भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने अपने असाधारण कौशल से अलग पहचान बनाई, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जिनकी यात्रा संघर्ष, विकास और निरंतर मेहनत का उजला उदाहरण होती है। रिंकू सिंह इसी श्रेणी के खिलाड़ी हैं—ऐसे क्रिकेटर जिनका नाम टी20 में लंबे-लंबे छक्कों के लिए लिया जाता है, लेकिन जिन्हें सबसे कम आँका गया, वह है उनकी लाल गेंद वाली पारियाँ। रणजी ट्रॉफी 2025-26 में तमिलनाडु के खिलाफ खेली गई उनकी 176 रनों की पारी सिर्फ एक शतक नहीं थी—यह उनके क्रिकेटीय परिपक्वता, धैर्य, मानसिक सुदृढ़ता और बदलते किरदार की कहानी थी।

रिंकू के करियर की जड़ें: संघर्ष और सपना
रिंकू सिंह की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं। अलीगढ़ में एक साधारण परिवार से निकलकर भारत के सबसे बड़े क्रिकेटरों में शुमार होने तक का सफर कठिनाइयों से भरा था। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर, पिता ऑटो चालक और भाई गैस सिलेंडर सप्लाई का काम करते थे।
रिंकू जब क्रिकेट खेलते थे, तब संघर्ष सिर्फ प्रतिभा का परीक्षण नहीं था—यह रोज़मर्रा की चुनौतियों के बीच बड़े सपने देखना था।
उनकी मेहनत और जिद ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया जहां आज वह सिर्फ टी20 के एक फिनिशर नहीं, बल्कि बहुमुखी बल्लेबाज के रूप में पहचाने जाते हैं।
रणजी ट्रॉफी का मैदान: जहाँ रिंकू का “दूसरा रूप” सामने आता है
जब तमिलनाडु के खिलाफ उन्होंने 157 गेंदों में शतक पूरा किया, तो देखने वालों को पहली बार महसूस हुआ कि यह वही रिंकू सिंह हैं जो टी20 में आखिरी ओवर में पाँच छक्के लगाकर रातों-रात प्रसिद्ध हुए थे।
यह पारी तेज शॉट्स पर निर्भर नहीं थी। यह एक लम्बी, धैर्यपूर्ण यात्रा थी—
- जहाँ हर गेंद को पढ़ना जरूरी था
- जहां विकेट पर टिके रहना चुनौती थी
- जहां परिस्थितियाँ बल्लेबाज को परखती थीं
247 गेंदों में बनाए गए 176 रन उनके कौशल से ज़्यादा उनकी माइंडसेट की कहानी थे।
ना सिर्फ मारना, बल्कि समझना भी आता है
रिंकू ने इस पारी में 16 चौके और 5 छक्के लगाए। लेकिन दिलचस्प यह है कि उनका बड़ा हिस्सा स्ट्रोक प्लेसमेंट और गैप ढूँढने पर आधारित था।
टी20 में उन्हें ‘हिटर’ कहा जाता है, लेकिन रणजी में वह ‘कंस्ट्रक्टर’ बन जाते हैं।
रणजी में उनका प्रदर्शन क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में टेस्ट टीम में जगह बनाना आसान नहीं। प्रतियोगिता इतनी अधिक है कि हर खिलाड़ी को लगभग परफेक्ट होना पड़ता है।
रिंकू का फर्स्ट-क्लास रिकॉर्ड (इस मैच से पहले):
- 51 मैच
- 3501 रन
- औसत 57.39
- 22 अर्धशतक
- 8 शतक
यह आँकड़े सिर्फ अच्छे नहीं—टेस्ट स्तर के लिए बेहतरीन माने जाते हैं।
रिंकू ने साबित किया है कि वह सिर्फ सफेद गेंद के खिलाड़ी नहीं, बल्कि लाल गेंद के भी बेहद भरोसेमंद बल्लेबाज हैं।
टी20 के सुपरस्टार, लेकिन टेस्ट डेब्यू अभी बाकी
हालांकि रिंकू ने टी20 में अपने प्रदर्शन से सबका दिल जीता, लेकिन टेस्ट टीम का दरवाजा उनके लिए अभी तक पूरी तरह नहीं खुला।
टी20 में उन्होंने 35 मैच खेले, 550 रन बनाए और 161.8 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की—यह किसी भी फिनिशर के लिए सपनों जैसा प्रदर्शन है।
तो फिर टेस्ट में डेब्यू क्यों नहीं?
