मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। तामिया विकासखंड के कुर्सीढाना गांव में स्थित प्रतिमा मेडिकल स्टोर ने नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए बिना डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं का वितरण शुरू कर दिया है। मेडिकल स्टोर में मरीजों को फर्श पर लिटाकर इंजेक्शन लगाने की घटनाएँ भी सामने आई हैं, जो ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली की गंभीर कमजोरी को उजागर करती हैं।

चेतावनी के बावजूद लापरवाही
हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इस मेडिकल स्टोर को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्हें निर्देशित किया गया था कि बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन किसी भी दवा का वितरण या चिकित्सा गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। बावजूद इसके, मेडिकल स्टोर संचालक ने इस चेतावनी को नज़रअंदाज किया और दवाओं का वितरण जारी रखा। कफ सिरप, इंजेक्शन और अन्य दवाएं बिना किसी डर के प्रदान की जा रही हैं।
जागरूकता की कमी और आदिवासी समुदाय का खतरा
इस इलाके के आदिवासी परिवार इस खतरे को पूरी तरह से समझ नहीं पा रहे हैं। जागरूकता की कमी के कारण गलत दवाओं और चिकित्सा प्रक्रियाओं से मरीजों की स्थिति और बिगड़ती जा रही है। जब मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है, तब उन्हें मुश्किल से अस्पताल ले जाना पड़ता है। यह स्थिति ग्रामीण स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है।
मेडिकल संचालक की जिम्मेदारी और लापरवाही
बताया जा रहा है कि लंबे समय से इस मेडिकल स्टोर संचालक द्वारा ग्रामीणों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। संचालक के पास प्रैक्टिस की कोई वैध डिग्री नहीं है, बावजूद इसके वह बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाओं का वितरण और इंजेक्शन लगाने जैसी गतिविधियाँ कर रहा है। यह स्थिति न केवल कानूनी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आदिवासी और गरीब परिवारों के जीवन के लिए गंभीर खतरा भी उत्पन्न करती है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और कहा कि इस तरह की लापरवाही को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि इस मेडिकल स्टोर के खिलाफ कई शिकायतें की गई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीण स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह स्थिति अत्यंत खतरनाक है।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका और कानूनी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग को इस मामले की गहन समीक्षा करनी होगी और सुनिश्चित करना होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की लापरवाही भविष्य में न हो। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक मेडिकल स्टोर नियमों के अनुरूप कार्य करे, और किसी भी प्रकार की अनाधिकृत चिकित्सा गतिविधि पर तत्काल रोक लगाई जाए।
निष्कर्ष
छिंदवाड़ा के कुर्सीढाना में सामने आया यह मामला ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली की कमजोरियों और जागरूकता की कमी को उजागर करता है। यह घटना न केवल सरकारी नियमों और कानून का उल्लंघन है, बल्कि गरीब और आदिवासी परिवारों की जान के लिए भी खतरा पैदा करती है। प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय समाज की जिम्मेदारी बनती है कि इस तरह की लापरवाही को तुरंत रोका जाए और ग्रामीणों में स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए।
