भारतीय क्रिकेट पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदलावों और नई चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। इस दौर में कुछ ऐसे खिलाड़ी हैं जो अपनी मौजूदगी मात्र से टीम का स्वरूप, मानसिकता और प्रदर्शन बदल देते हैं। रोहित शर्मा और विराट कोहली ऐसे ही दो नाम हैं जिनकी उपस्थिति भारतीय क्रिकेट के किसी भी फॉर्मेट में एक स्थिरता, परिपक्वता और मजबूत नेतृत्व प्रदान करती है। हाल ही में भारत के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने इन दोनों दिग्गज क्रिकेटरों को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिसने आने वाले वर्षों के लिए अनेक संभावनाओं को जन्म दिया है।

मोर्केल ने कहा कि जब रोहित और कोहली टीम में होते हैं तो ड्रेसिंग रूम का माहौल ही बदल जाता है। उनकी बातों में सिर्फ प्रशंसा ही नहीं, बल्कि अनुभव की वह गहराई भी झलकती है जो दुनिया की हर बड़ी टीम महान खिलाड़ियों के संदर्भ में महसूस करती है। मोर्केल उनके अनुभव को अमूल्य कहते हैं और यह भी स्वीकार करते हैं कि उनकी उपस्थिति बाकी खिलाड़ियों को न सिर्फ प्रेरित करती है, बल्कि टीम की एकजुटता को भी मजबूत करती है।
टीम के माहौल पर रोहित और कोहली का प्रभाव
मोर्केल के अनुसार अनुभवी खिलाड़ियों का महत्व केवल मैदान पर उनके प्रदर्शन तक सीमित नहीं होता, बल्कि उससे आगे बढ़कर यह उस अदृश्य शक्ति तक पहुंचता है जो पूरी टीम को एक लक्ष्य की तरह जोड़कर रखती है। रोहित शर्मा और विराट कोहली दोनों दुनिया के दिग्गज बल्लेबाजों में शामिल हैं, लेकिन उनसे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वे टीम में एक सकारात्मक मानसिकता लेकर आते हैं।
मोर्केल बताते हैं कि जब दोनों खिलाड़ी टीम मीटिंग में होते हैं, रणनीतिक चर्चाओं में शामिल होते हैं या नेट्स पर अभ्यास करते हैं, तो युवा खिलाड़ियों को यह सीखने को मिलता है कि दबाव के समय कैसे धैर्य रखा जाए और बड़े मैचों में कैसे मानसिक रूप से मजबूत रहा जाए। इन दिग्गजों ने अपने करियर में विश्व क्रिकेट के लगभग हर बड़े मंच पर खेला है और उनकी मानसिक मजबूती टीम को संकट के समय टिकाए रखने की क्षमता देती है।
निराशाजनक दौर के बाद टीम का पुनर्गठन
हाल ही में भारतीय टीम ने दो सप्ताह का ऐसा दौर देखा जहां टीम प्रदर्शन के उच्च मानकों से नीचे चली गई। मोर्केल इसे स्वीकारते हुए कहते हैं कि निराशाजनक समय हर टीम के साथ आता है, लेकिन उससे उबरने की प्रक्रिया ही सबको आगे बढ़ाती है। अब खिलाड़ियों को कुछ दिनों का समय मिला है जिससे वे अपनी गलतियों का विश्लेषण कर सकें और मानसिक रूप से खुद को तरोताजा कर सकें।
मोर्केल बताते हैं कि अब टीम का ध्यान सफेद गेंद के क्रिकेट पर केंद्रित है क्योंकि आने वाले महीनों में वनडे और टी20 सीरीज के जरिए 2026 टी20 वर्ल्ड कप और 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी को नई दिशा मिलनी है।
फॉर्मेट बदलने से नई ऊर्जा
मोर्केल कहते हैं कि जब क्रिकेटर अलग फॉर्मेट में आते हैं, तो उनके भीतर स्वाभाविक रूप से नई ऊर्जा पैदा होती है। सफेद गेंद का क्रिकेट खासकर वनडे और टी20 प्रारूप खिलाड़ियों में आक्रामकता, तेज सोच और तेज रणनीतिक बदलावों की मांग करता है। मोर्केल का मानना है कि दक्षिण अफ्रीका इस समय शानदार लय में है और उनके आत्मविश्वास का सामना करने के लिए भारत को शुरुआत से ही मजबूत प्रदर्शन करना होगा।
भारतीय टीम, जो पिछले कुछ वर्षों से सफेद गेंद के क्रिकेट में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है, आने वाले मैचों में नई शुरुआत करना चाहेगी ताकि खिलाड़ियों की मानसिक स्थिरता भी वापस आए।
टी20 विश्व कप 2026 की तैयारी अलग, लेकिन टीम इंडिया की जर्सी हमेशा गंभीर जिम्मेदारी