- भारत के पास मिडिल ऑर्डर में भारी प्रतिस्पर्धा
- लाल गेंद के लिए अलग तकनीक
- टेस्ट टीम में लम्बे समय तक लगातार घरेलू प्रदर्शन की जरूरत
लेकिन रणजी ट्रॉफी 2025 में उनका यह शतक चयनकर्ताओं के सामने एक बड़ा संदेश था—
“मैं तैयार हूँ। मेरा खेल सिर्फ छक्कों तक सीमित नहीं। मुझमें टेस्ट क्रिकेट की धैर्य और क्लास है।”
तमिलनाडु के खिलाफ पारी: मैच का पूरा नज़ारा
तमिलनाडु की गेंदबाजी कोई हल्की-फुल्की नहीं थी। स्पिन और पेस का बेहतरीन मिश्रण, अनुभवी गेंदबाज और लगातार दबाव बनाने की रणनीति।
लेकिन रिंकू सिंह ने न सिर्फ इन चुनौतियों को मात दी, बल्कि उनकी गेंदबाजी का विश्लेषण कर अपने शॉट्स और रनों की दिशा तय की।
उनकी पारी के हाईलाइट्स:
- शुरुआत बेहद संयमित
- 70 रन तक सिर्फ नियंत्रण
- 70–100 के बीच परिस्थिति के अनुसार रोटेशन
- शतक के बाद नैचुरल खेल
- टीम को संकट से निकालकर मज़बूत स्थिति में पहुँचाया
मानसिकता: असली बदलाव यहीं दिखा
रिंकू सिंह अक्सर कहते हैं—“मेरा खेल सिर्फ एक फॉर्मेट पर निर्भर नहीं है। मैं हर फॉर्मेट में योगदान देना चाहता हूँ।”
इस पारी से यह बात और स्पष्ट हो गई कि टेस्ट क्रिकेट सिर्फ तकनीक का खेल नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता का भी खेल है—और रिंकू इसमें लगातार मजबूत होते जा रहे हैं।
क्या अब टेस्ट टीम में प्रवेश का समय आ गया है?
लोकप्रियता? ✔️
कौशल? ✔️
लाल गेंद में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन? ✔️
रणजी में बेहतरीन औसत? ✔️
बचे सिर्फ चयनकर्ताओं का भरोसा।
भारत लगातार युवा प्रतिभाओं को मौका दे रहा है—ऐसे में रिंकू का टेस्ट डेब्यू आगे आने वाले महीनों में एक स्वाभाविक विकास हो सकता है।
एक खिलाड़ी, कई रंग
रिंकू सिंह अब सिर्फ—
- T20 स्टार
- IPL फिनिशर
- लास्ट ओवर का हीरो
नहीं हैं।
अब वह भारत के सबसे बहुआयामी बल्लेबाजों में से एक के रूप में उभर रहे हैं।
उनकी यह लंबी पारी उन्हें रैंकिंग, मौके और प्रतिष्ठा सभी में आगे ले जाएगी।
निष्कर्ष: असली क्रिकेटर वही जो हर फॉर्मेट में चमके
रिंकू सिंह ने तमिलनाडु के खिलाफ रणजी ट्रॉफी में जो 176 रन बनाए, वह सिर्फ स्कोर नहीं था—वह उनकी मेहनत, समर्पण और भविष्य के सपनों की इबारत था। भारत को हमेशा ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत होती है जो परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सकें—रिंकू सिंह अब इसी श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। यह पारी निश्चित रूप से आने वाले महीनों में भारतीय टेस्ट चयन पर गहरा असर डालेगी।
