इथियोपिया के हालिया ज्वालामुखी विस्फोट ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है, लेकिन इसका असर केवल अफ्रीका तक सीमित नहीं रहा। इस विस्फोट की राख में मौजूद सूक्ष्म और बारीक कण हवाओं के माध्यम से दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र तक पहुंच रहे हैं, जिससे वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट आ रही है। यह राख, जिसे वैज्ञानिक माइक्रो पार्टिकल्स कहते हैं, सामान्य प्रदूषण से कहीं अधिक खतरनाक है, क्योंकि यह फेफड़ों तक आसानी से पहुंच सकता है और सांस लेने में कठिनाई उत्पन्न कर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना हमारे स्वास्थ्य के लिए तत्काल सतर्कता की आवश्यकता दर्शाती है। हवा में मौजूद धूल और राख के सूक्ष्म कण आंखों, गले और फेफड़ों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके चलते अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों वाले लोग विशेष रूप से जोखिम में हैं।
किसे सबसे ज्यादा खतरा है
डॉक्टर और वायु गुणवत्ता विशेषज्ञ बताते हैं कि विशेषकर बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से फेफड़ों या हृदय की बीमारियों से पीड़ित लोग इस समय अधिक संवेदनशील हैं। उनके लिए खुले में रहने और प्रदूषित वायु में लंबी अवधि तक रहने से बचना अत्यंत जरूरी है।
सामान्य नागरिकों को भी मास्क पहनने, घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने, एयर प्यूरीफायर का उपयोग करने और बाहर जाते समय आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
डॉक्टरों की सलाह और सुरक्षा उपाय
फेमस पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. विकास ने सलाह दी है कि लोग प्रदूषण से बचाव के लिए एन-95 या पीएम 2.5 मास्क का उपयोग करें। उन्होंने यह भी बताया कि घर के अंदर रहकर धूल को कम करने के लिए एयर प्यूरीफायर, नम कपड़े से सफाई और ग्रीन प्लांट्स का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों को बाहर खेलने से रोकें और बुजुर्गों को विशेष रूप से धूप और हवा में लंबे समय तक रहने से बचाएं। पानी अधिक मात्रा में पिएं और स्वस्थ भोजन का सेवन जारी रखें।
प्रदूषण की गंभीरता और AQI
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों में AQI यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार अस्वस्थ स्तर पर पहुँच चुका है। विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि लोगों ने सावधानी नहीं बरती तो सांस लेने में गंभीर कठिनाई और फेफड़ों की समस्याएँ बढ़ सकती हैं।
वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकारी एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं और प्रदूषण फैलाने वाले कारकों को नियंत्रित करने के लिए उपाय कर रही हैं।
वैश्विक प्रभाव और जलवायु पर असर
इस ज्वालामुखी विस्फोट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाएं केवल स्थानीय स्तर पर ही असर नहीं डालतीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह की घटनाओं के दौरान सामाजिक जागरूकता और तत्काल सुरक्षा उपाय अपनाना बहुत जरूरी है।
प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए घर के अंदर रहना, हवा को शुद्ध रखना और स्वास्थ्य पर नजर रखना ही सबसे प्रभावी उपाय हैं।
