दिल्ली 2025 कार ब्लास्ट मामले में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। यह सिर्फ एक विस्फोट नहीं था, बल्कि एक योजनाबद्ध आतंकी हमला था जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया। धमाके के बाद से खुफिया एजेंसियों, NIA, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और ED लगातार जांच में जुटी थीं। इसी दौरान एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने मामले को एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंचा दिया।
वीडियो में मुख्य आरोपी उमर नबी, जो अब गिरफ्त में है, आत्मघाती हमलों के बारे में खतरनाक बयान देता नजर आ रहा है। इसके साथ ही ED द्वारा व्हाइट कॉलर टेररिज्म और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत चार राज्यों में 30 ठिकानों पर की गई छापेमारी इस पूरे नेटवर्क के बड़े होने की ओर इशारा करती है।

यह लेख इस पूरे मामले का गहरा विश्लेषण प्रस्तुत करता है —
• उमर नबी का वीडियो कौन-सा खतरा उजागर करता है?
• कौन इस मॉड्यूल को चला रहा था?
• फंडिंग कहां से आ रही थी?
• आतंक का यह नया चेहरा भारत के सामने क्या चुनौतियाँ खड़ी करता है?
उमर नबी का सामने आया वीडियो — आतंक की मानसिकता का खुला दस्तावेज़
जांच में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सुरक्षा एजेंसियों को उमर नबी द्वारा धमाके से पहले बनाया गया एक वीडियो मिला। वीडियो लगभग 1 मिनट 20 सेकंड का है, जिसमें वह एक कमरे में अकेला बैठा कैमरे से बात कर रहा है।
उसके शब्दों में एक खतरनाक वैचारिक जहर साफ दिखाई देता है —
“इस्लाम में सुसाइड हराम है… लेकिन बॉम्बिंग जायज।”
“जब इंसान को लगता है कि उसकी मौत तय है, तो वह एक खतरनाक मानसिक स्थिति में चला जाता है।”
वीडियो में वह अंग्रेजी में बोल रहा है, जिससे यह पता चलता है कि वह ग्लोबल प्रोपेगेंडा कंटेंट से प्रभावित था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कई अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन इस प्रकार की वीडियो स्ट्रीमिंग और indoctrination पद्धति का उपयोग करते हैं।
आत्मघाती हमलों पर ‘जायज’ होने का दावा — एक चरम मानसिक अवस्था का संकेत
उमर नबी के वीडियो में बार-बार यह झलकता है कि वह अपनी सोच को स्थिर नहीं, बल्कि एक विकृत दिमाग की उपज मानता है। वह कहता है—
“Self-sacrifice becomes a destiny… when a man accepts his death, bombing becomes a path.”
जांच अधिकारियों का यह भी कहना है कि यह वीडियो एक “martyrdom message” जैसा है, जो अक्सर वैश्विक आतंक संगठन अपने सदस्यों से हमले से पहले रिकॉर्ड करवाते हैं।
दिल्ली कार ब्लास्ट — हमले की रूपरेखा और उसका अध्ययन
धमाका राजधानी के भीड़ भरे हिस्से में हुआ था। जिस कार का उपयोग किया गया, उसमें
• हाई-इंटेंसिटी विस्फोटक
• प्रेशर ट्रिगर
• फ्यूल-असिस्टेड ब्लास्ट मैकेनिज्म
जैसे तत्व पाए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि यह हमला बड़े पैमाने पर जनहानि के उद्देश्य से किया गया था, पर समय से मिली खुफिया सूचना के चलते नुकसान नियंत्रित रहा।
