राजधानी भोपाल एक बार फिर महत्वपूर्ण प्रशासनिक दौर से गुजरने की तैयारी कर रही है। दिसंबर का पहला सप्ताह राज्य के राजनीतिक कैलेंडर में अत्यंत अहम माना जाता है क्योंकि इसी अवधि में विधानसभा का सातवां सत्र आयोजित होने जा रहा है। इस सत्र को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा रणनीति तैयार की है। इसके केंद्र में है भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 का कठोर क्रियान्वयन, जो पाँच दिनों तक राजधानी के बड़े हिस्से को पूर्णतः नियंत्रित क्षेत्र घोषित कर देता है।

यह प्रतिबंध सिर्फ किसी औपचारिक कानून लागू करने की कार्रवाई नहीं है, बल्कि शहर में संभावित हलचल, राजनीतिक विरोध, सड़कों पर भीड़ और सरकारी प्रतिष्ठानों पर दबाव को रोकने की सुरक्षात्मक कवायद है। विधानसभा सत्र के दौरान अक्सर विभिन्न संगठन अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हैं, रैलियां निकालते हैं, और धरने आयोजित करते हैं। विशेषकर राजधानी जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र में इन गतिविधियों से सुरक्षा व्यवस्था और यातायात पर भारी दबाव पड़ता है। आगामी दिनों में ऐसी स्थिति पैदा न हो, इसलिए पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने पूरा खाका पहले ही तैयार कर लिया है।
सुरक्षा का दायरा: कौन-कौन से क्षेत्रों में रहेगा पूर्ण प्रतिबंध
इस बार प्रतिबंधों का दायरा पहले की तुलना में और भी अधिक विस्तृत है। शहर के मध्य क्षेत्र से लेकर प्रशासनिक और संस्थागत इलाकों तक व्यापक सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। लिली टॉकीज से लेकर 7वीं बटालियन, एमवीएम कॉलेज ज़ोन से रोशनपुरा चौराहे तक, बांगंगा क्रॉसिंग से राजभवन तक और जिन्सी से ओल्ड जेल रोड तक एक तरह से पूरा केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र पुलिस निगरानी में रहेगा। इसके साथ ही मैदा मिल, बोर्ड ऑफिस चौराहा, झर्नेश्वर मंदिर मार्ग, पॉलीटेक्निक रोड, मुख्यमंत्री निवास के आसपास का क्षेत्र, नया विधानसभा भवन, राजभवन, 74 बंगले, प्रेस कॉम्प्लेक्स तथा विन्ध्याचल और वल्लभ भवन का इलाका प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल है।
इन क्षेत्रों का चयन सोच-समझकर किया गया है। ये वही स्थान हैं जहां सरकारी दफ्तर, संवैधानिक भवन, मंत्री आवास, प्रेस कार्यालय, सरकारी मीटिंग पॉइंट्स और विधानसभा सत्र से जुड़े मार्ग मौजूद हैं। किसी भी प्रकार का विरोध प्रदर्शन या अचानक भीड़ इकट्ठा होना इन क्षेत्रों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। इसलिए इन इलाकों को पांच दिनों के लिए संवेदनशील मानते हुए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था लागू कर दी है।
वाहनों पर रोक: विधानसभा से 5 किलोमीटर का इलाका नियंत्रित
धारा 163 के लागू होने का सबसे बड़ा असर भारी वाहनों और धीमी गति वाले परिवहन साधनों पर होगा। विधानसभा से पाँच किलोमीटर के दायरे में किसी भी ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली, डंपर, भारी मशीनरी और यहां तक कि बैलगाड़ी या टांगे जैसे धीमे परिवहन साधनों के प्रवेश पर पूर्णतः रोक रहेगी। यह प्रतिबंध इसलिए लगाया गया है ताकि किसी भी प्रकार का अवरोध, चौराहों पर ट्रैफिक जाम, मार्ग अवरोधन या भीड़ जैसी स्थिति ना बने। प्रशासन का उद्देश्य यह है कि विधानसभा सत्र के दौरान शहर की गति न रुके और संवैधानिक कार्य बाधित न हों।
शहर की प्रमुख सड़कों पर ऐसी रोक का असर स्पष्ट रूप से नजर आएगा। भारी वाहनों के रुकने से जहां सड़कों पर हलचल कम होगी, वहीं सुरक्षा बलों की तैनाती भी आसान हो जाएगी। इससे सुरक्षा कर्मियों को भीड़ नियंत्रण, मार्ग प्रबंधन और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने में सुविधा मिलेगी। इसके अलावा इस पूरे दायरे में पुलिस की विशेष टुकड़ियां, मोबाइल यूनिट्स और निगरानी दल तैनात रहेंगे जो किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत जवाब देंगे।
