इंदौर शहर में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में एक गंभीर मामला सामने आया है। पल्हर नगर स्थित एक मकान से 600 लीटर वनस्पति तेल, घी और विभिन्न प्रकार के खाद्य एसेंस जब्त किए गए हैं। अधिकारियों ने पाया कि मिलावटी घी को लोकप्रिय ब्रांड जैसे सांची, अमूल, नोवा और मालवा के नाम से बेचा जा रहा था। इस मामले में गिरिराज गुप्ता के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
घटना की जानकारी के अनुसार, खाद्य औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने 30 अक्टूबर को इस मकान में औचक जांच की। जांच में यह खुलासा हुआ कि गिरिराज गुप्ता मल्हारगंज में प्रभुश्री ट्रेडर्स नामक दुकान चला रहा था और अपने घर से ही मिलावटी घी और वनस्पति तेल तैयार कर उसे बाजार में भेज रहा था। मौके से सांची, अमूल, नोवा और मालवा ब्रांड के रैपर और आउटर कवर भी बरामद किए गए।

मिलावटी घी की मात्रा और जाँच रिपोर्ट
जाँच के दौरान मौके से कुल 29 डिब्बे वनस्पति तेल, 13 डिब्बे अन्य तेल, तीन डिब्बे घी, पांच बोतल एसेंस और 350 रैपर बरामद हुए। ये सभी नमूने खाद्य सुरक्षा मानकों पर अमानक पाए गए। अधिकारियों ने बताया कि आम जनता को धोखा देने के मकसद से इन ब्रांडों के नाम का उपयोग किया जा रहा था। एरोड्रम थाना क्षेत्र में विभिन्न धाराओं के अंतर्गत FIR दर्ज करवाई गई। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि मिलावटखोरी के खिलाफ कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में सतर्कता और निरंतर निगरानी आवश्यक है। मिलावटी घी केवल एक उत्पाद की समस्या नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य और विश्वास के साथ धोखाधड़ी का मामला है।
बिना लाइसेंस चल रही मसाला फैक्ट्री का खुलासा
इसी सप्ताह, खाद्य औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने उद्योग नगर स्थित सहज एंटरप्राइजेस पर औचक निरीक्षण किया। वहां प्रतिष्ठान प्रभारी युवराज राजानी मिले। निरीक्षण में पाया गया कि बिना खाद्य लाइसेंस के मसालों का उत्पादन किया जा रहा था। फैक्ट्री की परिस्थितियां अस्वच्छ थीं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों के उपयोग के संकेत मिले।
जाँच में प्योर इंदौरी ब्रांड के रेड चिली पाउडर, कोरिएंडर पाउडर, टर्मरिक पाउडर, हींग युक्त जीरावन और राम बंधु मैंगो पिकल के नमूने लिए गए। सभी नमूने राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल भेजे गए। परिसर को तुरंत सील कर दिया गया और बिक्री पर रोक लगा दी गई। अधिकारियों का कहना है कि केमिकल का इस्तेमाल मसालों का रंग आकर्षक दिखाने के लिए किया जा रहा था, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा और प्रशासन की भूमिका
इंदौर में लगातार मिलावटी उत्पादों की पकड़ प्रशासन की सक्रियता को दर्शाती है। हालांकि, यह घटना यह भी स्पष्ट करती है कि उपभोक्ताओं को सतर्क रहना चाहिए। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर नजर रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि मिलावटखोरी की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और भविष्य में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए खाद्य सुरक्षा विभाग, पुलिस और संबंधित अधिकारी मिलकर नियमित निरीक्षण करेंगे और ऐसे अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
मिलावटखोरी का सामाजिक और स्वास्थ्य प्रभाव
मिलावटी घी और मसालों की बिक्री केवल आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी पैदा करती है। ऐसे उत्पादों के सेवन से हृदय रोग, पाचन संबंधी समस्याएं और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, यह उपभोक्ताओं के विश्वास को भी चोट पहुंचाता है।
सामाजिक दृष्टि से, मिलावटखोरी से बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा होती है। ईमानदार व्यापारी और उत्पादक बाजार में टिक नहीं पाते, जिससे आर्थिक व्यवस्था प्रभावित होती है। प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि इस प्रकार की अवैध गतिविधियों को रोका जाए।
प्रशासन की कार्रवाई और भविष्य की रणनीति
खाद्य औषधि प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मिलावटखोरी के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। FIR दर्ज होने के साथ-साथ आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है। भविष्य में प्रशासन नियमित निरीक्षण, औचक जाँच और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर ऐसे अपराधों पर कड़ी नजर रखेगा।
इस प्रकार की घटनाओं के खिलाफ जागरूकता फैलाना और उपभोक्ताओं को सचेत करना भी महत्वपूर्ण है। जनता को चाहिए कि वे केवल प्रमाणित और लाइसेंस प्राप्त उत्पाद ही खरीदें।
