मध्यप्रदेश के चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। कई वर्षों से अधर में लटकी योजनाएँ अब तेजी से धरातल पर उतरने लगी हैं। छतरपुर, राजगढ़ और बुधनी जैसे महत्वपूर्ण जिलों में अगले शैक्षणिक सत्र 2026-27 से मेडिकल कॉलेज शुरू होने की तैयारी अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से ये प्रोजेक्ट अब सिर्फ सपना नहीं, बल्कि वास्तविकता बनते दिखाई दे रहे हैं।
इन जिलों में मेडिकल कॉलेजों के प्रारंभ होने का अर्थ सिर्फ इमारतों का निर्माण या कक्षाओं का शुरू होना भर नहीं है। इसका मतलब है—स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर, ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, डॉक्टरों की उपलब्धता में बढ़ोतरी और स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार। यह कदम मध्यप्रदेश की भविष्य की स्वास्थ्य प्रणाली को नया आकार देगा।

योजना की शुरुआत और वर्षों से लंबित स्वीकृतियाँ
राजगढ़ और बुधनी (साथ ही मंडला) को मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति तो वर्ष 2018 में ही मिल चुकी थी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इन प्रोजेक्ट्स के लिए मंजूरी दी थी, जिसमें वित्तीय योगदान भी तय किया गया था—
✔ 60% राशि केंद्र सरकार
✔ 40% राशि राज्य सरकार
लेकिन विभिन्न प्रशासनिक कारणों और एमओयू में देरी की वजह से इन प्रोजेक्ट्स पर निर्माण समय पर शुरू नहीं हो पाया। इसका परिणाम यह हुआ कि जबकि नीमच, मंदसौर, श्योपुर और सिंगरौली जैसे अन्य जिलों में एमबीबीएस प्रवेश समय पर शुरू हो चुका, राजगढ़ और बुधनी जैसे जिले पीछे रह गए।
अब जाकर स्थिति बदली है। नई सरकार और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने इस पूरी प्रक्रिया को तेज़ कर दिया है। तेजी से कागज़ों से निकलकर ज़मीन पर काम शुरू हो चुका है।
तीनों मेडिकल कॉलेज एक साथ शुरू करने की तैयारी
चिकित्सा शिक्षा संचालनालय की ओर से स्पष्ट संकेत मिले हैं कि छतरपुर, राजगढ़ और बुधनी में एक साथ कॉलेज संचालन शुरू होंगे। यह कदम प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक साथ शुरुआत होने से—
- फैकल्टी भर्ती
- इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना
- उपकरण खरीद
- पुस्तकालय एवं लैब सेटअप
- NMC निरीक्षण प्रक्रियाएँ
सब समानांतर तरीके से संचालित होंगी, जिससे समय की बचत होगी और प्रोजेक्ट सुचारू रूप से आगे बढ़ेगा।
NMC आवेदन और फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया शुरू
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा जारी मानकों के अनुसार, किसी भी नए मेडिकल कॉलेज को MBBS शिक्षण, क्लिनिकल सुविधाएँ, लैब, पुस्तकालय, हॉस्पिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, तथा फैकल्टी उपलब्धता के कठोर मानदंडों को पूरा करना होता है।
संचालनालय ने इन मेडिकल कॉलेजों के लिए NMC को आवेदन भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत—
- प्रोफेसर,
- एसोसिएट प्रोफेसर,
- असिस्टेंट प्रोफेसर,
- जूनियर डॉक्टर,
- नर्सिंग स्टाफ,
- टेक्निकल स्टाफ,
की भर्ती जल्द प्रारंभ होने वाली है।
चूँकि एक कॉलेज में लगभग 150 MBBS सीटें होंगी, NMC मानदंडों के अनुसार पर्याप्त फैकल्टी का होना अनिवार्य है। इसलिए भर्ती प्रक्रिया एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
450 नई MBBS सीटें—प्रदेश के युवाओं के लिए बड़ी सौगात
