भारतीय वित्तीय बाजार में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा हुई है। रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) अब सीधे इक्विटी से जुड़े निवेश के रूप में माने जाएंगे। यह निर्णय भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने लिया है, जो 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी होगा। इस बदलाव का उद्देश्य REITs में म्यूचुअल फंड्स और स्पेशियलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड्स (SIF) के निवेश को प्रोत्साहित करना और उन्हें शेयर बाजार के मुख्यधारा के निवेश में शामिल करना है।

SEBI ने 28 नवंबर, 2025 को इस संबंध में एक सर्कुलर जारी किया। इसमें स्पष्ट किया गया कि REITs में निवेश अब इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश के रूप में गिना जाएगा। इससे पहले, REITs को अलग कैटेगरी में रखा गया था और म्यूचुअल फंड्स की डेट स्कीम या SIF के निवेश को इसके अंदर जोड़ने में कुछ जटिलताएं थीं। नए नियमों के तहत, म्यूचुअल फंड हाउसेज को अपने डेट पोर्टफोलियो में शामिल REITs को हटाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, ताकि निवेश को पूरी तरह से इक्विटी से जुड़े निवेश में परिवर्तित किया जा सके।
इस बदलाव का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि छह महीने की ट्रांजिशन अवधि समाप्त होने के बाद, यानी 1 जुलाई, 2026 से REITs को शेयरों के सूचकांकों में भी शामिल किया जाएगा। इसका मतलब है कि REITs में निवेश करने वाले फंड्स अब इसे अपने मार्केट-कैप आधारित स्क्रिप क्लासिफिकेशन में शामिल कर सकेंगे। इससे न केवल निवेशकों के लिए निवेश के विकल्प बढ़ेंगे, बल्कि रियल एस्टेट में निवेश का आकर्षण भी बढ़ेगा।
REITs में बदलाव के पीछे SEBI का मुख्य उद्देश्य बाजार में पारदर्शिता और निवेशकों की दिलचस्पी को बढ़ाना है। निवेशकों के लिए यह एक अवसर है कि वे म्यूचुअल फंड्स के माध्यम से सीधे रियल एस्टेट बाजार में निवेश कर सकें और इसके लाभ उठा सकें। SEBI ने यह भी कहा कि इस बदलाव को फंडामेंटल एट्रिब्यूट चेंज नहीं माना जाएगा, यानी यह निवेशकों के लिए कोई अतिरिक्त जोखिम नहीं जोड़ता।
दूसरी ओर, इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) को हाइब्रिड इंस्ट्रूमेंट्स की कैटेगरी में बनाए रखा जाएगा। इसका मतलब है कि InvITs पर पहले जैसा ही नियम लागू रहेगा और उन्हें इक्विटी निवेश की तरह शामिल नहीं किया जाएगा।
म्यूचुअल फंड हाउसेज के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। SEBI ने AMCs को निर्देश दिया है कि वे अपनी स्कीम डॉक्युमेंट्स में आवश्यक बदलाव करें और निवेशकों को इसकी जानकारी सार्वजनिक करें। यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि निवेशक REITs में अपने निवेश को समझदारी से कर सकें और उन्हें मार्केट की स्थितियों के अनुसार निर्णय लेने में आसानी हो।
REITs में निवेश बढ़ने से बाजार में नई गतिविधि और तरलता आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से म्यूचुअल फंड्स की स्कीमों का निवेश REITs में बढ़ेगा और निवेशकों के लिए नई रणनीतियों का रास्ता खुलेगा। इसके अलावा, यह निवेशकों को शेयर बाजार के सूचकांकों के साथ REITs को जोड़ने का अवसर देगा, जिससे उन्हें रियल एस्टेट और शेयर बाजार दोनों का लाभ मिल सकेगा।
भारतीय रियल एस्टेट बाजार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है। REITs को इक्विटी निवेश के रूप में मान्यता देने से म्यूचुअल फंड्स और SIF का निवेश और बढ़ेगा। निवेशकों के लिए यह कदम अवसरों की नई श्रृंखला खोलेगा और बाजार की पारदर्शिता को बढ़ाएगा।
इस बदलाव के प्रभाव को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि REITs में निवेश करने से पहले निवेशक किन बातों का ध्यान रखें। SEBI ने यह स्पष्ट किया है कि निवेशकों को अपनी जोखिम प्रोफ़ाइल, बाजार की स्थिति और निवेश अवधि के अनुसार निर्णय लेने चाहिए। फंड हाउसेज को यह सलाह दी गई है कि वे REITs को धीरे-धीरे अपने डेट पोर्टफोलियो से हटाएं, जिससे निवेशकों को कोई अचानक नुकसान न हो।
इस कदम का दीर्घकालीन प्रभाव भारतीय वित्तीय बाजार पर सकारात्मक रहने की संभावना है। म्यूचुअल फंड्स के माध्यम से REITs में निवेश बढ़ने से न केवल निवेशकों को विविध निवेश के अवसर मिलेंगे, बल्कि रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए पूंजी की उपलब्धता भी बढ़ेगी। इसके साथ ही, शेयर बाजार में नए उत्पादों और रणनीतियों का विकास होगा, जो निवेशकों के लिए लाभकारी होगा।
इस बदलाव से निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि REITs अब एक नई इक्विटी कैटेगरी में आए हैं, लेकिन इसके लिए बाजार में सावधानीपूर्वक और रणनीतिक निवेश करना आवश्यक है। SEBI का यह निर्णय न केवल REITs के विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि म्यूचुअल फंड्स और SIF के लिए भी नए निवेश अवसर खोलेगा।
निष्कर्षतः, SEBI का यह कदम भारतीय वित्तीय बाजार में REITs को प्रमुखता देने और निवेशकों के लिए अधिक पारदर्शी और आकर्षक विकल्प प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। 2026 से यह बदलाव प्रभावी होगा और इसके परिणामस्वरूप म्यूचुअल फंड्स और SIF का निवेश REITs में तेजी से बढ़ेगा। निवेशकों और फंड हाउसेज दोनों के लिए यह समय रणनीतिक निवेश और वित्तीय योजना बनाने का अवसर है।
