भोपाल में स्थित मेसर्स एडवांटेज ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड (AOPL) के खिलाफ चल रही जांच पिछले कुछ वर्षों से वित्तीय जगत में चर्चा का विषय बनी हुई थी, लेकिन अब यह मामला एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस कंपनी की दुबई में स्थित 51.70 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई न केवल इस घोटाले की गंभीरता का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले आर्थिक अपराधों के खिलाफ भारतीय एजेंसियाँ अब कितनी सख़्त और सुसंगठित तरीके से कदम उठा रही हैं।

मेसर्स एडवांटेज ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड पर आरोप है कि उसने भोपाल स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाखा से लगभग 1266.63 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। यह रकम देश के बैंकिंग इतिहास के बड़े घोटालों में से एक है। यह घटना बताती है कि किस तरह कुछ कंपनियाँ बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये के लोन हासिल करती हैं और फिर उन्हें अवैध माध्यमों से विदेशों में निवेश कर छिपा देती हैं।
AOPL का उदय: व्यापार का विस्तार और अचानक उभरते सवाल
एडवांटेज ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना एक ऐसे दौर में हुई, जब भारत में आयात–निर्यात व्यापार तेजी से बढ़ रहा था। कंपनी ने भी इसी क्षेत्र में अपने कदम रखे। विभिन्न प्रकार के प्रोडक्ट्स की इंटरनेशनल ट्रेडिंग का दावा करने वाली AOPL ने शुरुआती कुछ वर्षों में अपने कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई। कंपनी अपने प्रोफाइल और वित्तीय क्रेडिबिलिटी के दम पर बैंकों से बड़े पैमाने पर क्रेडिट फैसिलिटीज़ हासिल करती चली गई।
हालांकि, जैसे-जैसे कंपनी ने विदेशी बाजारों में अपने व्यापार का विस्तार किया, वैसे-वैसे उसके वित्तीय रिकॉर्ड में अनियमितताएँ सामने आने लगीं। लेन-देन में पारदर्शिता की कमी, आयात–निर्यात के बिलों में गड़बड़ी और दस्तावेज़ों में विसंगतियाँ जांच एजेंसियों की नज़र में आने लगीं। इसी क्रम में SBI ने भी कंपनी के खातों में संदिग्ध गतिविधियों को नोटिस करना शुरू किया।
1266.63 करोड़ की धोखाधड़ी: बैंकिंग सिस्टम को कैसे गुमराह किया गया
ED की जांच रिपोर्ट के अनुसार, AOPL ने SBI भोपाल शाखा से 1266.63 करोड़ रुपये क्रेडिट, लेटर ऑफ क्रेडिट और ओवरड्राफ्ट जैसी विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं के माध्यम से उठाए। लेकिन इसके बदले जो दस्तावेज़ या ट्रेड पेपर प्रस्तुत किए गए थे, उनमें भारी गड़बड़ी पाई गई।
कंपनी ने:
- काल्पनिक कंपनियों के नाम पर व्यापार दिखाया
- फर्जी आयात–निर्यात दस्तावेज़ तैयार किए
- विदेशों में मौजूद अपनी सहायक कंपनियों के नाम पर पैसे ट्रांसफर किए
- फिर उन पैसों से विदेशों में अचल संपत्तियाँ खरीदीं
SBI द्वारा दर्ज की गई FIR के अनुसार, यह धोखाधड़ी योजनाबद्ध तरीके से कई वर्षों तक चलती रही। बैंक ने जब कंसाइनमेंट दस्तावेज़ों और वास्तविक व्यापार गतिविधियों का मिलान किया, तब कई लेन-देन संदिग्ध पाए गए। इसी तरह धीरे-धीरे यह घोटाला सामने आया।
ED की जांच: खुलासों का सिलसिला शुरू
जैसे ही मामला ED तक पहुँचा, एजेंसी ने PMLA (अनिवार्य मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम) के तहत इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच शुरू की।
जांच में यह सामने आया कि भारत से निकाला गया पैसा दुबई, सिंगापुर और हांगकांग जैसे देशों में भेजा गया था। वहाँ इसे रियल एस्टेट में निवेश कर सफ़ेद पैसा दिखाने की कोशिश की गई थी।
ED के अधिकारियों ने बताया कि कंपनी ने भारत से निकाली गई रकम का उपयोग दुबई में होटल, ऑफिस स्पेस और लग्ज़री अपार्टमेंट जैसी संपत्तियाँ खरीदने में किया। यही संपत्तियाँ अब कुर्क कर ली गई हैं।
दुबई में 51.70 करोड़ की प्रॉपर्टी कुर्क: कार्रवाई का महत्व
इस कार्रवाई का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में की गई संपत्ति ज़ब्ती की एक महत्वपूर्ण मिसाल है। इससे स्पष्ट होता है कि ED अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा कसने में सक्षम है।
कुर्क की गई संपत्ति में शामिल हैं—
- दुबई के प्रमुख स्थानों पर मौजूद कमर्शियल यूनिट्स
- रियल एस्टेट निवेश के नाम पर खरीदे गए फ्लैट
- एक इंटरनेशनल ट्रेड ऑफिस स्पेस
ये सभी संपत्तियाँ उन पैसों से खरीदी गई थीं जो SBI से धोखे में लेकर विदेश भेजे गए थे।
कानूनी प्रक्रिया: आगे क्या?
ED की तरफ से जारी जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई प्राथमिक चरण है। अब एजेंसी:
- कंपनी के निदेशकों से पूछताछ करेगी
- उनके विदेश यात्राओं और लेन-देन की जांच करेगी
- इस पूरे घोटाले में शामिल अन्य कंपनियों की भी जांच करेगी
अगर जांच में विदेशी सहयोगी कंपनियों का रोल स्पष्ट होता है, तो इंटरपोल नोटिस भी जारी किया जा सकता है।
भारतीय बैंकिंग सिस्टम पर प्रभाव: एक चेतावनी
1266 करोड़ की धोखाधड़ी केवल SBI को नहीं, बल्कि पूरे भारतीय बैंकिंग सिस्टम के लिए एक चेतावनी है। यह घटना दर्शाती है कि ट्रेड फाइनेंसिंग के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया जा सकता है।
इस घोटाले के बाद कई बैंकों ने—
- बड़े क्रेडिट लिमिट पर कड़े दिशानिर्देश
- आयात–निर्यात फाइलों की कड़ी जांच
- विदेशी लेन-देन की पारदर्शिता
जैसी नीतियाँ लागू की हैं।
निष्कर्ष: एक बड़ा आर्थिक घोटाला और सख्त कदम
दुबई में AOPL की 51.70 करोड़ की संपत्ति कुर्क करना ED की निर्णायक जीत है। यह न केवल देश के आर्थिक ढांचे को मजबूत करता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि विदेश भागकर कोई भी अपराधी कानून की पकड़ से बच नहीं सकता।
सभी की निगाहें अब कोर्ट की अगली सुनवाई और ED की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
