पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर में सोमवार को फेडरल कांस्टेबुलरी (FC) मुख्यालय पर आत्मघाती हमले ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। यह हमला केवल सुरक्षा बलों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा ढांचे के लिए गंभीर चेतावनी साबित हुआ है। पेशावर का यह इलाका सुरक्षा दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यहाँ न केवल सुरक्षा बलों के मुख्यालय मौजूद हैं, बल्कि कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय और एजेंसियां भी इसी क्षेत्र में स्थित हैं।

सुबह के समय, जब शहर अभी अपने दैनिक कार्य में व्यस्त था, तभी एक आत्मघाती हमलावर ने FC मुख्यालय के गेट पर खुद को विस्फोटक के साथ उड़ा लिया। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास की इमारतों के शीशे टूट गए और अफरातफरी मच गई। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार दो शक्तिशाली धमाके हुए, इसके बाद गोलियों की आवाजें भी सुनाई दी। स्थानीय लोग और सुरक्षा बल तत्काल प्रतिक्रिया में जुट गए।
हमले की स्थिति और सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया
घटनास्थल पर पहुंचने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में तीन आतंकवादी मारे गए और फेडरल कांस्टेबुलरी के तीन सदस्य भी शहीद हुए हैं। सात अन्य सुरक्षा कर्मी घायल हुए हैं, जिन्हें पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। शहर के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा बलों ने इलाके को पूरी तरह से घेर लिया है और हमलावरों की तलाश जारी है।
पाकिस्तान के सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह हमला खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हाल के समय में बढ़ती हमलों की श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है। नवंबर 2022 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने सरकार के साथ चल रहे सीजफायर को समाप्त कर दिया था और सुरक्षा बलों के खिलाफ हमलों की चेतावनी जारी की थी। इसके बाद से पाकिस्तान में ऐसे हमलों में काफी उछाल देखा गया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया और प्रशासनिक संकट
पेशावर शहर में यह हमला संवेदनशील इलाके में हुआ, जहाँ न केवल सुरक्षा बलों के ऑफिस हैं बल्कि नागरिक भी दैनिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं। धमाके के बाद अफरातफरी मच गई, सड़कें बंद कर दी गईं और पुलिस ने आसपास के सभी रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी। स्थानीय लोगों ने बताया कि हमले के बाद पूरे इलाके में सायरन की आवाज गूंजती रही और लोग अपने घरों में छिपने को मजबूर हो गए।
सीसीटीवी फुटेज और अन्य सुरक्षा कैमरों से यह स्पष्ट हुआ कि आत्मघाती हमलावर मुख्य गेट तक पहुंचने में सफल रहा और विस्फोटक को सक्रिय किया। इस घटना ने सुरक्षा बलों और प्रशासन के लिए गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया कि संवेदनशील इलाके में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
पूर्व घटनाओं का संदर्भ
पाकिस्तान में इस प्रकार के हमलों का इतिहास लंबे समय से रहा है। सितंबर में खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में भी इसी तरह का हमला हुआ था। उस दौरान छह पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और पांच आतंकियों को सुरक्षा बलों ने ढेर कर दिया था। उस समय भी यह हमला TTP की ओर से किया गया था। पेशावर हमले ने यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान में आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पेशावर का यह हमला केवल सुरक्षा बलों को ही नहीं, बल्कि पूरे पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को चुनौती देता है। यह दर्शाता है कि आतंकवादी संगठन अब मुख्यालयों और संवेदनशील क्षेत्रों पर सीधे हमले करने की रणनीति अपना रहे हैं।
फेडरल कांस्टेबुलरी (FC) का महत्व
फेडरल कांस्टेबुलरी पाकिस्तान की एक अर्धसैनिक इकाई है, जो पुलिस और सेना के बीच काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य आंतरिक सुरक्षा, दंगे, आतंकवाद और बॉर्डर इलाकों में गश्त करना है। FC दो हिस्सों में बंटी है, एक खैबर पख्तूनख्वा और दूसरा बलूचिस्तान में सक्रिय रहता है। हालांकि इसे कई बार पाकिस्तानी सेना का हिस्सा माना जाता रहा है, लेकिन इसकी मुख्य जिम्मेदारी अर्धसैनिक और पुलिस संचालन में होती है। इस हमले ने दिखा दिया कि FC के संवेदनशील मुख्यालय भी आतंकवादियों के निशाने पर हैं।
हमले के बाद सुरक्षा और जांच
हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने पूरे परिसर को घेर लिया और इलाके में खोजबीन शुरू कर दी। शहर की प्रमुख सड़कों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। अधिकारियों ने बताया कि हमलावरों की पूरी योजना का पता लगाने के लिए क्षेत्र में जांच जारी है और बाकी आतंकियों की तलाश की जा रही है। पाकिस्तान के सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि इस हमले ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती पेश की है और भविष्य में संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने की आवश्यकता है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
पेशावर हमले ने पाकिस्तान में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। सुरक्षा बलों पर हमले की यह श्रृंखला जनता में भय और असुरक्षा की भावना पैदा कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे हमले सरकार की कानून व्यवस्था और सुरक्षा ढांचे की छवि पर प्रश्न चिह्न लगाते हैं। इससे पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
