इंदौर—मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा और तेजी से विकसित हो रहा शहर—इन दिनों एक बड़े रियल एस्टेट फ्रॉड के मामले को लेकर चर्चा में है। शहर में गोकुलधाम ड्रीम नाम से विकसित की जा रही कॉलोनी के पीछे खड़े कॉलोनाइज़र दंपती नरेश खेमलानी और जया खेमलानी पर करोड़ों रुपये की आर्थिक गड़बड़ी और साझेदारों को धोखा देने के गंभीर आरोप लगे हैं।
अपराध शाखा ने इस दंपती सहित उनके सहयोगियों के खिलाफ एक विस्तृत धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और इस केस को इंदौर की रियल एस्टेट इंडस्ट्री में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा साझेदारी–धोखाधड़ी मामला माना जा रहा है।

पृष्ठभूमि: कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
मामला तब सामने आया जब मुंबई के मलाड स्थित एसवी रोड निवासी राजेश खेमलानी और उनकी पत्नी संगीता खेमलानी ने इंदौर पुलिस को शिकायत सौंपी।
दोनों का आरोप है कि वे एनआर इंटरप्राइजेस नामक साझेदारी फर्म में 33.34% हिस्सेदारी रखते थे। इस फर्म के तहत नैनोद क्षेत्र में लगभग 1.264 हेक्टेयर भूमि मौजूद थी, और इसी भूमि पर विभिन्न सर्वे नंबरों को जोड़कर गोकुलधाम ड्रीम नामक आवासीय प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा था।
शिकायत में बताया गया कि—
- फर्म के अन्य साझेदारों ने
- जमीन मालिकों ने
- और सहयोगी कंपनियों जैसे सीआर इंटरप्राइजेस, मैसर्स इश्वर एसोसिएट्स ने
खेमलानी दंपती के साथ मिलकर धोखाधड़ी का जाल रचा।
आरोप: फर्जी दस्तावेज़, गलत विकास अनुबंध और निवेशकों को भ्रमित करना
पीड़ितों का आरोप है कि—
- कॉलोनाइज़र दंपती ने फर्जी कागज़ात तैयार किए।
- कई सर्वे नंबरों की जमीन पर ऐसे विकास अनुबंध किए, जिनमें साझेदारों को शामिल नहीं किया गया।
- रजिस्टर्ड डेवलपमेंट एग्रीमेंट्स दिखाने में भारी अनियमितताएँ थीं।
- वास्तविक स्वामित्व छिपाकर कुछ सर्वे नंबरों को गलत तरीके से “अलग स्वामित्व” बताया गया।
- भूमि राजस्व अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ की गई।
- कॉलोनी विकसित होने के बाद प्लॉट बेचकर करोड़ों की राशि दंपती ने स्वयं रख ली।
- फर्म के खातों में आने वाली राशि को निवेशकों की जानकारी के बिना दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि गोकुलधाम ड्रीम कॉलोनी के नाम पर—
- नकली लेआउट
- गलत डायवर्शन
- फर्जी NOC
- और अधूरे कार्य
को पूरा दिखाकर बिक्री जारी रही।
FIR में क्या-क्या आरोप शामिल हुए?
अपराध शाखा द्वारा दर्ज की गई FIR में IPC की कई धाराएँ शामिल की गई हैं—
- 420 – धोखाधड़ी
- 467 – जालसाजी
- 468 – फर्जी दस्तावेजों का उपयोग
- 471 – फ़र्ज़ी कागज़ात का उपयोग
- 120B – आपराधिक साजिश
पुलिस के अनुसार, यह मामला केवल एक साझेदारी विवाद नहीं, बल्कि एक “संगठित आर्थिक धोखाधड़ी” है जिसमें करोड़ों रुपये के गबन का शक है।
गोकुलधाम ड्रीम: क्या वाकई यह एक ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ था?
जांच में सामने आए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि—
- कॉलोनी का लेआउट अधूरा था
- सड़कें केवल कागज़ों में बनी थीं
- बिजली और पानी के कनेक्शन का कोई वैधानिक रिकॉर्ड नहीं
- RERA में प्रोजेक्ट का पंजीकरण संदिग्ध
- खरीदारों को दिखाए गए नक्शे और वास्तविक जमीन में अंतर
पीड़ित साझेदारों का आरोप है कि खेमलानी दंपती ने “अधूरे सपनों को महंगे प्लॉट में बेचकर अमीर बनने का तरीका बना रखा था।”
फर्म विवाद का विस्तार: कौन किसके साथ?
