19 नवंबर 2025 दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए एक निर्णायक दिन की तरह सामने आया। बांग्लादेश की राजनीति पिछले दो वर्षों से पहले ही अस्थिरता के दौर से गुजर रही थी, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद वहां की सियासी उथल-पुथल अपने चरम पर पहुंच गई। भीड़भाड़ वाली सड़कों पर लोगों का गुस्सा फूट रहा है। ढाका, चिटगांव, सिलहट और रंगपुर जैसे शहरों में फिर से आगजनी, प्रदर्शन और हिंसा की खबरें आ रही हैं।
इसी बीच एक और बड़ा घटनाक्रम हुआ—बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) खालिलुर रहमान एक दिन पहले ही अचानक भारत पहुंच गए। उनका यह अचानक दौरा सिर्फ एक कूटनीतिक यात्रा है या इसके पीछे कोई गहरी वजह छुपी है? यह सवाल आज भारत-बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा और स्थिरता से जुड़ गया है।

यह लेख आपको बांग्लादेश की बदलती राजनीति, शेख हसीना को मिली सजा के प्रभाव, भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर इसके असर और NSA रहमान के भारतीय दौरे के उद्देश्य की गहराई से, विश्लेषणात्मक शैली में पूरी कहानी बताएगा।
शेख हसीना : बांग्लादेश की सबसे शक्तिशाली नेता, अब मौत की सजा की मुजरिम
2024 में बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के बाद शेख हसीना देश छोड़कर भारत में रह रही थीं। लेकिन 17 नवंबर 2025 को बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें 2024 के छात्र आंदोलनों के दौरान मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों में मौत की सजा सुनाकर पूरी कहानी बदल दी।
ट्रिब्यूनल का फैसला – किन आरोपों में दोषी ठहराया गया?
इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने हसीना को पाँच गंभीर आरोपों में दोषी पाया—
- मानवता के खिलाफ अपराध
- प्रदर्शनकारियों पर घातक बल प्रयोग
- राज्य एजेंसियों को हिंसा का निर्देश देना
- दमनकारी भाषण और हिंसा को बढ़ावा देना
- सुरक्षा बलों द्वारा हुए नरसंहार की जिम्मेदारी
ट्रिब्यूनल के आदेश में कहा गया है कि हसीना की “नीतियों और आदेशों” ने सैकड़ों छात्रों और नागरिकों की मौत और घायल होने की घटनाओं को जन्म दिया।
ढाका में बवाल क्यों मचा?
यह फैसला आते ही ढाका की गलियां युद्धभूमि बन गईं।
- हसीना समर्थकों ने इसे राजनीतिक साजिश बताया
- मोहम्मद यूनुस और अंतरिम सरकार पर ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ का आरोप
- अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने फैसले की निष्पक्षता पर सवाल उठाए
- हसीना के घर पर भी हमला हुआ
- सुरक्षा बलों ने कई शहरों में कर्फ्यू लगाया
भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक, भारत ने इस फैसले को “अवैध और अमान्य” बताया है क्योंकि हसीना पर चले मुकदमों को राजनीतिक रूप से प्रेरित माना जा रहा है।
बांग्लादेश के NSA खालिलुर रहमान का अचानक भारत आना—क्या यह सिर्फ संयोग है?
बांग्लादेश के NSA खालिलुर रहमान को बुधवार को भारत आना था, लेकिन वह मंगलवार को ही शाम 6:30 बजे दिल्ली पहुंच गए। इस एक दिन पहले के आने ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
आधिकारिक कारण क्या बताया गया?
वे दिल्ली में होने वाले कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव (CSC) की 7वीं NSA-स्तरीय बैठक के लिए आए हैं जिसमें भारत, मालदीव, मॉरीशस, श्रीलंका और बांग्लादेश शामिल होते हैं।
लेकिन जब अपने देश में इतनी बड़ी उथल-पुथल चल रही हो, ऐसे समय में NSA का अचानक पहले आना सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं हो सकती।
संभावित असली कारण—क्या भारत और बांग्लादेश के बीच गुप्त वार्ता होने वाली है?
