सीहोर जिले में भू-अर्जन की प्रगति को लेकर प्रशासनिक अमले की धीमी गति ने कलेक्टर बालागुरु की नाराजगी को जन्म दिया। सोमवार को आयोजित समय सीमा बैठक में बुदनी क्षेत्र के राजस्व अमले द्वारा लगातार वही रटा रटाया जवाब देने पर कलेक्टर ने सख्त फटकार लगाई। अधिकारियों को चेतावनी दी गई कि यदि यही रवैया जारी रहा तो कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

कलेक्टर बालागुरु लंबे समय से एनएचएआई और रेलवे के निर्माण कार्यों के लिए भूमि आवंटन और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दे रहे हैं। बुदनी के अधिकारी हर बार सात दिन के भीतर कार्य पूरा करने का आश्वासन देते रहे हैं, लेकिन असल कार्य में विलंब देखने को मिला। इसी कारण बैठक के दौरान कलेक्टर ने तहसीलदारों को जमकर फटकार लगाई और सत लहजे में भूमि अधिग्रहण से संबंधित मामलों का त्वरित निपटारा करने के निर्देश दिए।
समय सीमा बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रेलवे के अधिकारियों को भी जोड़ा गया था। कलेक्टर ने उन्हें भी कार्य में ढिलाई बरतने पर कड़ा निर्देश देते हुए कहा कि भूमि के कब्जे तुरंत खाली कराए जाएं और निर्माण कार्य आरंभ हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जमीन खाली करवाई गई और निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो किसान पुनः कब्जा कर सकते हैं, जो परियोजना के लिए बाधक होगा।
बैठक में अपर कलेक्टर वृंदावन सिंह, संयुक्त कलेक्टर वंदना राजपूत, बुदनी एसडीएम तन्मय वर्मा और स्वाति मिश्रा भी उपस्थित थे। उन्होंने सभी अधिकारियों से समय सीमा के भीतर शत-प्रतिशत भू-अर्जन कार्य पूरा करने का आश्वासन लिया। कलेक्टर ने राजस्व अमले की जिम्मेदारी को दोहराया कि केवल औपचारिकताएं पूरी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि वास्तविक कार्य निष्पादन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
कलेक्टर बालागुरु ने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ड्राफ्ट रोल की तैयारी समय सीमा में पूरी हो और सभी बीएलओ त्रुटियों को तुरंत सुधारें। उनका स्पष्ट संदेश था कि मतदाता सूची लोकतंत्र की आधारशिला है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से फील्ड में नियमित मॉनिटरिंग करने और समय सीमा के भीतर पूर्णता सुनिश्चित करने को कहा।
इसके अतिरिक्त कलेक्टर ने जिले में खाद वितरण की व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कहा कि किसानों को किसी भी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कृषि, सहकारिता और मार्कफेड अधिकारियों को स्टॉक की उपलब्धता, वितरण प्रक्रिया और मांग के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करने के आदेश दिए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि पात्रता पर्ची प्राप्त करने वाले हितग्राहियों की ई-केवायसी प्रक्रिया प्राथमिकता से पूरी की जाए ताकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ निर्बाध रूप से ले सकें। अपात्र व्यक्तियों के नाम सूची से हटाने की भी कड़ी हिदायत दी गई, ताकि वास्तविक लाभार्थियों को नुकसान न पहुंचे।
सीहोर में कलेक्टर की यह बैठक प्रशासनिक पारदर्शिता और जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अधिकारियों की सतर्कता और समयबद्ध कार्यान्वयन से न केवल रेलवे और एनएचएआई के निर्माण कार्य सुचारू होंगे, बल्कि किसानों को उचित मुआवजा और प्रशासनिक समस्याओं से मुक्ति भी मिलेगी।
कलेक्टर के आदेशों के अनुसार, अब जिले में भू-अर्जन और सरकारी योजनाओं की क्रियान्वयन प्रक्रिया में तेज़ी आएगी। अधिकारी अब सिर्फ औपचारिकताएं पूरी करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि कार्य को समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए जवाबदेह होंगे। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार होगा और जनता के विश्वास में वृद्धि होगी।