व्हाइट कॉलर टेररिज्म — ED की बड़ी जांच
उधर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धमाके से जुड़े धन शोधन और वित्तीय फंडिंग की कड़ियों को खोजते हुए चार राज्यों में 30 जगहों पर छापा मारा।
जांच में पाया गया कि:
✔ फंडिंग हवाला नेटवर्क द्वारा की गई
✔ कुछ NGO और कंपनियों का इस्तेमाल “फंड रूटिंग” में हुआ
✔ ‘वैध व्यवसाय’ की आड़ में अवैध गतिविधियों को छुपाया गया
ED की शुरुआती रिपोर्ट यह बताती है कि इस नेटवर्क में शिक्षित, नौकरीपेशा और आर्थिक रूप से स्थिर लोग भी शामिल थे — यह है व्हाइट कॉलर टेररिज्म।
उमर नबी कौन था? शुरूआती प्रोफाइल से लेकर चरमपंथी बनने तक
उमर नबी की प्रोफाइल चौंकाने वाली है। वह उच्च शिक्षा प्राप्त, तकनीक समझने वाला, सोशल मीडिया पर सक्रिय और कई विदेशी अकाउंट से जुड़ा हुआ पाया गया।
उसके परिवर्तन का एक अनुमानित टाइमलाइन:
• 2022–23: कट्टरपंथी विचारधाराओं का ऑनलाइन संपर्क
• 2024: डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड चैट समूहों में प्रवेश
• 2025: आतंकी मॉड्यूल से सक्रिय जुड़ाव
• सितंबर 2025: धमाके की प्लानिंग
• नवंबर 2025: वीडियो रिकॉर्डिंग और हमला
इस पूरी प्रक्रिया में टेक्नोलॉजी की भूमिका बेहद अहम रही। नबी का लैपटॉप और मोबाइल से मिले एन्क्रिप्टेड डेटा ने कई और नेटवर्क का खुलासा किया है।
ब्लास्ट से पहले की गतिविधियाँ — CCTV, मोबाइल डेटा और डिजिटल ट्रेस
CCTV फुटेज और कॉल रिकॉर्डिंग के आधार पर जांच एजेंसियों ने उसकी पूरी मूवमेंट ट्रैक की।
• वह दो महीने से अलग-अलग स्थानों पर कई बार दिखाई दिया
• उसने कार एक फर्जी नाम से किराए पर ली
• विस्फोटक सामग्री उसने अलग-अलग स्रोतों से इकट्ठा की
• हमले से पहले सात दिन तक वह “अंडरग्राउंड” था
इस दौरान उसे कई बार लोकल मॉड्यूल से सहायता मिलती रही।
देश में बढ़ता ‘ऑनलाइन कट्टरपंथ’ — एक नई चुनौती
आतंकी संगठन अब हथियारों से ज्यादा इंटरनेट को इस्तेमाल कर रहे हैं।
उमर नबी जैसे कई युवक सोशल मीडिया आधारित कट्टरपंथ से प्रभावित हो रहे हैं।
यह ट्रेंड इसलिए खतरनाक है क्योंकि:
• इसे ट्रैक करना मुश्किल है
• यह तेज़ी से फैलता है
• व्यक्ति अकेले में radicalize हो सकता है
• इसे दुनिया में कहीं से भी संचालित किया जा सकता है
धमाके के बाद देश में सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति का नया अध्याय
लब्ध जानकारी के अनुसार—
✔ कई राज्यों के मॉड्यूल पर नज़र रखी जा रही है
✔ साइबर मॉनिटरिंग तेज की गई
✔ कट्टरपंथी कंटेंट पर सैकड़ों लिंक हटाए गए
✔ विदेशी अकाउंट का ट्रैकिंग मजबूत की गई
निष्कर्ष: एक वीडियो ने खोल दिए आतंक के कई दरवाजे
उमर नबी के वीडियो ने न केवल दिल्ली ब्लास्ट की पृष्ठभूमि को उजागर किया, बल्कि यह भी दिखाया कि आतंकवादी मानसिकता किस तरह धीरे-धीरे किसी भी सामान्य व्यक्ति को अपनी गिरफ्त में ले सकती है। इस वीडियो ने सुरक्षा एजेंसियों को बड़े आतंकी नेटवर्क की झलक दी है, जिसकी जांच अभी भी जारी है।
यह घटना पूरे देश के लिए एक चेतावनी है —
