भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में अपने प्रदर्शन से न केवल देशवासियों बल्कि वैश्विक अर्थशास्त्रियों को भी आश्चर्यचकित कर दिया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस तिमाही में देश की जीडीपी 8.2 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी। यह वृद्धि केवल अनुमानित 6.3-6.8 प्रतिशत की दर से कहीं अधिक है जो बजट से पहले संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में दर्शाई गई थी।

मुख्य आर्थिक सलाहकार का दृष्टिकोण
भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने इस बढ़त को उत्साहजनक बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न संकेतक यह दिखा रहे हैं कि वित्त वर्ष की पूरी वृद्धि 7 प्रतिशत या उससे अधिक होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में तेज़ी बरकरार रहने की उम्मीद है। यह वृद्धि न केवल आर्थिक सुधारों का परिणाम है बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मजबूत मांग और कम महंगाई का प्रत्यक्ष संकेत भी है।
नागेश्वरन ने बताया कि अच्छी फसल और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती आय ने उपभोग की ताकत को बढ़ाया है। इसके अलावा, टैक्स में कटौती और सरकारी निवेश की लगातार वृद्धि ने उद्योगों और व्यवसायों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्र की भूमिका
विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में अच्छी फसल और रबी की समय पर बुवाई ने ग्रामीण क्षेत्रों की खपत को मजबूती दी है। अक्टूबर 2025 में ट्रैक्टरों की बिक्री पिछले 11 वर्षों में किसी भी महीने की तुलना में सबसे अधिक रही। इसका कारण अच्छा मॉनसून, ग्रामीण क्षेत्र की बेहतर खरीदारी क्षमता, त्योहारी मांग और हाल ही में जीएसटी दरों में कटौती को बताया गया।
नागेश्वरन ने यह भी कहा कि दोपहिया और तिपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री में भी अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखी गई। यह संकेत है कि ग्रामीण क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियाँ और खरीदारी क्षमता मजबूत हुई है।
निवेश और व्यापारिक माहौल
देश में निजी निवेश को बनाए रखने के लिए कंपनियों की मजबूत बैलेंस शीट महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। स्थिर महंगाई, लगातार सरकारी पूंजीगत व्यय और सुधारों की रफ्तार ने अर्थव्यवस्था को जोखिमों से निपटने के लिए तैयार किया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ई-वे बिलों का निर्माण, नॉन-फूड क्रेडिट में वृद्धि, ऊर्जा खपत में तेजी और माल ढुलाई में सुधार आर्थिक गतिविधियों की मजबूत संकेतक हैं।
रोजगार और श्रम कानून सुधार
हाल ही में लागू किए गए नए श्रम कानून भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स और मजबूत उद्योग निर्माण में सहायक होंगे। नागेश्वरन ने कहा कि यह सुधार निवेशकों के विश्वास को बढ़ाएगा और रोजगार सृजन में योगदान देगा। इससे आर्थिक वृद्धि की दिशा में दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होगी।
वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति
भारत की आर्थिक वृद्धि ने न केवल अमेरिका और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ा है बल्कि दुनिया के अन्य देशों के लिए भी एक प्रेरणा बन गई है। हार्वर्ड जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने भारतीय आर्थिक मॉडल को विश्लेषित किया है और इसे विश्व में तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में मान्यता दी है।
भविष्य की संभावनाएँ
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भविष्य की संभावनाओं के बारे में कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था इस वित्त वर्ष में 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकती है। उन्होंने कहा कि कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में वृद्धि जारी रहेगी। इसके अलावा, उपभोक्ता खर्च, निवेश और निर्यात में सुधार की संभावना है।
वर्तमान परिस्थितियों में, भारत ने आर्थिक स्थिरता और विकास दोनों में संतुलन बनाए रखा है। सरकार के वित्तीय सुधार, टैक्स कटौती और निजी निवेश प्रोत्साहन ने देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती दी है।
