पाकिस्तान आज आर्थिक संकट, कर्ज़ संकट और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। लेकिन इस बदहाल देश में एक ऐसा “उद्योग” तेज़ी से बढ़ा है, जो देश की छवि पर सवाल खड़े करता है— भीख मांगने का अवैध उद्योग। ताजा रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान में भीख मांगना अब 42 अरब डॉलर का विशाल धंधा बन चुका है। यह न सिर्फ पाकिस्तान की सड़कों तक सीमित है बल्कि दुनिया के कई देशों तक फैल चुका है।
आश्चर्य की बात यह है कि विदेशों में दिखाई देने वाले 90% भिखारी पाकिस्तानी हैं। ये लोग बाकायदा वीजा लेकर खाड़ी देशों में “अंधे विश्वास और धर्म” के नाम पर कमाई करने निकल जाते हैं।

यह कहानी सिर्फ “गरीबी” की नहीं है। यह अपराध, संगठित नेटवर्क, मानव तस्करी और धार्मिक भावनाओं के दुरुपयोग की भी है।
पाकिस्तान में कितने भिखारी और कैसे बढ़ा यह काला कारोबार?
23 करोड़ की आबादी वाले पाकिस्तान में लगभग 3 करोड़ 80 लाख लोग भिखारी के रूप में सक्रिय बताए जा रहे हैं। यह संख्या पाकिस्तान की कुल आबादी का करीब 16% है—चौंकाने वाली और भयावह!
पाकिस्तान की सड़कों पर आपको बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएँ और यहाँ तक कि विकलांगों का रूप धरे लोग भी दिखेंगे—लेकिन इनमें से अधिकांश की “विकलांगता” नकली होती है।
सरकारी एजेंसियों और स्थानीय पत्रकारों की जांच में सामने आया:
- बच्चों के अंग तोड़कर या नशीले इंजेक्शन लगाकर भीख मंगवाई जाती है
- भिखारी गैंग छोटे-छोटे समूहों में बंटे होते हैं
- इनका “बॉस” रोज शाम को कमाई वसूलता है
- कई जगह पुलिस और राजनीतिक संरक्षण भी मिलता है
यह सिर्फ मजबूरी नहीं — व्यवसाय बन चुका है।
भिखारियों की आमदनी: शहर बदलते ही कमाई बदल जाती है
| शहर | औसत दैनिक भीख (PKR) | भारतीय रुपये में लगभग |
|---|---|---|
| कराची | 2000 | ₹600-650 |
| लाहौर | 1400 | ₹450 |
| इस्लामाबाद | 950 | ₹300 |
कराची में भीख सबसे अधिक मिलती है क्योंकि:
- धार्मिक दान करने की प्रवृत्ति अधिक
- जनसंख्या और ट्रैफिक घना
- दान को धार्मिक पुण्य माना जाता है
इस वजह से कराची में “भीख माफिया” का सबसे बड़ा अड्डा है।
खाड़ी देश: जहाँ पाकिस्तान भेजता है “भीख का एक्सपोर्ट”
रिपोर्ट के अनुसार:
“सऊदी अरब, UAE, मक्का, मदीना, दुबई, शारजाह—जहाँ भी धार्मिक आस्था, वहाँ पाकिस्तान के भिखारी”
ये भिखारी:
- वर्क वीजा के नाम पर भेजे जाते हैं
- धार्मिक तीर्थस्थलों पर लक्षित दानदाताओं से मोटी कमाई करते हैं
- पकड़े जाने पर डिपोर्ट कर दिये जाते हैं
- फिर नए पासपोर्ट पर दोबारा भेज दिए जाते हैं
यानी यह मानव तस्करी-सप्लाई नेटवर्क है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फल-फूल रहा है।
भीख उद्योग के पीछे का अंधेरा कारोबार
1️⃣ गैंग और दलाल
2️⃣ फर्जी विकलांगता, चोट और धार्मिक धोखे
3️⃣ बच्चों की खरीद-फरोख्त
4️⃣ धार्मिक आयोजनों पर स्पॉट कब्जा
5️⃣ पुलिस-प्रशासन का संरक्षण
यहाँ तक कि जकात (इस्लामी दान) का पैसा भी इस उद्योग को मजबूत कर रहा है।
पाकिस्तान के नेता क्यों चुप हैं?
सरकार के सामने पहली चुनौती ही कॉमेडी बन चुकी है:
- देश में नौकरियाँ नहीं
- उद्योग बंद
- आयात महँगा
- IMF के कर्ज़ पर निर्भर शासन
ऐसे में सत्ता को यह “भीख अर्थव्यवस्था” एक तरह का सोशल प्रेशर रिलीज़ लगती है— क्योंकि लोग भूखे नहीं मर रहे… बस भीख मांगकर जी रहे हैं। यह समाज का नैतिक पतन है।
इस्लामाबाद और लाहौर क्यों भिखारी मुक्त किए जा रहे हैं?
सरकार की नाकामयाबी छिपाने के लिए कोशिशें होती हैं:
- VIP क्षेत्र में भिखारियों पर सख्त रोक
- विदेशी मेहमानों के सामने देश की इमेज बचाने का प्रयास
लेकिन हकीकत यह है:
जहाँ सख्ती होती है, वहाँ भिखारी दूसरे शहरों में शिफ्ट कर दिये जाते हैं
समस्या हल नहीं होती… टाल दी जाती है।
पाकिस्तान की मानसिकता: भिखारी होना “पेशा” बन गया
रिपोर्ट्स बताती हैं:
- कई लोग नौकरी करने की बजाय भीख से कमाई पसंद करते हैं
- त्योहारों पर कमाई दोगुनी-तिगुनी हो जाती है
- लोग इसे रिस्क फ्री बिजनेस मानने लगे हैं
एक पाकिस्तानी समाजशास्त्री के शब्दों में:
“भीख मांगना अब गरीबी नहीं, बल्कि करियर बन चुका है।”
अंतरराष्ट्रीय छवि और भारत की तुलना
भारत में भी भिखारी हैं, यह सच है। लेकिन:
- भारत उन्हें खत्म करने की नीतियाँ बना रहा है
- कौशल विकास और पुनर्वास योजनाएँ सक्रिय हैं
वहीं पाकिस्तान:
- समस्या को निर्यात कर रहा है
- भीख को “रोजगार” के रूप में बढ़ावा दे रहा है
इससे उसका चेहरा दुनिया में एक:
गरीब, निर्भर और अपराधी राष्ट्र
के रूप में उभर रहा है।
निष्कर्ष: पाकिस्तान कब संभलेगा?
42 अरब डॉलर की यह “भीख अर्थव्यवस्था” पाकिस्तान के लिए तमाचा है। एक ऐसा देश…
जो F-16, परमाणु हथियार और कश्मीर की दुहाई देता है लेकिन अपने नागरिकों को दो वक्त की रोटी भी नहीं दे पाता। यदि पाकिस्तान ने:
- रोजगार
- शिक्षा
- उद्योग
पर निवेश नहीं किया तो वह अपनी अगली पीढ़ी को भिखारी ही बना देगा। पाकिस्तान को तय करना है—
क्या वह “परमाणु शक्ति” कहलाना चाहता है
या “भीख की वैश्विक राजधानी”?
