मध्य प्रदेश का छोटा लेकिन सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जिला उमरिया इस वर्ष दिसंबर की शुरुआत में राष्ट्रीय स्तर के एक ऐसे आयोजन की मेजबानी करने जा रहा है, जिसने वहां के आम नागरिकों से लेकर स्थानीय प्रशासन तक में नई ऊर्जा भर दी है। यह आयोजन है 69वीं राष्ट्रीय शालेय 14 वर्ष फुटबॉल प्रतियोगिता, जिसका इंतजार स्थानीय खेल प्रेमी लंबे समय से कर रहे थे।

उमरिया जिला भले ही आकार में बड़ा न हो, लेकिन यहां का प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक गहराई और युवाओं में खेल के प्रति उत्साह हमेशा चर्चा में रहा है। इस बार अवसर मिला है देश के 33 राज्यों के खिलाड़ियों को एक मंच पर लाने का। 1 दिसंबर से 6 दिसंबर तक चलने वाली इस प्रतियोगिता ने शहर को खेल उत्सव की रंगत से भर दिया है।
बड़ी संख्या में खिलाड़ी और अधिकारी
जिले में आने वाले खिलाड़ियों और अधिकारियों की संख्या किसी बड़े शहर के आयोजन की तरह है। देश के अलग-अलग राज्यों से 693 खिलाड़ी यहां पहुंचेंगे। उनके साथ 40 आधिकारिक प्रतिनिधि और लगभग 60 स्थानीय अधिकारी भी इस आयोजन के संचालन में शामिल रहेंगे। शहर की सड़कों, चौराहों और मैदानों ने जैसे स्वागत का नया रूप धारण कर लिया है। स्थानीय लोगों के लिए यह बेहद गर्व का मौका है कि उनके जिले को पहली बार राष्ट्रीय जिम्मेदारी सौंपी गई है।
तैयारियों की समीक्षा और प्रशासनिक दृष्टिकोण
उमरिया कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन की अध्यक्षता में कई महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया गया, जिनमें प्रतियोगिता को सफल, सुरक्षित और यादगार बनाने की रणनीति तैयार की गई। इन बैठकों में जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी, विद्यालयों के प्राचार्य, पूर्व जनप्रतिनिधि और खेल विभाग के कर्मचारी शामिल रहे। प्रत्येक बैठक में व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई और अलग-अलग विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
कलेक्टर जैन ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि आयोजन के प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जाए। शहर के मुख्य चौराहों पर होर्डिंग लगाए गए, सड़क किनारे फ्लैक्स लगाए गए और पूरे जिले में पेम्फलेट बांटकर लोगों को इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के प्रति जागरूक किया गया। यहां तक कि विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी इस फुटबॉल प्रतियोगिता का प्रमोशन करने को कहा गया, ताकि इसे व्यापक राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।
स्वास्थ्य और सुरक्षा पर विशेष जोर
किसी भी राष्ट्रीय आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। इसे ध्यान में रखते हुए कलेक्टर जैन ने चारों मैदानों पर एंबुलेंस और चिकित्सकीय टीम की अनिवार्य तैनाती के निर्देश दिए हैं। स्ट्रेचर, प्राथमिक उपचार किट और मेडिकल कर्मचारी पूरे आयोजन के दौरान उपलब्ध रहेंगे।
शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को पानी की गुणवत्ता की जांच का जिम्मा दिया गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग को खिलाड़ियों और अधिकारियों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। मैदानों और आवासीय स्थलों की साफ-सफाई के लिए अलग टीमें नियुक्त की गई हैं, जो आयोजन के दौरान निरंतर काम करेंगी।
चार अलग-अलग मैदानों पर होंगे मुकाबले
प्रतियोगिता के सभी मुकाबले जिले के चार प्रमुख मैदानों पर आयोजित किए जाएंगे। इनमें मुख्य स्टेडियम, कृष्ण ताल मैदान, पुलिस ट्रेनिंग स्कूल ग्राउंड और शासकीय उमावि बालक चंदिया मैदान शामिल हैं। इन सभी मैदानों को पिछले कई दिनों से बेहतर बनाया जा रहा है। घास की ऊंचाई को मानकों के अनुसार काटा गया है, गोल पोस्ट की मजबूती जांची गई है और दर्शकों के बैठने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
