यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सबसे करीबी और शक्तिशाली सलाहकार एंड्री येरमाक का नाम इस समय देश में चल रही भ्रष्टाचार जांच में सामने आया है। 2025 की शुरुआत में यूक्रेन की जांच एजेंसियों ने एक बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा किया, जिसमें सरकारी ठेके और पैसे की हेराफेरी के नेटवर्क का पता चला। यह घोटाला करीब 800 करोड़ रुपए तक का बताया जा रहा है। येरमाक के घर पर हाल ही में तलाशी ली गई और इसी कार्रवाई के बाद उन्होंने चीफ ऑफ स्टाफ के पद से इस्तीफा दे दिया।

येरमाक को यूक्रेन का दूसरा सबसे ताकतवर शख्स माना जाता है। उन्हें अमेरिका और रूस के बीच पीस डील में यूक्रेन की तरफ से बातचीत करने की जिम्मेदारी दी गई थी। भ्रष्टाचार मामले के सामने आने के बाद देश के राजनीतिक दबाव और विपक्ष की मांग के चलते उनका इस्तीफा अनिवार्य हो गया। येरमाक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और किसी मामले में आरोपी नहीं हैं।
भ्रष्टाचार का खुलासा कैसे हुआ
यूक्रेन की एंटी-करप्शन एजेंसी NABU और SAPO ने जांच के दौरान सरकारी कंपनियों में टेंडर देने के बदले रिश्वत लेने और सरकारी पैसे की हेराफेरी करने वाले नेटवर्क का पता लगाया। इस घोटाले में खास तौर पर सरकारी परमाणु ऊर्जा फर्म एनर्जीएटम का नाम सामने आया।
जांच में यह सामने आया कि तिमूर मिनडिच, जो जेलेंस्की के पुराने बिजनेस पार्टनर और सलाहकार स्तर के कर्मचारी थे, ने बड़े सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए कंपनियों से भारी राशि की रिश्वत ली। कंपनियों का आरोप था कि ठेके तिमूर की मंजूरी और कमीशन तय किए बिना पास नहीं होते थे। इस घोटाले के मास्टरमाइंड के रूप में मिनडिच को पहचाना गया।
जून 2024 में कुछ कंपनियों ने गुप्त रूप से शिकायत की कि सरकारी प्रोजेक्ट्स के ठेके पास कराने के बदले भारी रिश्वत मांगी जा रही थी। इन शिकायतों में बार-बार तिमूर मिनडिच का नाम सामने आया। इसके बाद अगस्त 2024 में NABU और SAPO ने गुप्त जांच शुरू कर दी। नवंबर 2024 में बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि यह कमीशनखोरी का नेटवर्क करोड़ों डॉलर तक फैला हुआ था।
जांच में शामिल प्रमुख लोग
इस घोटाले में तिमूर मिनडिच के अलावा उनकी टीम से जुड़े कई कारोबारी और कुछ सरकारी अधिकारी भी फंसे। उनके खिलाफ आरोप थे कि उन्होंने रिश्वत की रकम इकट्ठा की और इसे आगे ट्रांसफर किया, और सरकारी टेंडर की प्रक्रिया को तिमूर की पसंद अनुसार प्रभावित किया।
जांच में यह भी सामने आया कि बड़े कॉन्ट्रैक्ट पास होने के तुरंत बाद निजी खातों में कंसल्टेंसी फीस के नाम पर बड़ी रकम ट्रांसफर कराई गई। कई प्रोजेक्ट की लागत जानबूझकर बढ़ाई गई थी ताकि कमीशन की रकम अधिक मिल सके।
28 जनवरी 2025 को NABU और SAPO ने एक साथ कई जगहों पर छापेमारी की और इस घोटाले को उजागर किया। जांच एजेंसियों को शक था कि यह नेटवर्क राष्ट्रपति कार्यालय तक असर डाल सकता है। इसी शक के तहत येरमाक के घर पर भी दस्तावेज खोजे गए, हालांकि उनके खिलाफ कोई सीधा आरोप नहीं लगाया गया।
रेड से पहले तिमूर मिनडिच देश छोड़कर भागा
NABU ने 10 नवंबर को कई मंत्रियों और एनर्जोएटम के ऑफिस पर रेड की योजना बनाई थी। लेकिन उसी रात तिमूर मिनडिच अपने अपार्टमेंट से एक लग्जरी टैक्सी लेकर यूरोप के लिए रवाना हो गए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि भ्रष्टाचार नेटवर्क का मास्टरमाइंड जांच से बचने की कोशिश कर रहा था।
जेलेंस्की पर बढ़ा दबाव
येरमाक युद्ध के दौरान यूक्रेन की रणनीति बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाते रहे। उन्होंने अमेरिका के साथ वार्ता कर 28 पॉइंट वाले पीस प्लान को दोबारा तैयार करने का काम संभाला। ट्रम्प प्रशासन ने इसे रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए तैयार किया था।
हालांकि भ्रष्टाचार मामले के बाद विपक्ष और जनता की मांग पर येरमाक के इस्तीफे का दबाव बढ़ा। इससे पहले उनके सहयोगियों जैसे डिप्टी ओलेह तातारोव और रोस्तिस्लाव शुर्मा को वित्तीय गड़बड़ियों में फंसने के बाद बर्खास्त किया गया था।
येरमाक और जेलेंस्की की मुलाकात करीब 15 साल पहले हुई थी। तब येरमाक वकील और टीवी प्रोडक्शन में सक्रिय थे, जबकि जेलेंस्की प्रसिद्ध कॉमेडियन और अभिनेता थे। 2019 में जेलेंस्की राष्ट्रपति बने और येरमाक को टीम में शामिल किया। फरवरी 2020 में उन्हें प्रमोट करके चीफ ऑफ स्टाफ बना दिया गया।
