मध्यप्रदेश सरकार की हालिया कैबिनेट बैठक ने न केवल शासन के प्रशासनिक दृष्टिकोण को दर्शाया, बल्कि मानव संवेदनाओं की गहराई को भी व्यक्त किया। राज्य के उन बहादुर पुलिस कर्मियों के लिए, जो नक्सल विरोधी अभियानों में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए वीरगति को प्राप्त होते हैं, सरकार का निर्णय यह बताता है कि शहीदों का सम्मान केवल शब्दों तक सीमित नहीं है। इसी संदर्भ में मंगलवार को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में एक ऐसा फैसला लिया गया जिसने पूरे प्रदेश को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया। यह फैसला विशेष सशस्त्र बल के निरीक्षक आशीष शर्मा के परिवार से जुड़ा था, जिन्हें कुछ दिन पहले बालाघाट क्षेत्र में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के दौरान अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

बैठक का वातावरण और शुरुआत
मंत्रालय के सभागार में जब मंत्रि-परिषद की निर्धारित बैठक प्रारंभ हुई, तो उसका स्वरूप सामान्य बैठकों की तरह नहीं था। वातावरण गंभीर भी था और भावनात्मक भी। बैठक वंदे मातरम गान के साथ प्रारंभ हुई, जिसने उपस्थित सभी सदस्यों में देशभक्ति का एक विशेष भाव जगाया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक का संचालन एक शांत स्वर में शुरू किया, जिस स्वर में शहीदों के प्रति सम्मान और उनके परिवारों के प्रति संवेदना स्पष्ट झलक रही थी।
उन्होंने अपने आरंभिक वक्तव्य में कहा कि राज्य के सुरक्षा बल सिर्फ कानून व्यवस्था को संभालने वाले कर्मचारी नहीं बल्कि प्रदेश की सुरक्षा–रेखा हैं। और जब इस सुरक्षा–रेखा का कोई हिस्सा अपने प्राणों की आहुति देता है, तो यह केवल परिवार पर नहीं बल्कि पूरे प्रदेश पर आघात होता है।
आशीष शर्मा की शहादत की पृष्ठभूमि
19 नवंबर 2025 की सुबह बालाघाट क्षेत्र में हॉक फोर्स के एक विशेष अभियान के दौरान नक्सलियों और पुलिस बल के बीच तीव्र मुठभेड़ हुई। यह अभियान राज्य में सक्रिय नक्सली प्रभाव को कम करने के लिए चल रही लंबी लड़ाई का हिस्सा था। इस मुठभेड़ में निरीक्षक आशीष शर्मा बुरी तरह घायल हुए और बाद में वीरगति को प्राप्त हुए। उनके बलिदान की खबर प्रदेशभर में तेजी से फैल गई। उनके साहस, नेतृत्व और निष्ठा की कहानियां पहले से ही उनके साथियों के बीच प्रसिद्ध थीं, लेकिन उनकी शहादत ने उन्हें प्रदेश के हर नागरिक का नायक बना दिया।
आशीष शर्मा के जीवन का परिचय
आशीष शर्मा का पूरा जीवन साहस और कर्तव्य की मिसाल था। हॉक फोर्स में उनकी भूमिका हमेशा अग्रिम पंक्ति की रहती थी। वह न केवल अपनी प्रोफेशनल क्षमता के लिए जाने जाते थे बल्कि अपने साथियों के लिए एक प्रेरणा भी थे। वह दो बार राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित हो चुके थे, जो किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। 2021 में उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा आंतरिक सेवा पदक मिला था, जबकि 2023 में उन्हें दुर्गम सेवा पदक और आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया था। उनका यह रिकॉर्ड बताता है कि वे कितने योग्य, साहसी और समर्पित अधिकारी थे।
उनकी कार्यशैली में सख़्त अनुशासन और मानवीय संवेदनाओं का संतुलन देखने को मिलता था। उनके सहकर्मियों ने कई बार बताया कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी वे शांत रहते थे और अपनी टीम को सुरक्षित दिशा में ले जाते थे। उनकी नेतृत्व क्षमता ने कई अभियानों को सफल बनाया था।
मंत्रि-परिषद के निर्णय और उसका महत्व
मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उनके परिजन को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई। यह आर्थिक सहायता केवल एक राशि नहीं बल्कि राज्य सरकार का उनके बलिदान को नमन है। यह राशि परिवार की आर्थिक स्थिरता में सहायता करेगी और यह संदेश भी देगी कि शहीद का परिवार कभी अकेला नहीं छोड़ा जाता।
इसके साथ ही एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। उनके छोटे भाई अंकित शर्मा को जिला पुलिस बल में उप निरीक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने की स्वीकृति दी गई। यह नियुक्ति न केवल परिवार को एक स्थायी आधार प्रदान करेगी, बल्कि यह कदम शहीद की विरासत को एक नई दिशा में आगे बढ़ाने का अवसर भी देगा। आने वाले वर्षों में अंकित शर्मा इस विरासत को अपने कार्य के माध्यम से आगे बढ़ाएंगे।
कैबिनेट की चर्चाएँ और प्रतिक्रियाएँ
बैठक में मंत्रियों ने आशीष शर्मा के योगदान पर अपने विचार रखे। कई मंत्रियों ने कहा कि यह राज्य का सौभाग्य है कि उसके पास ऐसे बहादुर पुलिसकर्मी हैं जो कठिनतम परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते। बैठक के दौरान यह भी चर्चा हुई कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्य करने वाले सुरक्षा बलों के लिए और अधिक संसाधन जुटाए जाएँ। मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को यह भी निर्देश दिया कि नक्सल क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के मनोबल को और मजबूत करने के लिए योजनाएँ तैयार की जाएँ।
शहीदों के परिवारों के लिए नई दृष्टि
यह निर्णय केवल एक परिवार की सहायता का विषय नहीं था, बल्कि इससे यह भी प्रतीत होता है कि सरकार अब शहीदों के परिवारों को सम्मान देने के लिए अधिक गंभीर और संवेदनशील हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने कई बार शहीद परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणाएँ की हैं, पर यह पहली बार है जब सहायता के साथ स्थायी नियुक्ति को भी समान महत्व दिया गया है।
प्रदेश में प्रतिक्रिया
राज्य भर में लोगों ने इस निर्णय का स्वागत किया। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय सभाओं तक, हर जगह यह चर्चा थी कि सरकार ने एक सही और मानवीय कदम उठाया है। लोगों ने कहा कि यह निर्णय आने वाले समय में अन्य शहीद परिवारों के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बनेगा। पुलिस विभाग के भीतर भी इस निर्णय ने गहरी संतुष्टि उत्पन्न की है।