भीड़ पर कड़ी निगरानी: पांच या उससे अधिक लोगों के जुटने पर रोक
धारा 163 के अंतर्गत सबसे सख्त प्रावधान यह है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में पाँच या उससे अधिक लोगों का समूह बिना अनुमति इकट्ठा नहीं हो सकता। इसका मतलब यह है कि यदि शहर के किसी हिस्से में 5 लोग भी एक साथ खड़े दिखाई देते हैं और वे किसी प्रदर्शन, विरोध या रैली का हिस्सा समझे जाते हैं, तो इसे अवैध जमावड़ा माना जाएगा। यह व्यवस्था ऐसे वातावरण में लागू की गई है जहां राजनीतिक और सामाजिक वातावरण अक्सर अचानक भड़क सकता है और सरकारों या प्रशासनिक संस्थानों पर दबाव बनाने के लिए भीड़ का उपयोग किया जाता है।
इस प्रावधान के तहत किसी भी तरह के धरने, रैलियां, पैदल मार्च, नारेबाजी, पुतला दहन या सार्वजनिक सभा को पूर्णतः निषिद्ध घोषित किया गया है। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि इस अवधि में ऐसी कोई भी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग भी किया जा सकता है, हालांकि पुलिस ने शांतिपूर्ण और सम्मानजनक तरीके से नियम लागू करने का भरोसा दिया है।
हथियारों पर प्रतिबंध और सुरक्षा का कठोर रुख
धारा 163 के आदेश के तहत न केवल भीड़ और वाहनों पर रोक है बल्कि ऐसे किसी भी वस्तु को ले जाने पर भी प्रतिबंध है जिसे हथियार की श्रेणी में रखा जा सकता है। लाठी, डंडे, चाकू, पत्थर, नुकीली चीजें या किसी भी प्रकार का हथियार प्रतिबंधित क्षेत्र में ले जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। ऐसी वस्तुएं प्रदर्शन या भीड़ के दौरान हिंसा भड़काने का कारण बन सकती हैं। शहर की संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस ने यह फैसला लिया है कि किसी भी नागरिक को ऐसी वस्तु लेकर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
किसे मिलेगी छूट
शहर में लागू प्रतिबंधों के बावजूद कुछ महत्वपूर्ण सामाजिक और निजी गतिविधियों को छूट दी गई है। शादी के जुलूस और अंतिम संस्कार जैसे कार्यक्रमों पर इन प्रतिबंधों का प्रभाव नहीं पड़ेगा। प्रशासन का मानना है कि ये सामाजिक और पारिवारिक गतिविधियां हैं जो सुरक्षा को किसी प्रकार का बड़ा खतरा नहीं पहुंचातीं। हालांकि, पुलिस इन गतिविधियों पर भी दूर से नजर रखेगी ताकि वे किसी अप्रिय घटना का रूप न ले लें।
उल्लंघन पर कार्रवाई: सख्ती से लागू होंगे आदेश
यदि कोई व्यक्ति या संगठन धारा 163 के आदेशों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ बीएनएस की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई जुर्माना, गिरफ्तारी या मुकदमे के रूप में भी हो सकती है। इसलिए प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या असहयोग पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
धारा 163 का उद्देश्य: सुरक्षा बनाम अभिव्यक्ति की आज़ादी
कई लोगों के मन में प्रश्न उठ सकता है कि क्या इस तरह के प्रतिबंध नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित नहीं करते। लेकिन प्रशासन का तर्क यह है कि संवैधानिक सत्रों के दौरान व्यवस्था बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। विपक्ष, सामाजिक संगठन और विभिन्न मंचों के लोग अपनी बात रखने के लिए अन्य समय का चयन कर सकते हैं, लेकिन विधानसभा सत्र का समय संवेदनशील और महत्वपूर्ण होता है। हरिगीत प्रवाह में कहा जाता है कि सुरक्षा और व्यवस्था वह धागा है जो लोकतंत्र की पूरी बुनावट को जोड़े रखता है, और उसे मजबूत रखने की जिम्मेदारी सभी नागरिकों की है।
समापन
आगामी दिनों में भोपाल एक शांत, नियंत्रित और सुरक्षा से घिरे शहर के रूप में देखा जाएगा। धारा 163 का लागू होना प्रशासन का एक सोचा-समझा कदम है जो आने वाले विधानसभा सत्र को निर्बाध और सुरक्षित तरीके से पूरा करने के लिए आवश्यक माना जा रहा है। नागरिकों से भी उम्मीद है कि वे इन प्रतिबंधों का पालन करेंगे, जिससे शहर में शांति, सुरक्षा और व्यवस्था बनी रहे।