यह सवाल इसलिए बड़ा है क्योंकि—
- हसीना भारत में निर्वासन पर हैं
- भारत की सुरक्षा एजेंसियां बांग्लादेश की राजनीति पर कड़ी नजर रखती हैं
- हसीना भारत की सबसे करीबी सहयोगियों में से एक रही हैं
- बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद भारत के हितों को गंभीर नुकसान पहुंचा था
सूत्रों का कहना है—
“रहमान का जल्द आना द्विपक्षीय वार्ता का संकेत हो सकता है।”
यानी भारत-बांग्लादेश के बीच शेख हसीना की सुरक्षा, उनके भविष्य, और बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता पर अंदरखाने महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है। लेकिन आधिकारिक तौर पर किसी भी पक्ष ने इस पर कुछ नहीं कहा है।
कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव : भारत के लिए क्यों अहम?
CSC दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक प्रमुख मंच है। इसमें आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और मानवीय संकटों पर संयुक्त रणनीतियां तैयार की जाती हैं।
जब सदस्य देशों के NSA एक ही मंच पर मिलते हैं, तो कई द्विपक्षीय बैठकें भी होती हैं।
आज के जटिल हालात में भारत के NSA अजीत डोभाल और बांग्लादेश के NSA रहमान की बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या भारत शेख हसीना को बचाना चाहता है?
भारत और शेख हसीना के बीच पिछले 15 वर्षों में गहरे रणनीतिक और राजनीतिक संबंध रहे हैं।
- भारत में छिपे आतंकियों को पकड़ा और सौंपा
- भारत के पूर्वोत्तर में शांति के लिए काम किया
- समुद्री सुरक्षा के कई महत्वपूर्ण समझौते
- दोनों देशों के बीच व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा
भारत की चिंता यह भी है कि हसीना के हटने के बाद जो सरकार आई है, उसके रुझान चीन और पाकिस्तान की तरफ झुके हुए दिख रहे हैं।
ऐसे में हसीना को सजा मिलना भारत के लिए एक कूटनीतिक झटका बन सकता है।
शेख हसीना का भविष्य : क्या भारत उन्हें राजनीतिक शरण देगा?
यह भी संभव है कि—
- भारत उनके लिए उच्च सुरक्षा वाली राजनीतिक शरण की तैयारी कर रहा हो
- बांग्लादेश उनसे जुड़ी कानूनी कार्यवाही में भारत की भूमिका चाहता हो
- NSA रहमान भारत का रुख समझना चाहते हों
- हसीना के खिलाफ मौत की सजा की पुनर्विचार याचिका पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की योजना हो
ढाका में आग, दिल्ली में मंच—दक्षिण एशिया के लिए सबसे अहम सुरक्षा क्षण
कई विशेषज्ञों का मानना है कि—
“अगर बांग्लादेश अस्थिर होता है, तो इसका असर सीधे भारत पर पड़ेगा।”
भारत-बांग्लादेश सीमा 4096 किलोमीटर लंबी है, जो भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है।
बांग्लादेश में अस्थिरता का मतलब—
- घुसपैठ बढ़ना
- आतंकवादी मॉड्यूल सक्रिय होना
- शरणार्थियों की नई लहर
- भारत-बांग्लादेश व्यापार रुकना
- पूर्वोत्तर में आतंकी गतिविधियों का बढ़ना
भारत किसी भी कीमत पर बांग्लादेश को अस्थिर नहीं देखना चाहेगा।
बांग्लादेश की जनता का गुस्सा : क्या फिर से तख्तापलट होगा?
2024 का तख्तापलट बांग्लादेश की राजनीति पर गहरा दाग छोड़ गया था।
आज की परिस्थिति उससे मिलती-जुलती दिख रही है—
- सेना पर दबाव
- जनता सड़क पर
- विपक्ष उग्र
- प्रशासन कमजोर
- पुलिस पर हमला
- नेताओं के घर जलाए जा रहे हैं
कई राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि यह फैसला आग में घी डालने जैसा है।
क्या भारत हसीना को बचाने के लिए दखल देगा?
भारत हमेशा कहता रहा है—
“बांग्लादेश की राजनीति में दखल नहीं देते।”
लेकिन हकीकत यह है कि बांग्लादेश की राजनीति भारत की सुरक्षा से सीधा जुड़ी है।
यदि रहमान भारत एक दिन पहले आकर डोभाल से निजी, गोपनीय बैठक करते हैं, तो यह संकेत है कि—
- दोनों देशों में कुछ बड़ा हो रहा है
- बांग्लादेश भारत का रुख जानना चाहता है
- शेख हसीना की सुरक्षा भारत की प्राथमिकता है
