सीहोर जिले के आष्टा क्षेत्र में स्थित वीआईटी कॉलेज में देर रात अचानक बिगड़े हालातों ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। शांत वातावरण में रहने वाले इस विशाल शैक्षणिक परिसर में बीती रात उस समय तनाव की आग भड़क उठी, जब हजारों छात्रों ने एक साथ यूनिवर्सिटी प्रबंधन के खिलाफ अपनी आवाज ऊंची करना शुरू कर दी। कॉलेज की इमारतें, हॉस्टल ब्लॉक, पार्किंग क्षेत्र और बाहरी परिसर लंबे समय तक गूंजते रहे छात्रों के नारों, भगदड़, उत्तेजना और अव्यवस्था से। यह कोई छोटी-मोटी नाराजगी नहीं थी, बल्कि लंबे समय से उपेक्षित महसूस कर रहे छात्रों का वह आक्रोश था, जो धीरे-धीरे पनपता हुआ अंत में विस्फोट का रूप ले चुका था।

घटनाओं का यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब हॉस्टल में रहने वाले कई छात्रों ने एक ही दिन में असामान्य रूप से अस्वस्थ महसूस किया। पेट दर्द, उल्टी, कमजोरी और पीलिया जैसे लक्षण अचानक ही कई कमरे और कई मंजिलों तक फैलते महसूस हुए। देखते ही देखते हॉस्टल वार्डन के पास शिकायतों की लाइन लग गई। छात्रों ने अपने स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता जताई और इसके पीछे हॉस्टल में मिलने वाले भोजन और पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई दिनों से उन्हें मिल रहा भोजन लगातार खराब हो रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद, किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई, जिससे नाराजगी और बढ़ती चली गई।
रात लगभग साढ़े नौ बजे कुछ छात्र अपने दोस्तों को लेकर वार्डन के कमरे पहुंचे और भोजन की गुणवत्ता को लेकर तुरंत समाधान की मांग की। वार्डन ने आश्वासन देने की कोशिश की, लेकिन समस्या के लगातार अनसुलझे रहने से छात्र पहले से ही तनाव में थे। धीरे-धीरे अधिक छात्र नीचे मैदान में जुटने लगे। करीब एक घंटे में छात्र-संख्या हजारों में पहुंच गई। हर किसी के चेहरे पर गुस्सा, निराशा और असुरक्षा साफ झलक रही थी। भीड़ ने एक सुर में मांग की कि प्रबंधन तत्काल मैदान में आए और स्थिति को गंभीरता से समझे।
हालांकि प्रबंधन की ओर से देर तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई। देखते ही देखते कॉलेज का माहौल उग्र हो गया। आक्रोशित छात्रों ने परिसर के एक हिस्से में खड़ी बस पर पथराव शुरू कर दिया। बस के शीशे टूटते ही भीड़ और भड़क उठी और देखते ही देखते आग की लपटें उठने लगीं। कुछ छात्रों ने पास खड़ी दो कारों के साथ भी यही किया। एम्बुलेंस, आरओ प्लांट, हॉस्टल के खिड़कियों, गलियारों और परिसर की अन्य संपत्तियों को गंभीर नुकसान पहुंचा। आग की तेज रोशनी और धुएं का गुबार रातभर फैलता रहा।
इस बीच स्थानीय प्रशासन को अचानक सूचना दी गई कि कॉलेज में हजारों छात्रों द्वारा हिंसक विरोध जारी है। सूचना मिलते ही एसडीएम, एसडीओपी और आसपास के थानों से भारी पुलिस बल घटनास्थल की ओर रवाना हुआ। आष्टा, जावर, पार्वती और कोतवाली थानों के अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचने के आदेश दिए गए। कॉलेज परिसर में प्रवेश करने के लिए पुलिस को पहले रणनीति बनानी पड़ी, क्योंकि अंदर हजारों की भीड़ थी और माहौल अत्यंत तनावपूर्ण। पुलिस ने पहुंचकर छात्रों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ शुरुआत में किसी की बात सुनने के लिए तैयार नहीं थी।