खिलाड़ियों के ठहरने और परिवहन की व्यवस्था
आयोजन में आने वाले सैकड़ों खिलाड़ियों और अधिकारियों के आवास की जिम्मेदारी भी प्रशासन ने पूरी सावधानी से निभाई है। खिलाड़ियों को खेल परिसर भरौला, होटल सरई, सूर्या होटल, कृष्णा गार्डन और कृष्णा पैलेस में ठहराया गया है। प्रत्येक आवास स्थल के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
परिवहन के लिए 10 बसें और 8 जीप की व्यवस्था की गई है, जो खिलाड़ियों को मैदानों और आवास स्थानों के बीच ले जाएंगी। यह भी ध्यान रखा गया है कि किसी भी मैच या कार्यक्रम में खिलाड़ियों के देर से पहुंचने की स्थिति न बने।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मिलेगा विशेष रंग
उमरिया सिर्फ खेल तक ही सीमित नहीं है, यहां की सांस्कृतिक विरासत भी बेहद समृद्ध है। इसी को देखते हुए आयोजन के दौरान कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। आरसी स्कूल उमरिया और सेंट्रल एकेडमी के छात्र विभिन्न राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा में मंच पर प्रस्तुतियां देंगे।
बिजहरिया लोक नृत्य दल के कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया है, जो 3 और 4 दिसंबर की शामों को होने वाले कैंप फायर कार्यक्रम में प्रस्तुति देंगे। इससे आने वाले खिलाड़ियों को न सिर्फ खेल का अनुभव मिलेगा बल्कि स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने का अवसर भी मिलेगा।
व्यापारियों और स्थानीय लोगों का सहयोग
आयोजन को सफल बनाने में सिर्फ प्रशासन ही नहीं, बल्कि शहर के व्यापारियों और आम नागरिकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अनेक व्यापारिक संगठनों ने भोजन, पानी, झंडे, खेल सामग्री और सजावट में सहयोग करने की इच्छा जताई है। स्थानीय युवाओं ने स्वयंसेवक के रूप में आगे बढ़कर मैदानों और आवास स्थलों पर कार्यभार संभाला है।
पत्रकारवार्ता में साझा हुई पूरी रूपरेखा
आयोजन की सरकारी रूपरेखा को जनता तक पहुंचाने के लिए जिला शिक्षा विभाग ने कृष्णा गार्डन में एक पत्रकारवार्ता का आयोजन किया। इसमें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह आयोजन उमरिया के लिए ऐतिहासिक अवसर है और इससे जिला खेल मानचित्र पर नई पहचान स्थापित करेगा।
उमरिया में उत्साह का माहौल
जैसे-जैसे आयोजन के दिन करीब आ रहे हैं, उमरिया के आम लोग भी दिन गिन रहे हैं। बच्चों में उत्साह है कि उन्हें पहली बार इतने बड़े स्तर की फुटबॉल प्रतियोगिता देखने का मौका मिलेगा। दुकानों पर फुटबॉल से जुड़े पोस्टर, झंडे और स्टिकर्स बिक रहे हैं। कई स्कूल बच्चों को लाइव मैच दिखाने की तैयारी कर रहे हैं।
उमरिया के लिए यह सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक अवसर है कि वह राष्ट्रीय खेल आयोजनों की कतार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सके। यदि यह प्रतियोगिता सफल रहती है, तो भविष्य में उमरिया अन्य राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय आयोजनों की मेजबानी करने में सक्षम साबित हो सकता है।
उमरिया के भविष्य के लिए बड़ा कदम
यह आयोजन प्रशासन की क्षमता, जिले के बुनियादी ढांचे और नागरिकों की सहभागिता की परीक्षा भी है। यदि पूरा कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो जाता है, तो यह उमरिया के लिए विकास का एक बड़ा द्वार साबित होगा।
इस आयोजन के सफल होने से जिले को न केवल खेल पर्यटन का फायदा मिलेगा बल्कि यहां के युवाओं में खेल के प्रति रुचि भी बढ़ेगी। यह आयोजन उमरिया के लिए प्रेरणा बनेगा कि छोटे शहर भी बड़े सपने देख सकते हैं और उन्हें पूरा करने का हौसला रखते हैं।
