मध्यप्रदेश की वित्तीय राजधानी कहलाने वाला इंदौर, स्वच्छता और विकास की पहचान के साथ-साथ आजकल एक और गंभीर वजह से सुर्खियों में है — अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का फैलता जाल। हाल ही में गिरफ्तार अफ्रीकी मूल की महिला लिंडा इस बड़े और खतरनाक रैकेट की जड़ तक पहुँचने की कुंजी बन गई है।

लिंडा की गिरफ्तारी ने पुलिस और नारकोटिक्स एजेंसी को यह समझा दिया है कि देश में बैठे एक संगठित गिरोह की पहुंच विदेशों तक फैली हुई है। ड्रग्स की तस्करी के लिए बनाए गए इस नेटवर्क में न केवल सप्लाई चेन मजबूत है, बल्कि पहचान छुपाने के लिए फर्जी पासपोर्ट और फर्जी यात्रा दस्तावेज भी इस्तेमाल किए जाते हैं।
भारत आने का रास्ता — नकली पहचान के सहारे
जांच के दौरान जब पुलिस ने लिंडा के पास मिले पासपोर्ट नंबर और उसकी यात्रा संबंधी जानकारी की एविएशन विभाग से पुष्टि मांगी, तो एक चौंकाने वाला सच सामने आया — दस्तावेजों में किसी भी रिकॉर्ड से मेल नहीं था।
पासपोर्ट इतनी बारीकी से तैयार किया गया था कि पहली नजर में असली और नकली की पहचान करना असंभव था। यह संकेत था कि लिंडा केवल ड्रग कूरियर नहीं, बल्कि नकली दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह से भी जुड़ी हुई है।
एजेंसियों के अनुसार लिंडा कुछ साल पहले अफ्रीका से मुंबई पहुँची थी, लेकिन उसकी एंट्री संबंधी कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। इसका मतलब है — वह गुप्त रूप से बिना किसी सरकारी नोटिंग के भारत में प्रवेश कर चुकी थी।
पकड़े जाने का वो पल — जब खेल खत्म हुआ
नारकोटिक्स विंग ने लिंडा को तब पकड़ा जब वह इंदौर के रेसिडेंसी एरिया में ड्रग सप्लाई देने पहुँची। उसके बैग से 31.85 ग्राम कोकीन बरामद की गई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 15.50 लाख रुपये बताई गई है। पहले वह पुलिस को भ्रम में डालने की कोशिश करती रही, लेकिन जब पूछताछ का दबाव बढ़ा, तो उसने आखिरकार एक इंदौरी युवक का नाम उगल दिया — जिसे वह ड्रग्स देने आई थी।
उस युवक का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार — गिरफ्तारी की भनक मिलते ही वह शहर छोड़कर फरार हो गया।
ड्रग्स सप्लाई की पुरानी कड़ियाँ मिल रहीं
जांच में पता चला कि लिंडा मुंबई से बस के जरिये इंदौर पहुंची थी। यह बात संकेत देती है कि — वह पहले भी भारत के कई राज्यों में इसी तरह की डिलीवरी कर चुकी है और संभवतः उसके पास देशभर में सप्लायर्स और ग्राहकों का मजबूत नेटवर्क मौजूद है।
एजेंसियों का मानना है कि लिंडा जैसी महिलाएँ ड्रग माफिया के हाथों की कठपुतली बनकर काम करती हैं — सस्ता जोखिम वाला माध्यम, और कम में बड़ी डिलीवरी।
मोबाइल फोन खोलेगा पूरी सच्चाई
पुलिस ने लिंडा का मोबाइल जब्त कर उसे डिजिटल फॉरेंसिक लैब भेजा है। मोबाइल की जांच में यह जानने की कोशिश हो रही है —
- वह किसके संपर्क में थी
- उसे किससे पेमेंट मिलती थी
- किन-किन शहरों में सप्लाई कर चुकी है
- ड्रग्स के असली सरगना कौन हैं
- पेमेंट क्रिप्टो या फर्जी खातों से तो नहीं?
कॉल डिटेल से यह भी सामने आया है कि वह इंटरनेट कॉल और चैटिंग ऐप्स का उपयोग ज्यादा करती थी ताकि उसकी बातचीत का कोई टेलीकॉम रिकॉर्ड न मिले।
अफ्रीकी ड्रग नेटवर्क का बढ़ता भारत कनेक्शन
पिछले कुछ वर्षों में भारत में नाइजीरियन और अफ्रीकी मूल के ड्रग तस्करों की सक्रियता बढ़ी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार —
“भारत को अब अंडरकवर ड्रग ट्रांजिट पॉइंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।”
लिंडा की गिरफ्तारी इसी बढ़ते खतरे का एक ताजा उदाहरण है।
नकली दस्तावेज गिरोह पर भी जांच तेज
एजेंसियाँ अब यह पता लगाने में जुटी हैं —
- नकली पासपोर्ट कहाँ तैयार हुआ
- कौन लोग उसकी मदद कर रहे थे
- क्या एयरपोर्ट स्टाफ में भी कोई शामिल?
क्योंकि बिना बड़े नेटवर्क के, किसी विदेशी महिला का वर्षों तक देश में बिना रिकॉर्ड घूमना संभव नहीं।
अदालत में पेशी और आगे की सख्त कार्रवाई
लिंडा को गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया और उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। आगे की पूछताछ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, इंटेलिजेंस एजेंसियों और पासपोर्ट विभाग के संयुक्त सहयोग से की जाएगी।
कहा जा रहा है कि जल्द ही इस केस से जुड़े बड़े आरोपियों तक पहुंचने के लिए देशभर में छापेमार कार्रवाई शुरू की जाएगी।
इंदौर पुलिस की चुनौती
पिछले कुछ महीनों में इंदौर में कई युवाओं के ड्रग्स की चपेट में आने के मामले पाए गए हैं। लिंडा जैसी डिलीवरी एजेंट्स इसी काले कारोबार को बढ़ावा देते हैं। पुलिस का लक्ष्य है — इस पूरे नेटवर्क का अंत करना, केवल सप्लायर को पकड़ लेना नहीं।
निष्कर्ष: बड़ा गिरोह अब शिकंजे में?
लिंडा की गिरफ्तारी केवल एक शुरुआत है। यह मामला साफ बताता है —
- भारत के बड़े शहर
- अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट के निशाने पर हैं
- नकली पासपोर्ट और डार्क वेब अब इस अपराध का नया हथियार बन चुके हैं
अगर एजेंसियां इससे जुड़े असली मास्टरमाइंड तक पहुँच जाती हैं तो यह भारत की सुरक्षा एजेंसियों की एक बड़ी उपलब्धि होगी।