मोर्केल स्पष्ट करते हैं कि इस वनडे सीरीज का सीधा संबंध 2026 टी20 विश्व कप की तैयारी से नहीं है। उनके अनुसार जब भी कोई खिलाड़ी भारत की जर्सी पहनकर मैदान में उतरता है, तो वह सिर्फ एक टूर्नामेंट के लिए नहीं खेलता, बल्कि करोड़ों भारतीयों के प्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी निभाता है। यह भावनात्मक भार ही खिलाड़ियों को हर मैच में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करता है।
रोहित और विराट का फॉर्मेट परिवर्तन
पिछले कुछ वर्षों में रोहित शर्मा और विराट कोहली ने अपने करियर की प्राथमिकताओं में अहम परिवर्तन किए हैं। भारत ने 2024 में टी20 विश्व कप जीता और इस सफलता के तुरंत बाद दोनों अनुभवी खिलाड़ियों ने टी20 फॉर्मेट को अलविदा कह दिया। यह फैसला कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था, लेकिन दोनों ने इसे अपने करियर को संतुलित बनाए रखने की दृष्टि से लिया।
इसी साल मई में दोनों खिलाड़ियों ने टेस्ट क्रिकेट से भी संन्यास की घोषणा कर दी, जिससे क्रिकेट जगत में हलचल मच गई। यह निर्णय आईपीएल के दौरान आया और इंग्लैंड दौरे से पहले दोनों के टेस्ट संन्यास ने कई नई चर्चाओं को जन्म दिया।
दोनों अब पूरी तरह वनडे फॉर्मेट पर केंद्रित हैं। उनकी बल्लेबाजी की शैली, मैच का अनुभव और बड़े टूर्नामेंट में धैर्य उनकी सबसे बड़ी ताकतें हैं। यही कारण है कि मोर्केल का यह बयान कि दोनों 2027 विश्व कप खेल सकते हैं, प्रशंसकों के लिए अत्यंत उत्साहजनक है।
क्या रोहित और कोहली 2027 विश्व कप में खेलेंगे?
मोर्केल के अनुसार यह प्रश्न केवल उम्र का नहीं बल्कि फिटनेस और निरंतर प्रदर्शन का है। यदि दोनों खिलाड़ी अगले दो वर्षों तक अपनी फॉर्म बनाए रखते हैं और फिट रहते हैं, तो उन्हें 2027 विश्व कप में देखकर किसी को भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
ये दोनों ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का तीन दशक के बराबर अनुभव है। उनका खेल समय के साथ बेहतर होता गया है। दोनों जानते हैं कि अपने शरीर को कैसे मैनेज करना है, कैसे तैयारी करनी है और कैसे बड़े टूर्नामेंट के लिए मानसिक रूप से खुद को तैयार रखना है।
दक्षिण अफ्रीका सीरीज की चुनौती और भारत की रणनीति
दक्षिण अफ्रीका की मौजूदा टीम शानदार फॉर्म में है। टेस्ट सीरीज जीतने के बाद उनका आत्मविश्वास उच्च स्तर पर है। ऐसे में भारत के लिए उनके खिलाफ वनडे सीरीज आसान नहीं होगी। मोर्केल कहते हैं कि भारतीय टीम को शुरुआत से ही आक्रामक होकर खेलना होगा, खासकर पावरप्ले और मध्य ओवरों में।
वनडे क्रिकेट में अनुभव और युवा जोश का संतुलन जरूरी होता है। रोहित और कोहली जैसे खिलाड़ियों का अनुभव भारत को इस सीरीज में मनोवैज्ञानिक बढ़त दे सकता है, क्योंकि बड़े मैचों में उनका धैर्य और नेतृत्व अक्सर टीम को जीत की ओर ले जाता है।
टीम इंडिया की बैटिंग और बॉलिंग में आवश्यक बदलाव
मोर्केल स्वीकारते हैं कि भारत की गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों को अगले कुछ महीनों में नई रणनीति और निरंतरता की जरूरत है। भारत के पास प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी हैं लेकिन उनकी क्षमता को स्थिरता में बदलने के लिए सीनियर खिलाड़ियों की उपस्थिति बेहद महत्वपूर्ण है।
रोहित और कोहली का महत्व अब पहले से ज्यादा क्यों?
दोनों खिलाड़ियों की बल्लेबाजी सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं होती। वे मैच की गति तय करते हैं, विपक्षी टीम की रणनीति बिगाड़ते हैं और मैदान पर मौजूद युवा खिलाड़ियों को सही दिशा देते हैं।
2027 तक इन दोनों खिलाड़ियों का अनुभव भारत के लिए वह स्तंभ बन सकता है जो टीम को बड़ी जीतों की ओर ले जाए।