इस मामले में शामिल प्रमुख पक्ष—
- NR Enterprises (साझेदारी फर्म)
- जया खेमलानी – भूमि स्वामी व डेवलपर
- नरेश खेमलानी – मुख्य कॉलोनाइज़र
- अंशुल खेमलानी – व्यवसायिक सहयोगी
- सीआर इंटरप्राइजेस – सह-निर्माण एजेंसी
- मैसर्स इश्वर एसोसिएट्स – रजिस्टर्ड डेवलपमेंट पार्टनर
- गोकुलसिंह – भूमि साझेदार
पीड़ितों का कहना है कि इन्हीं संस्थाओं के माध्यम से
- जमीन,
- विकास अनुबंध,
- और प्लॉट बिक्री
को “जानबूझकर जटिल” बनाया गया ताकि धोखाधड़ी छिपी रहे।
इंदौर में रियल एस्टेट फ्रॉड का बढ़ता ट्रेंड
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार—
पिछले 10 वर्षों में इंदौर में लगभग 127 रियल एस्टेट घोटाले दर्ज किए गए।
कारण—
- जमीन के गलत सर्वे
- फर्जी नक्शे
- साझेदारी विवाद
- कॉलोनाइज़र्स का ‘डमी कंपनियाँ’ बनाकर लेनदेन करना
- रेरा नियमों का उल्लंघन
- खरीदारों के लिए जागरूकता की कमी
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण का फायदा उठाकर कई कॉलोनाइज़र आज भी आधी-अधूरी जमीन पर करोड़ों कमा रहे हैं।
पुलिस जांच: अब तक क्या हुआ?
जांच अधिकारियों का कहना है—
- सभी विकास अनुबंधों की कॉपी जब्त कर ली गई है
- सर्वे नंबरों की राजस्व प्रतियां खंगाली जा रही हैं
- बैंक स्टेटमेंट्स की फोरेंसिक जांच होगी
- प्लॉट खरीदारों की सूची तैयार की जा रही है
- FIR में शामिल सभी आरोपितों को नोटिस भेजे जा रहे हैं
यदि सबूत पुख्ता होते हैं, तो यह मामला “क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट” और “लैंड स्कैम” के बड़े मामलों में शामिल हो सकता है।
आरोपित पक्ष की चुप्पी—क्यों संदिग्ध?
खेमलानी दंपती ने मीडिया के किसी भी सवाल का उत्तर नहीं दिया है।
उनके वकील ने बस इतना कहा—
“यह एक व्यावसायिक विवाद है, धोखाधड़ी नहीं।”
लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार—
- यदि दस्तावेज़ जाली मिले
- प्लॉट की बिक्री अनियमित हो
- और फर्म के हिस्सेदारों को धोखे में रखा गया हो
तो यह मामला केवल “व्यावसायिक विवाद” नहीं रहता।
खरीदारों की मुश्किलें: कई लोग सामने आने को तैयार नहीं
गोकुलधाम ड्रीम में प्लॉट खरीदने वाले कई लोग सामने आने से डर रहे हैं, क्योंकि—
- पैसा फंसने का डर
- कानूनी जटिलताएँ
- कॉलोनी अधूरी होने का खुलासा
- नाम सार्वजनिक होने की आशंका
कुछ खरीदारों ने पुलिस को अनौपचारिक बयान दिए हैं लेकिन आधिकारिक शिकायत अभी सीमित है।
विशेषज्ञ विश्लेषण: क्या रेरा और नगर निगम की भूमिका संदिग्ध?
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि—
- किसी भी कॉलोनी के विकास के लिए
- नक्शा,
- डायवर्शन,
- NOC
- और RERA स्वीकृति
अनिवार्य है।
यदि यह सब होने के बाद भी धोखा हुआ, तो
- फाइलों की जाँच,
- अधिकारियों की भूमिका
भी जांचे जाने योग्य है।
निष्कर्ष: मामला अभी शुरुआत में, लेकिन असर बड़ा
यह केस सिर्फ एक कॉलोनी तक सीमित नहीं है।
यह—
- रियल एस्टेट सेक्टर की अनियमितताओं
- साझेदारी की कमजोर कानूनी संरचना
- और जमीन की पारदर्शिता की कमी
का बड़ा उदाहरण है।
इंदौर पुलिस की जांच से आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा हो सकता है।
