बॉलीवुड की दुनिया में बड़े परिवार और करोड़ों की संपत्ति अक्सर कानूनी विवादों का कारण बनते हैं। हाल ही में दिवंगत अभिनेता और बिजनेसमैन संजय कपूर की 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति और वसीयत को लेकर नया मोड़ सामने आया है। यह विवाद तब और पेचीदा हो गया जब संजय कपूर की दूसरी पत्नी प्रिया सचदेव के 6 साल के बेटे ने कोर्ट में एंट्री मारी और करिश्मा कपूर के बच्चों की याचिका का विरोध किया।

प्रिया सचदेव के बेटे की ओर से वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल ने जस्टिस ज्योति सिंह के सामने दलील पेश की। उन्होंने कहा कि करिश्मा कपूर के बच्चों द्वारा दायर याचिका केवल अटकलों और अनुमानों पर आधारित है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संजय कपूर के जीवनकाल में परिवार में किसी भी प्रकार का झगड़ा या दरार नहीं थी और सभी रिश्ते सामान्य थे।
संजय कपूर की वसीयत: कानूनी दृष्टिकोण
संजय कपूर की वसीयत में पत्नी प्रिया सचदेव को पूरी संपत्ति छोड़ने का निर्णय लिया गया था। वकील अखिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि यह निर्णय संजय कपूर की इच्छा और पारिवारिक परंपरा के अनुरूप था। उनके मुताबिक, संजय के ससुर ने भी प्रथा के अनुसार अपनी पत्नी को सम्पत्ति सौंप दी थी।
वकील ने यह भी तर्क दिया कि करिश्मा कपूर और उनके नाबालिग बच्चे समायरा ने वसीयत की कॉपी के लिए उचित समय पर कोई संपर्क नहीं किया। उनके अनुसार, 30 जुलाई को हुई मीटिंग के बाद तक करिश्मा के बच्चों ने वसीयत की कॉपी के लिए किसी तरह का अनुरोध नहीं किया। केवल 22 अगस्त को उन्होंने पहली बार अनुरोध किया, जो कि कानूनी प्रक्रिया में देर के रूप में देखा गया।
करिश्मा कपूर के बच्चों की चुनौती और उसका विरोध
करिश्मा कपूर के बच्चों ने वसीयत की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया और यह दावा किया कि उन्हें वसीयत में नाम नहीं दिया गया है। इसके आधार पर उन्होंने वसीयत को चुनौती देने की कोशिश की। हालांकि, प्रिया सचदेव के बेटे के वकील ने इसे पूर्वनियोजित रणनीति बताया। उनके अनुसार, करिश्मा के बच्चों को पहले से ही पता था कि वसीयत में उन्हें शामिल नहीं किया गया है, इसलिए उन्होंने यह याचिका दायर करना आवश्यक समझा।
सिब्बल ने जोर देकर कहा कि यह मामला केवल कानूनी और वित्तीय रणनीति का हिस्सा है और इसमें कोई संदिग्ध या धोखाधड़ी नहीं हुई है। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि संजय कपूर के निधन से पहले परिवार के सभी सदस्य आपसी संबंधों में संतुलित और सामान्य थे।
वसीयत विवाद और मीडिया का प्रभाव
बॉलीवुड की संपत्ति विवादों में मीडिया की भूमिका भी अहम होती है। संजय कपूर की 30,000 करोड़ की संपत्ति और इसके आसपास का विवाद मीडिया के शीर्ष पृष्ठों पर लगातार बना हुआ है। इससे न केवल परिवार के सदस्य तनाव में हैं, बल्कि आम जनता में भी जिज्ञासा और चर्चा का विषय बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विवाद केवल व्यक्तिगत या पारिवारिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहते। ये बॉलीवुड इंडस्ट्री की छवि और पेशेवर नेटवर्क पर भी असर डाल सकते हैं। मीडिया की कवरेज से मामला कानूनी दृष्टि से और जटिल बन जाता है, क्योंकि पब्लिक ओपिनियन पर भी दबाव पड़ता है।
कोर्ट की सुनवाई और भविष्य की दिशा
कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख तय की है। करिश्मा कपूर के बच्चों की याचिका में यह मांग शामिल है कि वसीयत विवाद सुलझने तक प्रिया सचदेव संपत्ति बेचने या बदलने से रोक दी जाए। वहीं, प्रिया सचदेव और उनके बेटे का पक्ष स्पष्ट है कि संपत्ति पूरी तरह से कानूनी और संजय कपूर की अंतिम इच्छा के अनुसार है।
वकील अखिल सिब्बल ने यह भी स्पष्ट किया कि संजय की वसीयत में कोई गलत या संदेहजनक कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार, परिवार के सभी सदस्य जानते थे कि वसीयत में प्रिया को संपत्ति मिलने वाली है और यह निर्णय पूरी तरह वैध है।
बॉलीवुड और संपत्ति विवाद: क्या यह आम है?
बॉलीवुड में ऐसे संपत्ति और वसीयत विवाद दुर्लभ नहीं हैं। अक्सर परिवार के विभिन्न सदस्य, विशेषकर बच्चों और दूसरे विवाह के पार्टनर, कानूनी प्रक्रिया में शामिल हो जाते हैं। बड़े पैमाने पर संपत्ति और फेमिली बिजनेस के चलते इन विवादों में वसीयत की सटीकता और कानूनी दस्तावेज महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
संजय कपूर का मामला इसे और स्पष्ट करता है कि नाबालिग बच्चों का कानूनी प्रतिनिधित्व और पारिवारिक रणनीति इस तरह के विवादों में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
निष्कर्ष: कानूनी और पारिवारिक संतुलन
संजय कपूर की संपत्ति विवाद की कहानी न केवल बॉलीवुड के ग्लैमर और विवाद की झलक दिखाती है, बल्कि यह हमें यह भी बताती है कि परिवार में पारिवारिक संतुलन और कानूनी समझ कितनी अहम है। प्रिया सचदेव के बेटे का कानूनी हस्तक्षेप और करिश्मा कपूर के बच्चों की याचिका इस मामले को और पेचीदा बना देती है।
यह कहानी दर्शाती है कि धन, वैधानिक अधिकार और पारिवारिक भावनाएं कैसे एक-दूसरे के साथ टकरा सकती हैं। कोर्ट का निर्णय आने वाला है, लेकिन मीडिया और जनता की नजरें इस कानूनी ड्रामे पर बनी रहेंगी।
