भारतीय क्रिकेट इतिहास में कई ऐसे क्षण दर्ज हैं, जो अपने भीतर विचित्रता, रोचकता और विवाद की परतें समेटे हुए होते हैं। रणजी ट्रॉफी, जो वर्षों से घरेलू क्रिकेट की रीढ़ मानी जाती है, न केवल खिलाड़ियों के कौशल का मापदंड है, बल्कि ऐसे अनेक अनोखे प्रसंग भी इसी टूर्नामेंट ने जन्म दिए हैं, जो समय-समय पर चर्चा में बने रहते हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला वाकया 19 नवंबर 2025 को रणजी प्लेट मैच में सामने आया, जब मणिपुर और मेघालय के बीच खेले जा रहे मुकाबले में एक बल्लेबाज को ऐसे नियम में आउट दिया गया, जिसकी वजह से पूरा मैच ही एक अलग तरह की सुर्खी बन गया।

सूरत में खेले गए इस मुकाबले में मणिपुर के बल्लेबाज लमाबम अजय सिंह को ‘हिट द बॉल ट्वाइस’ यानी गेंद को दो बार मारने के नियम के तहत आउट करार दिया गया। यह नियम अत्यंत दुर्लभ है और क्रिकेट में शायद ही कभी लागू होता है। इस dismissal को देखकर मैदान में मौजूद दर्शक, खिलाड़ी, कोच, अधिकारी यहां तक कि खुद बल्लेबाज भी कुछ क्षणों के लिए समझ नहीं पाए कि आखिर हुआ क्या है।
मैच की पृष्ठभूमि: एक साधारण मुकाबला असाधारण बन गया
यह मुकाबला रणजी प्लेट लीग के तहत खेला जा रहा था, जहां मेघालय और मणिपुर आमने-सामने थे। दोनों टीमों के लिए यह मैच महत्वपूर्ण था, क्योंकि प्लेट ग्रुप में अंक तालिका की दौड़ हमेशा रोमांचक रहती है। सुबह मौसम साफ था, पिच सूखी दिख रही थी और मेघालय के गेंदबाज शुरुआत से ही मणिपुर के बल्लेबाजों पर दबाव बनाने के प्रयास में थे।
अजय सिंह क crease पर एक सुलझे हुए बल्लेबाज की तरह खड़े थे। वह पहले ही कुछ डिफेंसिव शॉट्स खेल चुके थे और उनकी बॉडी लैंग्वेज यह बता रही थी कि वह अपनी पारी को लंबा खींचने के इरादे से आए हैं। मेघालय के गेंदबाज आर्यन बोरा गेंदबाजी कर रहे थे, जिन्होंने अच्छी लाइन-लेंथ से बल्लेबाजों को परेशान किया।
फिर आया वह क्षण, जिसने सबकुछ बदल दिया।
वह गेंद जिसने पूरा मैच चर्चा का केंद्र बना दिया
आर्यन बोरा की एक गेंद अजय सिंह की ओर आती है। बल्लेबाज इसे एक सामान्य डिफेंसिव स्ट्रोक से खेल देता है। गेंद हल्के से बैट से लगकर पिच पर गिरती है और धीरे-धीरे वापस विकेट की ओर लुढ़कने लगती है।
अक्सर ऐसे क्षणों में बल्लेबाज गेंद को अपने पैड से या जूते से हल्का सा धक्का देकर दूर कर देते हैं। यह खेल का बेहद सामान्य हिस्सा है और पूरी तरह वैध भी। लेकिन यहां अजय सिंह ने एक अलग फैसला लिया — एक ऐसा फैसला, जिसने नियम की व्याख्या को मैदान के केंद्र में खड़ा कर दिया।
गेंद विकेट की दिशा में बढ़ रही थी। अजय ने बैट उठाया, और गेंद को दोबारा अपने बल्ले से रोक दिया।
और बस, यहीं से सूरत के इस मैदान पर हलचल मच गई।
अंपायर का फैसला और खिलाड़ियों की चुप्पी
जैसे ही मेघालय के खिलाड़ियों ने अपील की, अंपायर धर्मेश भारद्वाज ने तुरंत अपनी उंगली उठाई और अजय सिंह को आउट दे दिया। यह सब इतना जल्दी हुआ कि बल्लेबाज भी कुछ क्षण के लिए स्तब्ध रह गए। मगर उन्होंने निर्णय पर कोई आपत्ति नहीं जताई। न उन्होंने कप्तान की ओर देखा, न ही असहमति जताई। वह बस क्रीज से बाहर निकलते चले गए।
क्रिकेट में आमतौर पर जब किसी खिलाड़ी को कोई असामान्य तरीके से आउट दिया जाता है, तो कम से कम शब्दों में अंपायर से बातचीत, साथी खिलाड़ियों के साथ चर्चा या हल्की बहस जरूर दिखती है। लेकिन यहां मैदान पर खामोशी पसरी रही। शायद बल्लेबाज को खुद भी नियम की बारीकी समझ नहीं आई, शायद उन्हें लगा होगा कि बैट से दूसरी बार गेंद छूना स्वयं में ही गलत है।
लेकिन क्या वास्तव में नियम ऐसा कहता है? आइए इसे समझते हैं।
एमसीसी का नियम 34.1.1 – ‘हिट द बॉल ट्वाइस’ क्या कहता है?