तीनों मेडिकल कॉलेजों में 150-150 सीटों के मान से कुल 450 MBBS सीटें उपलब्ध होंगी। इससे न सिर्फ मध्यप्रदेश की चिकित्सा शिक्षा क्षमता बढ़ेगी बल्कि हजारों छात्रों को डॉक्टर बनने का मौका मिलेगा।
मध्यप्रदेश में MBBS सीटें बढ़ने का सीधा लाभ होगा—
- NEET में कटऑफ कम होगा
- प्रदेश के युवाओं को बाहर जाने की जरूरत कम होगी
- आर्थिक बोझ घटेगा
- मेडिकल क्षेत्र में स्थानीय प्रतिभाएँ तैयार होंगी
प्रदेश के कई हिस्सों में प्रतिभाशाली विद्यार्थी केवल सीटों की कमी की वजह से बाहर के राज्यों में या प्राइवेट महंगे कॉलेजों में पढ़ने के लिए मजबूर होते थे। अब यह स्थिति काफी हद तक सुधर सकती है।
नर्सिंग कोर्स भी होंगे शुरू—नई गाइडलाइन के तहत बड़ा बदलाव
केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के अनुसार, हर नए मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग पाठ्यक्रम अनिवार्य रूप से संचालित किया जाएगा। इसलिए छतरपुर, राजगढ़ और बुधनी के मेडिकल कॉलेजों में—
- B.Sc नर्सिंग
- संभावित रूप से GN M & अन्य allied health courses
शुरू किए जाएंगे।
नर्सिंग की सीटों के बढ़ने का मतलब है—
- स्थानीय युवतियों के लिए रोजगार के नए अवसर
- स्वास्थ्य क्षेत्र में trained workforce
- अस्पतालों में स्टाफ की कमी में सुधार
यह बदलाव प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करेगा।
पुस्तकालयों के लिए पुस्तक खरीद प्रक्रिया भी तेज
किसी भी मेडिकल कॉलेज की आत्मा उसका पुस्तकालय होता है। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने निर्देश दिए हैं कि—
- नवीनतम चिकित्सा पुस्तकें
- जर्नल
- रिसर्च मैटीरियल
- डिजिटल लाइब्रेरी सॉफ्टवेयर
- ई-लर्निंग सामग्री
की खरीद प्रक्रिया शुरू की जाए। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा अध्ययन सामग्री समय पर उपलब्ध हो।
छह मेडिकल कॉलेज दो वर्षों में—सरकार का बड़ा लक्ष्य
संचालक चिकित्सा शिक्षा, डॉ. अरुणा कुमार के अनुसार, आने वाले दो वर्षों में सिर्फ ये तीन नहीं बल्कि कुल छह नए मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने की तैयारी है। इनमें शामिल हैं—
- मंडला
- उज्जैन
- दमोह
- छतरपुर
- राजगढ़
- बुधनी
यानी प्रदेश की स्वास्थ्य शिक्षा प्रणाली एक बड़े विस्तार की ओर बढ़ रही है।
55 जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने का मुख्यमंत्री का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने का लक्ष्य है। इसका अर्थ है—
- स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण
- डॉक्टरों की उपलब्धता में भारी वृद्धि
- ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञता आधारित इलाज
- स्वास्थ्य ढांचे का स्तर राष्ट्रीय मानकों तक पहुँचना
संकल्प पत्र में भी यह स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि सभी 29 लोकसभा क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज शुरू किए जाएंगे। पिछले दो वर्षों में पाँच मेडिकल कॉलेज पहले ही प्रारंभ हो चुके हैं।
स्थानीय जनता के लिए फायदे—एक नया युग शुरू
इन मेडिकल कॉलेजों का सीधा प्रभाव स्थानीय जनता पर पड़ेगा—
- छोटे शहरों में भी आधुनिक इलाज मिलेगा
- बड़े शहरों पर मरीजों का भार कम होगा
- रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
- आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी
- मेडिकल और पैरामेडिकल से जुड़े व्यवसाय विकसित होंगे
स्वास्थ्य क्षेत्र का विकास किसी भी राज्य की प्रगति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, और मध्यप्रदेश इस दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रहा है।
