कभी व्यापारिक मार्गों के लिए प्रसिद्ध रहा ब्लैक सी अब युद्धकालीन रणनीतियों, सैन्य गतिविधियों और अनिश्चितताओं का केंद्र बन गया है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष एक बार फिर उस दिशा में मुड़ गया है, जिसने दुनिया की चिंताओं को कई गुना अधिक बढ़ा दिया है। शुक्रवार देर रात हुए एक समुद्री हमले ने ब्लैक सी की लहरों में हलचल मचा दी, जब ‘विराट’ नामक रूसी ऑयल टैंकर को एक बिना पायलट वाले समुद्री ड्रोन ने निशाना बनाया।

इस घटना ने न केवल जहाज के क्रू सदस्यों को दहशत में डाल दिया, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सुरक्षा, स्थिरता और समुद्री मार्गों की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए। ब्लैक सी में इससे पहले भी कई बार ड्रोन हमलों की खबरें सामने आ चुकी हैं, लेकिन यह हमला इसलिए चर्चित हो गया क्योंकि इसमें सीधे तौर पर एक प्रमुख रूसी टैंकर को निशाना बनाया गया और क्रू ने खुले रेडियो चैनल पर ‘मेडे’ कॉल जारी की।
हमले की रात: जब ‘यह विराट है.. MayDay’ की आवाज गूंजी समुद्री रेडियो पर
शुक्रवार की रात ब्लैक सी के पास स्थित तुर्किए के तटों पर मौसम शांत था। समुद्र की लहरें सामान्य थीं और जहाजों का आवागमन भी नियमित रूप से चल रहा था। परंतु अचानक आधी रात के बाद समुद्री रेडियो की ओपन फ्रीक्वेंसी पर एक चीखती हुई आवाज गूंजी —
“यह VIRAT है… मेडे! ड्रोन अटैक! हमें मदद चाहिए…”
यह संदेश न केवल सन्न कर देने वाला था बल्कि इस बात का संकेत भी था कि समुद्र की सतह पर कोई बड़ा खतरा सामने आ चुका है। क्रू के सदस्यों ने हमले को बेरहमी से झेला और तुरंत रेडियो के माध्यम से सहायता मांगनी पड़ी।
यह ओपन फ्रीक्वेंसी रेडियो कॉल उन सभी जहाजों और तटीय सुरक्षा स्टेशनों ने सुनी जो उस समय समुद्र के पास मौजूद थे। उसकी आवाज में घबराहट, स्थिति की भयावहता और अनिश्चितता सभी स्पष्ट सुनाई दे रही थीं।
रूस के ‘विराट’ नामक टैंकर पर हमला किस प्रकार हुआ, यह सवाल तब और गंभीर हो गया जब तुर्किए के परिवहन मंत्रालय ने पुष्टि की कि टैंकर को नुकसान हुआ है, हालांकि स्थिति नियंत्रण में है और क्रू सुरक्षित है।
लेकिन समुद्री संघर्ष की दुनिया में नुकसान और सुरक्षा अक्सर अलग-अलग अर्थ रखते हैं। कई विशेषज्ञों ने इसे संघर्ष के नए चरण की चेतावनी के रूप में देखा है।
रूसी ‘शैडो फ्लीट’ और युद्धकालीन व्यापार की कहानी
पिछले कुछ वर्षों में ‘रूसी शैडो फ्लीट’ शब्द का उपयोग काफी बढ़ गया है। यह वे जहाज हैं जो रूस की ऊर्जा निर्यात गतिविधियों को जारी रखने के लिए उपयोग किए जाते हैं, खासकर तब से जब उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हैं।
इन जहाजों पर निगरानी कम होती है, सुरक्षा भी सीमित होती है, और कई बार इनके मार्ग अंतरराष्ट्रीय मानकों से हटकर जोखिम भरे क्षेत्रों से गुजरते हैं। ‘विराट’ भी इसी शैडो फ्लीट का हिस्सा बताया जा रहा था।
यही कारण है कि विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे जहाज समुद्री संघर्षों के लिए आसान लक्ष्य बन जाते हैं। इस क्षेत्र में पहले भी कई जहाजों को ड्रोन या मिसाइल हमलों में क्षति पहुंच चुकी है, लेकिन ‘विराट’ पर हमला इसलिए अलग माना जा रहा है क्योंकि यह हमला समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर गहरी चोट करता है।
तुर्किए का बयान और सीमित नुकसान का दावा
तुर्किए के परिवहन मंत्रालय ने कहा कि जहाज पर लगा विस्फोट हल्की क्षति तक ही सीमित रहा। जहाज डूबने की स्थिति में नहीं था और तत्काल नियंत्रण में ले लिया गया।
तुर्किए ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका तटीय क्षेत्र सुरक्षित है और उन्होंने क्रू को हर संभव सहायता प्रदान की।
लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने दावा किया कि यह ‘हल्की क्षति’ संभवतः वास्तविक तस्वीर का छोटा सा हिस्सा हो सकता है। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कभी-कभी देशों द्वारा ऐसे हमलों की गंभीरता छिपाई जाती है ताकि आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव कम से कम पड़े।
यूक्रेन की प्रतिक्रिया: जिम्मेदारी स्वीकार करने का संकेत
हमले के कुछ ही घंटों में यूक्रेन के सैन्य सूत्रों की ओर से यह जानकारी सामने आने लगी कि उन्होंने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
उनका दावा था कि यह हमला रूस के ऊर्जा परिवहन नेटवर्क को बाधित करने की रणनीति का हिस्सा था।
यूक्रेन कई महीनों से समुद्री ड्रोन तकनीक का उपयोग कर रहा है और उसने अनेक बार रूसी जहाजों को निशाना बनाया है। यह हमला भी उसी तकनीक का संकेत माना जा रहा है।
यूक्रेन का यह रुख यह भी दर्शाता है कि ब्लैक सी अब केवल समुद्री व्यापार का मार्ग नहीं रह गया है, बल्कि यह युद्ध की नई रेखा बन चुका है।
समुद्र में बढ़ती ड्रोन युद्ध की नई रणनीति
ड्रोन युद्ध का विस्तार भूमि से समुद्र तक होने लगा है। समुद्री ड्रोन अत्यधिक खतरनाक होते हैं क्योंकि इन्हें रडार से पहचानना कठिन होता है और ये पानी की सतह के पास तेजी से चल सकते हैं।
यूक्रेन और रूस दोनों ही अब ऐसे ड्रोन का उपयोग कर रहे हैं।
इनका प्रयोग अपेक्षाकृत सस्ता, प्रभावी और अत्यधिक जोखिम पैदा करने वाला होता है।
‘विराट’ पर हमला इस बात का प्रमाण है कि यह तकनीक आने वाले वर्षों में समुद्री युद्ध और भी खतरनाक बना देगी।
ब्लैक सी पर बढ़ता भू-राजनीतिक संकट
यह हमला न केवल दो देशों के बीच संघर्ष का हिस्सा है, बल्कि यह उस क्षेत्र की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है जहाँ कई देशों के समुद्री मार्ग एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
तुर्किए, रोमानिया, बुल्गारिया, रूस और यूक्रेन — सभी इस क्षेत्र के तटीय देश हैं।
इनका तनाव किसी भी क्षण व्यापक अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।
समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में ब्लैक सी गहरे भू-राजनीतिक संघर्षों का केंद्र बन जाएगा और ऐसे हमलों की संभावना और बढ़ सकती है।
क्रू सदस्यों की बहादुरी और भय की रात
टैंकर पर मौजूद क्रू सदस्य उस रात बेहद तनावपूर्ण स्थिति में थे।
एक वीडियो सामने आया जिसमें क्रू की आवाज स्पष्ट सुनाई देती है —
“यह VIRAT है… मेडे! मदद चाहिए…”
उनकी आवाज में डर, हड़बड़ी और संभावित तबाही का एहसास झलक रहा था।
क्रू की त्वरित प्रतिक्रिया और उनकी तत्परता के कारण जहाज पर बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
समुद्री व्यापार पर असर और विश्व अर्थव्यवस्था की चिंता
ऑयल टैंकर दुनिया की अर्थव्यवस्था की धमनियों की तरह हैं।
ऊर्जा का सबसे बड़ा परिवहन समुद्र के रास्ते होता है।
ऐसे में समुद्री संघर्ष अक्सर वैश्विक तेल की कीमतों, व्यापारिक मार्गों और देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘विराट’ पर हमले का असर तेल बाजारों पर पड़ेगा और आने वाले दिनों में ऊर्जा से जुड़े क्षेत्र में उथल-पुथल संभव है।
क्या यह संघर्ष और बढ़ेगा?
कई विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यह हमला रूस को जवाबी कार्रवाई करने के लिए उकसा सकता है।
यदि रूस समुद्र में प्रतिकार करता है, तो यह संघर्ष सीधे तुर्किए और नाटो के लिए भी चुनौती बन सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति को बेहद गंभीर नजर से देख रहा है।