कई घंटों की कोशिशों के बाद पुलिस ने बातचीत का माहौल बनाने की शुरुआत की। छात्रों से प्रतिनिधि चुने गए, जिन्होंने साफ कहा कि उनका गुस्सा अचानक नहीं फूटा। उन्होंने यह भी बताया कि हॉस्टल में मिलने वाला पानी कई दिनों से बदबूदार और दूषित है। छात्रों के अनुसार आरओ सिस्टम लंबे समय से खराब हालत में था और कई बार प्रबंधन से शिकायत करने के बावजूद, किसी ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने यह दावा भी किया कि हॉस्टल में परोसा जाने वाला खाना कई बार बदबूदार, आधा पका और बेहद निम्न गुणवत्ता का होता था। कई छात्रों का कहना था कि वे मजबूरी में खाना खाते थे, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी सेहत पर भारी पड़ने लगा और आखिरकार पीलिया जैसे गंभीर मामलों ने स्थिति को और भयावह बना दिया।
जैसे-तैसे प्रशासन की मौजूदगी में सुबह चार बजे के करीब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में लाई जा सकी। हालांकि नुकसान काफी हो चुका था। कॉलेज परिसर में जली हुई बस, कांच के दरवाजों के टूटे अवशेष और धुएं की तीखी गंध मौजूद थी। हॉस्टल के कमरों और गलियारों में भी अव्यवस्था साफ नजर आ रही थी। कई छात्र अभी भी भय और तनाव में थे। प्रशासन ने तुरंत घोषणा की कि अगले दिन सुबह कॉलेज प्रबंधन, छात्र प्रतिनिधि और जिला प्रशासन की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में भोजन की गुणवत्ता, पेयजल व्यवस्था, हॉस्टल की सुरक्षा, चिकित्सा सुविधाओं और छात्रों की अन्य समस्याओं पर विस्तृत चर्चा होगी।
अगली सुबह कॉलेज परिसर में फिर से हलचल शुरू हुई। प्रबंधन के वरिष्ठ लोग पहुंचे और उन्होंने क्षतिग्रस्त संपत्ति का निरीक्षण किया। मीडिया के कई प्रतिनिधि बाहर खड़े थे, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने फिलहाल किसी प्रकार की बाहरी टिप्पणी देने से बचना पसंद किया। छात्रों का मूड अब पहले की तुलना में शांत था, लेकिन वे दृढ़ थे कि अब परिवर्तन जरूरी है। उनकी मांगों में साफ था कि भोजन और पानी की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने कहा कि हॉस्टल में स्वच्छता और स्वास्थ्य-सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब है, जिसे तुरंत सुधारना चाहिए।
दिन भर कॉलेज और प्रशासन के बीच कई दौर की बातचीत चली। स्वास्थ्य विभाग को भी जांच के लिए बुलाया गया। डॉक्टरों ने उन छात्रों की जांच शुरू की जिनमें पीलिया जैसे लक्षण दिखाई दे रहे थे। डॉक्टरों ने कहा कि दूषित पानी या अनहाइजीनिक भोजन से ऐसी स्थिति बन सकती है और शीघ्र सुधार की जरूरत है। भोजन तैयार करने वाली कैंटीन की भी जांच की जा रही है, ताकि पता चल सके कि समस्या कहां से शुरू हुई।
यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि लंबे समय तक नजरअंदाज की गई समस्याएं एक दिन विस्फोटक रूप ले लेती हैं। छात्रों का कहना है कि वे किसी भी अवैध गतिविधि का समर्थन नहीं करते, लेकिन जब उनकी सेहत जोखिम में आ जाए और लगातार की गई शिकायतें अनसुनी कर दी जाएं, तब आक्रोश स्वाभाविक है। प्रशासन का कहना है कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है, लेकिन छात्रों की बात गंभीरता से ली जानी चाहिए।
अब अगले कुछ दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कॉलेज प्रबंधन किस तरह कदम उठाता है। क्या भोजन की गुणवत्ता सुधारने के लिए नए अनुबंध होंगे, क्या आरओ प्लांट पूरी तरह बदला जाएगा, क्या हॉस्टल में बेहतर सफाई और स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली लागू होगी। छात्रों का कहना है कि केवल आश्वासन नहीं, जमीनी बदलाव के बाद ही वे सामान्य स्थिति में लौट सकेंगे।
