मध्यप्रदेश के घने जंगलों, वन्यजीवन की अनमोल धरोहर और प्राकृतिक संपदा के प्रतीक सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) में हुई एक ऐसी घटना पर आखिरकार न्यायालय ने सख्त फैसला सुना दिया है, जिसने न केवल वन विभाग को, बल्कि देशभर के पर्यावरण प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया था। यह मामला था—एक बाघ की निर्मम हत्या, जिसे अंधविश्वास, लालच और अवैध वन्यजीव व्यापार की लालसा के चलते मारा गया था।
नर्मदापुरम जिले की अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में 9 शिकारियों को 4-4 साल की कठोर कैद और 25-25 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जिस घटना ने यह मुकाम बनाया, उसके पीछे एक ऐसी अंधेरी कहानी है, जिसमें लालच, अंधविश्वास, अपराध और एक खूबसूरत बाघ की निर्मम मौत शामिल है।

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व: भारत की जैव-विविधता का गौरव और एक बाघ का खो जाना
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व अपनी शांत, विशाल और घुमावदार पहाड़ियों, गहरी घाटियों, नदी-नालों और घने जंगलों के लिए जाना जाता है। यहाँ रहने वाला हर बाघ केवल एक जानवर नहीं, बल्कि जंगल का राजा, पारिस्थितिक संतुलन का संरक्षक और भारत की शान होता है।
लेकिन इसी खूबसूरत जंगल में 2023 की शुरुआत में एक बाघ का शव मिला था। उसकी खाल उतारी जा चुकी थी, शरीर के कई अंग गायब थे और आसपास संघर्ष के निशान थे। जाँच शुरू हुई तो धीरे-धीरे वह भयावह सच सामने आया जिसने सबको भयभीत कर दिया—यह कोई सामान्य शिकार नहीं था, बल्कि एक संगठित गिरोह की सुनियोजित कार्रवाई थी।
‘नोटों की बारिश’ कराने का अंधविश्वास—क्यों मारा गया बाघ?
पूछताछ में शिकारियों ने एक चौंकाने वाला सच बताया। इस हत्या के पीछे अंधविश्वास और तांत्रिक क्रियाओं में आस्था रखने वाले एक अपराधी गिरोह की मानसिकता काम कर रही थी।
शिकारियों का दावा था कि—
बाघ के शरीर के कुछ अंग, खासकर मूंछें और पंजे, “धनवर्षा” या घर में पैसों की वृद्धि कराने में इस्तेमाल होते हैं।
यह धारणा पूरी तरह अंधविश्वास पर आधारित है, लेकिन इसी अंधविश्वास ने एक दुर्लभ प्रजाति के बाघ को मारने का बहाना बना दिया। गिरोह के सदस्यों ने मिलकर बाघ को फंदे में फँसाया और उसकी हत्या कर दी। उसके बाद उसकी खाल को सावधानी से उतारा गया और कई अंग अवैध वन्यजीव व्यापारियों को बेचने की तैयारी की गई।
वन विभाग की टीम ने इस घटना को देश का एक बड़ा वाइल्डलाइफ क्राइम केस बताया था।
कैसे पकड़ा गया गिरोह: जंगल में फैले सुरागों से कोर्ट तक की कहानी
जंगल में बाघ का शव मिलने के बाद वन विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं। निरीक्षण में दिखाई पड़ा कि यह प्राकृतिक मौत नहीं थी।
- खाल साफ़-सुथरी तरीके से उतारी गई थी
- शरीर पर गहरे घाव
- आसपास पेड़ों पर रस्सी और फंदे के निशान
- जमीन पर पैर के निशान और जलने के अवशेष
इसके बाद टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग टीम, वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) और स्थानीय पुलिस मिलकर जांच में जुट गई।
फोन रिकॉर्डिंग, जंगल में पाई गई सामग्रियों, ग्रामीणों की गवाही और आरोपियों के बीच पैसों के लेन-देन की जानकारी के आधार पर 9 लोगों की गिरफ्तारी हुई।
ये आरोपी कई वर्षों से स्थानीय स्तर पर शिकार का काम कर रहे थे। गिरोह के नेता ने बाघ की मूंछों और पंजों को सबसे ज्यादा कीमत दिलाने का दावा किया था।
नर्मदापुरम कोर्ट ने सुनाया सख्त फैसला
कई महीनों तक चली सुनवाई, सबूतों की जांच, वन अधिकार अधिनियम और वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के कई धाराओं के तहत अदालत ने अंततः सभी 9 आरोपियों को दोषी पाया।
कोर्ट का फैसला —
- सभी 9 शिकारी 4-4 साल की कठोर कैद
- प्रत्येक पर ₹25,000 का जुर्माना
- खाल और बरामद सामग्री को सरकारी रिकॉर्ड में शामिल करने के आदेश
- दोषियों की पूरी गतिविधियों की निगरानी के निर्देश
यह फैसला पर्यावरण संरक्षण के लिए एक ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है।
बाघ क्यों महत्वपूर्ण है?—पारिस्थितिकी का संतुलन
भारत में बाघ सिर्फ एक जानवर नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र का शीर्ष शिकारी है।
- बाघ जंगल के स्वास्थ्य का संकेतक हैं
- जंगलों के संतुलन के लिए अत्यंत जरूरी
- उनके कम होने से पूरा पर्यावरण बिगड़ता है
सतपुड़ा रिजर्व में पहले से ही बाघों की संख्या सीमित है। ऐसे में एक भी बाघ की मौत, वह भी शिकार के कारण, बेहद दुखद घटना है।
वन विभाग और न्यायालय की कार्रवाई—संदेश यह कि अपराध नहीं बचेगा
इस फैसले ने एक स्पष्ट संदेश दिया है—
“जंगल का अपराध चाहे कितना भी छुपा हो, न्याय की नजर से बच नहीं सकेगा।”
यह मामला आने वाले समय में सभी टाइगर रिजर्व और वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।
