मध्य प्रदेश इस बार एक ऐसा अध्याय लिखने जा रहा है जो न केवल प्रदेश के सांस्कृतिक इतिहास को समृद्ध करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक नई दिशा तय करेगा। 1 दिसंबर 2025 को पूरे राज्य में एक साथ श्रीमद्भगवद्गीता के पंद्रहवें अध्याय का पाठ आयोजित किया जाएगा। यह महज एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन, ज्ञान और आध्यात्मिक चिंतन की वह व्यापक धारा है जिसे राज्य सरकार जन-जन तक पहुंचाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। गीता जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले इस दिव्य कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं तैयारी की निगरानी कर रहे हैं, ताकि प्रदेश के हर विकासखंड, हर जिले और हर संभागीय मुख्यालय में लोगों की सहभागिता सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उन्होंने जिला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उनके साथ मुख्य सचिव अनुराग जैन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। बैठक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि गीता जयंती के कार्यक्रम केवल औपचारिक न हों, बल्कि जन-सामान्य के हृदय को छूने वाले, मार्गदर्शक और प्रेरक साबित हों। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक संपन्नता और आध्यात्मिक चेतना को प्रदर्शित करने का अवसर है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर कमी नहीं रहनी चाहिए।
गीता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की पहल
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रीमद्भगवद्गीता के विभिन्न अध्यायों की प्रतियां संस्कृत और हिंदी दोनों भाषाओं में स्कूलों, कॉलेजों और आम नागरिकों को उपलब्ध कराई जाएं। उनका मानना है कि गीता की शिक्षाएं केवल धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि जीवन के जटिल प्रश्नों का समाधान हैं। इसलिए अधिक से अधिक लोग इसका अध्ययन करें। इसके साथ ही राज्यभर में गीता पर आधारित प्रतियोगिताएं, क्विज़ और ज्ञान-सत्र आयोजित करने की भी योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री का उद्देश्य है कि लोग गीता को केवल उत्सव के रूप में न मनाएं, बल्कि उसके जीवनमूल्यों को अपनाएं और उसे अपने व्यवहार में उतारें।
ऑनलाइन गीता ज्ञान प्रतियोगिता
राज्य सरकार ने गीता महोत्सव के अंतर्गत ऑनलाइन गीता ज्ञान प्रतियोगिता भी शुरू की है। प्रतिभागी इसमें आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण कर सकते हैं। तीन अलग-अलग श्रेणियों में प्रतियोगिता होगी, जिनके लिए अलग-अलग पुरस्कार रखे गए हैं। इन पुरस्कारों का वितरण 26 जनवरी 2026 को किया जाएगा, ताकि प्रतिभागियों को प्रोत्साहन मिले और अधिक संख्या में लोग इस अभियान का हिस्सा बनें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जिला प्रशासन इस प्रतियोगिता का व्यापक प्रचार करे और जितने अधिक नागरिक जुड़ सकें, उन्हें जोड़ने का प्रयास होना चाहिए। यह प्रतियोगिता न केवल जानकारी बढ़ाएगी, बल्कि युवाओं में गीता के महत्व के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगी।
पूरे राज्य में होगा एक साथ पाठ
1 दिसंबर का दिन पूरे प्रदेश में आध्यात्मिक उत्सव का दिन होगा। सभी जिला मुख्यालयों, विकासखंडों और संभागीय मुख्यालयों पर श्रीमद्भगवद्गीता के पंद्रहवें अध्याय का पाठ होगा। यह पाठ केवल धार्मिक भावनाओं को जागृत करने के लिए नहीं, बल्कि मानवता, कर्तव्य और सदाचार के संदेशों को फैलाने के लिए आयोजित किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस पाठ से समाज में सकारात्मक विचारों का प्रसार होगा, लोगों की सोच में नई ऊर्जा आएगी और जीवन जीने की प्रेरणा बढ़ेगी।
प्रदेश में गीता पाठ का आयोजन वीर भारत न्यास के सहयोग से हो रहा है। न्यास की ओर से प्रतियोगिताएं और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें प्रदेश के युवा बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। यह देखकर स्पष्ट होता है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान का सुंदर संगम प्रदेश में स्थापित हो रहा है।
गीता जयंती का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, यह भारतीय सभ्यता का दर्पण है। इसके अध्यायों में निहित ज्ञान मानव जीवन के हर पहलू का मार्गदर्शन करता है। मध्य प्रदेश सरकार का यह प्रयास कि पूरा राज्य एक साथ गीता पाठ करे, एक तरह से सामाजिक एकता और मानसिक सामंजस्य की दिशा में बड़ा कदम है। गीता के संदेश केवल व्यक्तिगत विकास के नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन के सूत्र भी प्रदान करते हैं। जब हजारों लोग एक ही समय पर एक ही अध्याय का पाठ करेंगे, तब प्रदेश में अध्यात्म की एक लहर दौड़ेगी, जो जनमानस को जोड़ने का कार्य करेगी।
प्रशासनिक तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या सुरक्षा-संबंधी चुनौती न आए। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में जिम्मेदार अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि कार्यक्रम पूरी अनुशासित व्यवस्था में हो। पुलिस और प्रशासन दोनों मिलकर सभी स्थानों पर आवश्यक प्रबंध करें।
यह आयोजन राज्य की छवि को और मजबूत करेगा, इसलिए व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की कमी की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
समापन दृश्य
1 दिसंबर का गीता पाठ केवल एक दिवस का आयोजन नहीं होगा, बल्कि यह प्रदेशभर में एक आध्यात्मिक चेतना का आरंभिक स्वरूप है। मुख्यमंत्री का यह संदेश कि गीता के अध्याय केवल पढ़े नहीं, बल्कि उन्हें जीवन में उतारा जाए, लोगों के भीतर सकारात्मकता और संतुलन के बीज बो रहा है। यह आयोजन आने वाले वर्षों में एक परंपरा का स्वरूप ले सकता है, जो मध्य प्रदेश को आध्यात्मिक दृष्टि से नई Identity प्रदान करेगा।
