आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया तेज़ी से बदल रही है। नई तकनीकें हर दिन सामने आती हैं और हमारे जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही हैं। इसी बदलाव की एक बड़ी कड़ी है गूगल का नया एआई मॉडल Nano Banana Pro। यह मॉडल सोशल मीडिया पर पिछले कुछ समय से चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसकी वजह है इसके द्वारा बनाई जाने वाली अत्यंत वास्तविक, बारीक और उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें। 4K क्वालिटी, नेचुरल डिटेलिंग, चेहरे की निरंतरता और एडिटिंग की उन्नत तकनीक ने तकनीकी दुनिया को चौंका दिया है।

लेकिन, प्रगति के साथ समस्याओं और खतरों की आशंकाएँ भी समान रूप से बढ़ती हैं। हाल ही में सामने आया खुलासा यह है कि Nano Banana Pro भारतीय पहचान दस्तावेजों, जैसे आधार कार्ड और पैन कार्ड, के बेहद वास्तविक दिखने वाले नकली संस्करण तैयार कर सकता है। इतना वास्तविक कि पहली नजर में किसी असली पहचान पत्र से अलग करना मुश्किल हो सकता है।
प्रयोग में मिला चौंकाने वाला परिणाम
कई इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने दावा किया कि मॉडल से केवल विवरण दर्ज करने पर वह उपयोगकर्ता की तस्वीर और अन्य पहचान संबंधी जानकारी के साथ नकली दस्तावेज तैयार कर देता है। रिपोर्ट्स में यह भी पाया गया कि यह मॉडल किसी सुरक्षा चेतावनी के बिना वही बनाता है जो उससे कहा जाता है। यानी यह समझने में असमर्थ दिखता है कि वह कोई संवेदनशील और सरकारी दस्तावेज बना रहा है।
ये बातें आशंका को जन्म देती हैं कि यदि यह सुविधा गलत हाथों में चली जाए| तो पहचान की चोरी, धोखाधड़ी, वित्तीय अपराध, और साइबर क्राइम जैसे मामलों में भयावह वृद्धि हो सकती है।
एआई वॉटरमार्क की सीमा
गूगल ने अपने मॉडल में SynthID नामक तकनीक शामिल की है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी एआई द्वारा बनाई गई तस्वीर में एक अदृश्य वॉटरमार्क हो। ताकि जरूरत पड़ने पर यह पहचाना जा सके कि चित्र एआई जनरेटेड है।
लेकिन साइबर विशेषज्ञों के अनुसार अगर कोई छवि संपादन में पारंगत व्यक्ति थोड़ी मेहनत करे| तो वह वॉटरमार्क हटाने या अस्पष्ट करने का तरीका ढूंढ सकता है। ऐसा हुआ तो एआई बनी छवियाँ असली पहचान पत्र की तरह गलत इस्तेमाल हेतु प्रयोग की जा सकती हैं।
सुरक्षा टीम पर उठ रहे सवाल
गूगल की सुरक्षा टीम दुनिया में अपने कड़े नियमों के लिए जानी जाती है। कई बार सामान्य चीजों के लिए भी एआई मॉडल चेतावनी देते हैं, जो उपयोगकर्ताओं को परेशान कर देता है।
लेकिन इस तरह के भारी और सीधा दुरुपयोग पैदा करने वाले जोखिम को न रोक पाना किसी बड़ी खामी की ओर इशारा करता है।
इससे सवाल उठ रहा है कि क्या आम नागरिकों की पहचान और डेटा सुरक्षा, टेक कंपनियों की प्राथमिकता में वास्तव में शीर्ष पर है?
एआई और पहचान सुरक्षा: सरकारों के लिए नई चुनौती
एआई आधारित पहचान पत्रों के दुरुपयोग की घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं। यह केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर की सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है।
भारत में पहचान पत्र सीधे नागरिक की वित्तीय एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े हैं।
आधार कार्ड
बैंक खाता
सबसिडी
योजनाएँ
सिम कार्ड
सब आधार सत्यापन के जरिए जुड़े हुए हैं।
अगर किसी ने किसी व्यक्ति की पहचान चुरा ली तो उसका दुरुपयोग कर, वह उसके नाम पर कर्ज ले सकता है| बैंक खाता खुलवा सकता है, जाली प्रमाणपत्र बनाकर अपराध कर सकता है या पैसे निकाल सकता है। इसलिए किसी भी प्रकार का गलत उपयोग एक बड़े राष्ट्रीय खतरे में बदल सकता है।
टेक्नोलॉजी के दो चेहरे
एआई का उद्देश्य है मानव जीवन को सरल, सुरक्षित और अधिक शक्तिशाली बनाना परन्तु गलत दिशा में प्रयोग विनाशकारी सिद्ध हो सकता है। Nano Banana Pro युवा कलाकारों, डिजाइनर्स, इंजीनियरों, और छात्रों के लिए उत्साहजनक और लाभदायक उपकरण है जो कल्पनाओं को वास्तविक रूप देता है। पर वही तकनीक अगर अपराधियों के हाथों में पहुंच जाए तो समाज और देश के लिए खतरा बन सकती है।
समाधान की खोज
अब सवाल यह है कि आखिर इस जोखिम को रोकने के लिए क्या किया जाए क्योंकि एआई को आज वापस मोड़ना संभव नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कंपनियों को केवल वॉटरमार्क या चेतावनी के भरोसे नहीं रहना चाहिए बल्कि ऐसे दस्तावेजों से मिलते-जुलते प्रारूपों का पता लगाने और रोकने वाली अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकें विकसित करनी चाहिए।
इसके साथ ही सरकारों को भी एआई-एथिक्स संबंधी सख्त नियम और कानूनी नियंत्रण बनाने होंगे ताकि एआई कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
निष्कर्ष
तकनीक का विकास यदि जिम्मेदारी के साथ न किया जाए तो वह समाज को सुरक्षा के बजाय संकट दे सकता है। Nano Banana Pro ने
एआई की शक्ति का एक उज्ज्वल और एक अंधेरा पक्ष दोनों दुनिया के सामने रख दिए हैं। अब जरूरत है इन खतरों को स्वीकारकर
एआई सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा के स्तर तक गंभीरता से लेने की ताकि डिजिटल भविष्य नींव से सुरक्षित हो और पहचान की चोरी को अवसर नहीं चुनौती ही बनाया जाए।