क्रिकेट के नियमों पर अधिकार मैरीलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) का है। उसके कानून की धारा 34.1.1 इस घटना के पीछे की पूरी कहानी बयां करती है।
इस धारा के अनुसार:
- यदि गेंद खेल में है और
- वह स्ट्राइकर के बल्ले या शरीर के किसी भाग से टकराती है
- और स्ट्राइकर जानबूझकर गेंद पर दूसरी बार बल्ले या शरीर के किसी अन्य हिस्से से प्रहार करता है
तो बल्लेबाज आउट माना जाता है।
लेकिन इसमें एक बड़ा अपवाद भी है। यदि बल्लेबाज दूसरी बार गेंद को सिर्फ अपने विकेट को बचाने के लिए मारता है, तो उसे आउट नहीं दिया जाना चाहिए।
यही वह बिंदु है, जिसके कारण यह आउट विवादास्पद माना जा रहा है। मैदान पर मौजूद कुछ अधिकारियों का कहना था कि गेंद सीधे विकेट की ओर जा रही थी और बल्लेबाज ने स्पष्ट रूप से उसे अपने स्टम्प बचाने के लिए ही बैट से दूर किया था।
ईएसपीएनक्रिकइंफो की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूद गवाहों ने कहा कि गेंद वास्तव में विकेट की ओर लुढ़क रही थी और बल्लेबाज का इरादा उसे बचाने का था।
यदि ऐसा था तो नियम के अनुसार यह आउट नहीं दिया जाना चाहिए था।
मैदान अधिकारी की टिप्पणी—एक महत्वपूर्ण बयान
मैच में मौजूद एक अधिकारी ने कहा:
“वह गेंद को आसानी से पैड से दूर कर सकता था, लेकिन उसने बैट का इस्तेमाल किया। इस वजह से अंपायर ने उसे आउट दे दिया।”
यह बयान भी नियम की व्याख्या को लेकर सवाल खड़े करता है।
क्योंकि नियम यह नहीं कहता कि बल्लेबाज गेंद को किस तरह दूर करे—पैड से या बल्ले से।
बल्कि नियम का केंद्र बिंदु है—इरादा।
क्या बल्लेबाज ने विकेट बचाने के अलावा किसी अन्य इरादे से गेंद को मारा?
यदि नहीं, तो आउट नहीं देना चाहिए था।
लेकिन मैदान पर यह बात स्पष्ट नहीं की गई और न ही मणिपुर की टीम से किसी ने विरोध किया।
अम्पायरिंग पर सवाल—निर्णय जल्दबाज़ी में लिया गया?
घटना की सबसे बड़ी दिलचस्प बात यह है कि अंपायर ने बिना किसी हिचकिचाहट के तुरंत फैसला सुनाया। क्रिकेट की दुनिया में ‘हिट द बॉल ट्वाइस’ इतना दुर्लभ नियम है कि कई बार खिलाड़ी, कोच और यहाँ तक कि कुछ अंपायर भी इसे विस्तार से याद नहीं रखते।
इसलिए यह फैसला चर्चा का विषय बन गया कि क्या अंपायर को यह समझना चाहिए था कि बल्लेबाज केवल अपना विकेट बचाने की कोशिश कर रहा था? या क्या बल्लेबाज ने अनजाने में ऐसा किया?
