मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। हाल ही में इंदौर में हुई दो अलग-अलग घटनाओं ने यह सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकार और परिवहन विभाग वास्तव में पैनिक बटन जैसी सुरक्षा सुविधाओं को सही ढंग से लागू कर रहे हैं। इन घटनाओं में एक युवती और एक नेशनल शूटर के साथ बसों में छेड़छाड़ और अश्लील हरकतें की गईं, जिससे यात्रियों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ गई।
पैनिक बटन सुरक्षा उपाय का उद्देश्य यात्रियों, विशेषकर महिलाओं, को तुरंत सहायता उपलब्ध कराना है। यह सुविधा सैकड़ों बसों में लगाई गई है, लेकिन भोपाल-जबलपुर मार्ग की बसों में इसका पालन नहीं हो रहा। जबकि ग्वालियर में पैनिक बटन चालू है और समय पर उपयोग किया जा रहा है, इंदौर और अन्य शहरों में नियमों की अनदेखी देखी जा रही है।

इंदौर में हुई घटनाओं का विवरण
इंदौर में हाल ही में दो ऐसी घटनाएं सामने आईं, जो सुरक्षा की गंभीर कमी को उजागर करती हैं। पहली घटना में एक युवती अपने कार्यालय से घर लौट रही थी। बस में यात्रा करते समय, उसके साथ चालक या सह-यात्री ने अश्लील हरकत की, जिससे वह डर और शर्मिंदगी का शिकार हुई।
दूसरी घटना में, एक नेशनल शूटर महिला अपने प्रशिक्षण सत्र के बाद बस में बैठी थी। इसी दौरान कुछ संदिग्ध यात्रियों ने उसके साथ छेड़छाड़ की कोशिश की, जिसे आसपास के यात्रियों और CCTV फूटेज से पकड़ा गया। यह दोनों घटनाएं इंदौर में बसों की सुरक्षा प्रणाली में बड़े पैमाने पर लापरवाही को दर्शाती हैं।
पैनिक बटन: नियम बनाम वास्तविकता
पैनिक बटन एक इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम है जिसे बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाया गया। किसी भी खतरे की स्थिति में यात्री इसे दबाकर तुरंत केंद्रीय नियंत्रण कक्ष या पुलिस को अलर्ट कर सकते हैं।
ग्वालियर में यह सुविधा प्रभावी ढंग से काम कर रही है। वहां की बसों में लगे पैनिक बटन का उपयोग समय पर किया जा रहा है और यात्रियों को सुरक्षित महसूस कराया जा रहा है। इसके विपरीत, भोपाल-जबलपुर और इंदौर में कई बसों में पैनिक बटन के सही काम करने की पुष्टि नहीं हो रही।
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई बस ऑपरेटर पैनिक बटन को ठीक से मेंटेन नहीं कर रहे या चालक और परिचालक को इसके उपयोग की ट्रेनिंग नहीं दी गई है। इससे यात्रियों को वास्तविक समय में मदद मिलने की संभावना कम हो जाती है।
महिलाओं की सुरक्षा पर असर
प्रदेश में सैकड़ों महिलाएं रोज रात के समय नौकरी, शिक्षा या अन्य कार्यों के लिए बस का उपयोग करती हैं। पैनिक बटन की अनुपलब्धता और छेड़छाड़ की घटनाओं से उन्हें डर और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पैनिक बटन का सही इस्तेमाल हो, तो ऐसे मामले तुरंत कंट्रोल किए जा सकते हैं। यह सुविधा न केवल यात्री की सुरक्षा बढ़ाती है, बल्कि अपराधियों में डर भी पैदा करती है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और कसावट
इंदौर में हुई घटनाओं के बाद परिवहन विभाग ने बस ऑपरेटरों और चालक को सख्त निर्देश दिए हैं। बसों में पैनिक बटन की कार्यप्रणाली की जांच शुरू की गई है और संचालन मानकों में सुधार लाने के लिए नियमित निरीक्षण किया जा रहा है।
साथ ही, पुलिस और परिवहन विभाग ने जागरूकता अभियान भी चलाया है। यात्रियों को बताया जा रहा है कि किसी भी खतरे की स्थिति में पैनिक बटन दबाना चाहिए और तुरंत मदद मांगी जा सकती है।
विशेषज्ञों की राय
सुरक्षा और परिवहन विशेषज्ञ कहते हैं कि पैनिक बटन केवल तकनीकी समाधान नहीं है। इसके साथ-साथ चालक और परिचालक को प्रशिक्षण देना, बसों में CCTV कैमरे लगाना और नियमित निरीक्षण करना भी जरूरी है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि बस ऑपरेटरों और राज्य सरकार को सख्त निगरानी और कड़े दंड की नीति अपनानी चाहिए। ताकि यात्री, खासकर महिलाएं, रात के समय सार्वजनिक परिवहन का सुरक्षित उपयोग कर सकें।
निष्कर्ष
प्रदेश में बसों में पैनिक बटन की अनुपालना सुनिश्चित करना न केवल कानून की आवश्यकता है, बल्कि सुरक्षित परिवहन का अधिकार भी है। इंदौर और भोपाल-जबलपुर जैसी जगहों पर लापरवाही ने महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
यदि सही ढंग से पैनिक बटन का उपयोग और पालन सुनिश्चित किया जाए, तो ऐसे अपराधों को रोका जा सकता है। यात्रियों को सुरक्षित महसूस कराने और अपराधियों को डराने के लिए यह अनिवार्य है।
