी खुद में एक बड़ा सवाल थी — इतने विस्फोटक किस मकसद से इकट्ठे किए गए थे? इन्हें कहाँ ले जाया जाना था? किस नेटवर्क के जरिए इनकी सप्लाई हो रही थी?
कई स्तरों पर जांच के बाद सुरक्षा एजेंसियों को कुछ संस्थानों और व्यक्तियों के बीच कुछ संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले।
इसी खोज में अल-फलाह से जुड़े कुछ लोगों का डिजिटल, कॉल रिकॉर्ड और सोशल कनेक्टिविटी एक बार फिर रडार पर आ गया।
फरीदाबाद में बरामद विस्फोटक: जांच में मिले महत्वपूर्ण संकेत
फरीदाबाद से जो विस्फोटक सामग्री मिली, उसमें शामिल थे:
- जिलेटिन स्टिक जैसी सामग्री
- टाइमिंग डिवाइस
- डेटोनेटर
- इलेक्ट्रॉनिक सर्किट
- वायरिंग
- बैटरी मॉड्यूल
यह सामग्री घरेलू उपयोग की नहीं, बल्कि स्पष्ट रूप से विस्फोटक उपकरण तैयार करने के लिए उपयुक्त है।
जांच से पता चला कि कुछ लेन-देन और डिजिटल ट्रेल्स अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों से मेल खाते हैं। इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने छापेमारी की प्रक्रिया तेज की।
मंगलवार सुबह का ऑपरेशन: 25 से अधिक ठिकानों पर एक साथ रेड
सुबह 6 बजे के आसपास जिस समय अधिकतर लोग अपने दैनिक कामों की शुरुआत कर रहे थे, केंद्रीय एजेंसियों ने एक बड़ा ऑपरेशन शुरू कर दिया।
इस ऑपरेशन में शामिल थे:
- NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी)
- ED (प्रवर्तन निदेशालय) — आर्थिक ट्रेल की जांच के लिए
- IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो)
- दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल
- हरियाणा STF
- डिजिटल फॉरेंसिक टीमें
सभी टीमों ने मिलकर:
- विश्वविद्यालय परिसर
- हॉस्टल
- प्रशासनिक ब्लॉक
- कुछ फैकल्टी क्वार्टर
- बाहरी ठिकाने
- पूर्व और वर्तमान स्टाफ से जुड़े स्थान
पर छापेमारी की।
यह छापेमारी सिर्फ स्थानीय नहीं थी। दिल्ली, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, गुरुग्राम और कुछ अन्य स्थानों पर भी एक साथ रेड की गईं।
छापेमारी के दौरान क्या मिला? शुरुआती जानकारी
(नोट: यह जानकारी समाचार स्रोतों और प्रारंभिक खुफिया विवरण पर आधारित है। किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव है।)
सूत्रों के मुताबिक छापेमारी में:
- कई लैपटॉप और डेस्कटॉप जब्त किए गए
- मोबाइल फोन और SIM कार्ड बरामद हुए
- पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क
- कुछ रजिस्टर और प्रशासनिक दस्तावेज
- परिसर के आसपास लगे CCTV फुटेज
- लेन-देन से जुड़े कुछ वाउचर
इकट्ठे किए गए हैं।
इसके अलावा कुछ ऐसे कागजात भी मिले हैं, जो विश्वविद्यालय से जुड़े बाहरी गतिविधियों को दर्शाते हैं। हालांकि यह सब अभी शुरुआती स्तर की जानकारी है, और जांच के बाद ही इनका वास्तविक अर्थ सामने आएगा।
यूनिवर्सिटी प्रशासन की भूमिका: क्या कहा प्रबंधन ने?
छापेमारी के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने कहा कि:
- वे जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं
- कोई भी दस्तावेज रोक कर नहीं रखा जाएगा
- यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा को लेकर जिम्मेदारी का पालन किया जा रहा है
- अगर कोई व्यक्ति व्यक्तिगत स्तर पर किसी गलत गतिविधि में शामिल है, तो यूनिवर्सिटी उसकी जिम्मेदारी नहीं ले सकती
प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी एक शैक्षणिक संस्थान है और उसका उद्देश्य सिर्फ शिक्षा प्रदान करना है।
छात्रों में दहशत, अभिभावकों में चिंता
जैसे ही छापेमारी की खबर मीडिया और सोशल मीडिया पर पहुंची, छात्रों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कई छात्र अपने हॉस्टल कमरों से बाहर आ गए और स्थिति को समझने की कोशिश करने लगे।
कुछ छात्रों ने कहा:
- “हम इस तरह की किसी भी गतिविधि से दूर हैं, हमें कुछ पता नहीं था।”
- “हम पढ़ने आए हैं, लेकिन ऐसी खबरों से मानसिक दबाव बढ़ता है।”
अभिभावक भी लगातार फोन कर छात्रों का हाल पूछते रहे।
राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- कोई भी जांच सिर्फ सतह पर मिले संकेतों से शुरू होती है
- जब तक पूर्ण जांच पूरी नहीं हो जाती, किसी भी प्रकार का निष्कर्ष निकालना गलत है
- एजेंसियों का काम सबूत इकट्ठा करना और संबंधों की कड़ियों को जोड़ना है
- यह कार्रवाई व्यापक सुरक्षा दृष्टि से एक एहतियाती कदम भी हो सकती है
जांच आगे कहाँ बढ़ेगी?
जांच एजेंसियों ने बरामद डिजिटल सामग्री का फॉरेंसिक परीक्षण शुरू कर दिया है।
आने वाले कुछ दिनों में:
- कई लोगों से पूछताछ होगी
- कुछ को नोटिस भेजे जा सकते हैं
- डिजिटल डेटा की डिकोडिंग होगी
- हर कॉल रिकॉर्ड, चैट और लेन-देन की जांच होगी
यह जांच लंबे समय तक चल सकती है।