अंपायर की त्वरित प्रतिक्रिया ने इस घटना को और भी विवादित बना दिया।
रणजी ट्रॉफी में ऐसा पहले भी हुआ है
हालांकि यह मामला अजीब जरूर है, लेकिन पूरी तरह अनसुना नहीं। रणजी ट्रॉफी के इतिहास में ऐसे कुछ विरले उदाहरण मौजूद हैं जब इसी नियम में बल्लेबाज को आउट दिया गया था।
- 2005–06 में जम्मू-कश्मीर के कप्तान ध्रुव महाजन
- 1998–99 में तमिलनाडु के आनंद जॉर्ज
- 1986–87 में जम्मू-कश्मीर के शाहिद परवेज़
- और 1963–64 में आंध्र के के बवन्ना
ये उन दुर्लभ घटनाओं में से हैं, जहां ‘हिट द बॉल ट्वाइस’ लागू हुआ था।
इतिहास में ऐसे मामले गिने-चुने ही मिले हैं, और अजय सिंह इस सूची में शामिल होने वाले पाँचवें रणजी खिलाड़ी बन गए।
क्रिकेट समुदाय की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद क्रिकेट विशेषज्ञों में नियम की व्याख्या को लेकर बहस छिड़ गई है। कई पूर्व क्रिकेटरों ने सोशल मीडिया पर इसे गलत आउट बताया। उनका कहना है कि यदि गेंद स्पष्ट रूप से स्टम्प की ओर जा रही थी तो बल्लेबाज का उसे रोकना पूरी तरह वैध है, चाहे वह बैट से क्यों न किया गया हो।
कुछ ने कहा कि बल्लेबाज ने विरोध न करके टीम को नुकसान पहुंचाया। जबकि कुछ का मानना है कि कई घरेलू खिलाड़ी नियमों की बारीकियों से पूरी तरह परिचित नहीं होते, इसलिए वे हिचकिचाते हैं।
अजय सिंह की चुप्पी—एक अनकहा बयान
इस घटना के बाद मीडिया ने अजय सिंह से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनकी चुप्पी कई सवाल छोड़ जाती है।
क्या उन्हें भी लगा कि उन्होंने गलती की?
या उन्हें लगा कि विरोध करने से कोई फायदा नहीं?
या फिर उन्हें वास्तव में नियम की सही जानकारी नहीं थी?
कारण जो भी हो, उनकी यह चुप्पी भी इस घटना को और रहस्यमयी बना रही है।
मेघालय की रणनीति और खेल की नैतिकता पर सवाल
मेघालय के खिलाड़ियों ने तुरंत अपील की, और क्रिकेट का नियम कहता है कि अपील करना हर टीम का अधिकार है। लेकिन कई विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि मैदान पर हम अक्सर ‘स्पिरिट ऑफ द गेम’ के उदाहरण देखते हैं, जहां बल्लेबाज का इरादा साफ देखकर विरोधी अपील नहीं करते।
क्या मेघालय को अपील करनी चाहिए थी?
इस पर बहस जारी है।
इस घटना ने जो सवाल उठाए—क्या नियम बहुत अस्पष्ट है?
‘हिट द बॉल ट्वाइस’ नियम मूल रूप से खेल की शुचिता बनाए रखने के लिए बनाया गया था, ताकि बल्लेबाज जानबूझकर गेंद को दोबारा मारकर रन न बनाए या गेंदबाज को धोखा न दे। लेकिन इस नियम का एक बड़ा हिस्सा अंपायर की व्याख्या पर निर्भर है।
- क्या दूसरी बार मारा गया प्रहार विकेट बचाने के लिए था?
- क्या बल्लेबाज का इरादा कुछ और था?
- क्या बल्लेबाज के पास गेंद को बचाने का कोई और तरीका था?
ये सवाल हर बार परिस्थिति के आधार पर ही तय किए जाते हैं, जिससे भ्रम पैदा होता है।
