भारत में श्रमिक वर्ग देश की आर्थिक प्रगति का मूल आधार है। परंतु इसी वर्ग को जब सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की स्थिरता की बात आती है, तो वह अक्सर सबसे अधिक संवेदनशील स्थिति में खड़ा दिखाई देता है। इसी वास्तविकता को सामने रखते हुए देश के प्रमुख श्रमिक संगठनों ने आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 की तैयारियों के बीच अपनी मांगों को बेहद मजबूत और साफ शब्दों में सरकार के सामने रखा।
उनकी राय में — यदि श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा नहीं मिलेगी, तो न तो उद्योग सुदृढ़ होंगे और न देश का विकास गति पकड़ेगा।

बैठक का संदर्भ — सरकार और श्रमिक संगठनों की आमने-सामने चर्चा
गुरुवार, 20 नवंबर 2025, को वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के साथ बजट-पूर्व महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में:
- 10 प्रमुख केंद्रीय श्रमिक संगठन
- विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधि
- अनुभवी पेंशन विशेषज्ञ
- आर्थिक नीति विश्लेषक
ने हिस्सा लिया। इन संगठनों ने सरकार को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जो श्रमिक वर्ग की वास्तविक समस्याओं पर केंद्रित था।
सामाजिक सुरक्षा पर मुख्य जोर — EPFO, ESIC और कर राहत
प्रतिनिधियों ने इस तथ्य को दोहराया कि संगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों कर्मचारी EPF और ESIC जैसी योजनाओं से जुड़े हैं, परंतु इन योजनाओं में:
- वर्तमान योगदान सीमा
- पात्रता मानदंड
- टैक्स लाभ शर्तें
आज की महंगाई और वेतन स्तर के अनुपात में बहुत कम हैं।
इसलिए उनकी मुख्य मांगें हैं:
- सामाजिक सुरक्षा पर दिए जाने वाले योगदान पर कर प्रोत्साहन (Tax Incentive)
- वेतनभोगी नागरिकों के लिए आयकर छूट सीमा में वृद्धि
- EPFO और ESIC की अधिकतम पात्रता वेतन सीमा में संशोधन
पेंशन — आर्थिक सुरक्षा का सबसे बड़ा प्रश्न
भारत में अधिकांश श्रमिक अपनी वृद्धावस्था में आर्थिक रूप से कमजोर हो जाते हैं। इसी आधार पर संगठनों ने कहा कि:
“न्यूनतम पेंशन ₹1,000 में गुज़ारा संभव नहीं। इसे बढ़ाकर ₹9,000 किया जाए।”
उनकी विस्तृत मांगें:
| मांग | वर्तमान स्थिति | प्रस्तावित परिवर्तन |
|---|---|---|
| EPFO पेंशन | ₹1,000 | ₹9,000 + DA (महंगाई भत्ता) |
| ग्रेच्युटी सीमा | सीमा लागू | सीमा पूरी तरह हटे |
| पेंशन पर टैक्स | टैक्स लगता है | टैक्स पूरी तरह समाप्त |
यही नहीं,
- नई पेंशन योजना (NPS) को रद्द कर
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूरी तरह बहाल करने की मांग जोरदार तरीके से उठी।
असंगठित और कृषि श्रमिकों के लिए बड़ा प्रस्ताव
देश के 90% से अधिक श्रमिक असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसलिए संगठनों ने सुझाव दिया:
केंद्र सरकार राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कोष बनाए| इसमें शामिल हो:
- सार्वभौमिक पेंशन योजना
- स्वास्थ्य-शिक्षा सुविधा
- न्यूनतम ₹9,000 मासिक पेंशन
- DA आधारित वार्षिक वृद्धि
नए रोजगार बनाना और खाली पद भरना — देश के युवाओं की उम्मीद
हमेशा की तरह इस बैठक में बेरोज़गारी एक महत्वपूर्ण विषय रहा। श्रमिक संगठनों ने कहा:
- सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में सभी रिक्त पदों की तत्काल भर्ती की जाए।
- Fixed Term Employment को खत्म कर
- स्थायी रोजगार (Regular Appointment) को बढ़ावा दिया जाए।
यह मांग युवाओं और श्रमिकों दोनों का आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है।
8वां वेतन आयोग — समय की जरूरत
श्रमिक संगठनों ने मांग रखी:
“8वें वेतन आयोग का गठन तुरंत किया जाए और पेंशनरों को भी शामिल किया जाए।”
क्योंकि 7वें वेतन आयोग के बाद:
- महंगाई लगातार बढ़ी
- लेकिन वेतन समीक्षा आगे नहीं बढ़ी
टैक्स संरचना सुधार — आम जनता पर बोझ नहीं
संगठनों ने सुझाव दिया:
- आवश्यक खाद्य वस्तुओं और दवाइयों पर GST भार कम हो
- संसाधन जुटाने के लिए:
- कंपनी टैक्स में संशोधन
- संपत्ति कर बढ़ाना
- अति-धनवान व्यक्तियों पर 1% उत्तराधिकार कर
उनके अनुसार यह उपाय:
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- और सामाजिक योजनाओं
का वित्तपोषण कर सकते हैं।
राष्ट्रीयकरण बनाम निजीकरण — श्रमिकों की गंभीर चिंता
वे चाहते हैं:
- सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों का निजीकरण रोका जाए
- राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन तुरंत बंद की जाए
कारण:
“सार्वजनिक संपत्ति देश की है। इसे निजी हाथों में देना श्रमिक और राष्ट्रीय हित दोनों के लिए नुकसानदायक है।”
न्यूनतम वेतन — गरिमा के साथ जीवन का अधिकार
भारतीय श्रम सम्मेलन की सहमति के आधार पर मांगा गया:
₹26,000 मासिक न्यूनतम वेतन
महंगाई समायोजन (inflation indexation) सहित
यह मांग देश के करोड़ों श्रमिकों के जीवन-स्तर को बदलने की क्षमता रखती है।
इस बैठक की भविष्यगामी अहमियत
यह बैठक इसलिए खास है क्योंकि:
✔ यह सीधे केंद्रीय बजट को प्रभावित करेगी
✔ सरकार और श्रमिक संगठन पहली बार इतने व्यापक स्तर पर आमने-सामने हैं
✔ आने वाले महीनों में फैसले देश में सामाजिक सुरक्षा का स्वरूप बदल सकते हैं
यदि सरकार ने श्रमिकों की मुख्य मांगों पर सकारात्मक कदम उठाए…
➡️ वृद्धावस्था सुरक्षित होगी
➡️ श्रमिकों में आर्थिक भरोसा बढ़ेगा
➡️ देश में उपभोग बढ़ेगा
➡️ अर्थव्यवस्था को विकास गति मिलेगी
निष्कर्ष — उम्मीदों से भरी आवाज़
श्रमिक संगठनों का मानना है कि:
“श्रम शक्ति खुश, देश खुश।”
इसलिए:
- पेंशन में सुधार
- वेतन में बढ़ोतरी
- सामाजिक सुरक्षा विस्तार
- और जिम्मेदार टैक्स नीति
इन सब पर निर्णय देश के भविष्य को नई दिशा देगा। अब नज़रें होंगी — बजट भाषण और सरकार के अंतिम फैसले पर।
