भोपाल में साइबर अपराधियों की नई चाल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल दुनिया में सुरक्षा का हर कदम सावधानी से उठाना जरूरी है। मोबाइल फोन से जुड़े खतरे अब इतने परिष्कृत हो चुके हैं कि अनुभवी और तकनीक समझ रखने वाले लोग भी एक छोटी सी गलती के कारण बड़े नुकसान का सामना कर सकते हैं। इस बार ठगी का शिकार बने हैं राज्य के वित्त विभाग के पूर्व निदेशक नितिन नांदगांवकर, जिनके साथ हुई घटना यह बताने के लिए पर्याप्त है कि डिजिटल अपराध अब किस तरह लोगों की रोजमर्रा की आदतों पर हमला कर रहे हैं।

घटना कुछ ही मिनटों में घटी, लेकिन उसका प्रभाव गहरा और परेशान करने वाला रहा। अरेरा कॉलोनी में रहने वाले 66 वर्षीय नांदगांवकर एक ऐसी स्थिति में फंस गए, जहां सिर्फ एक विशेष कोड डायल करते ही उनका मोबाइल फोन, वॉट्सएप और डिजिटल पहचान अपराधियों के हाथों में चली गई।
घटना की शुरुआत: एक साधारण फोन कॉल, लेकिन बेहद खतरनाक इरादा
बुधवार सुबह उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाला व्यक्ति खुद को एक बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी का प्रतिनिधि बता रहा था। उसने कहा कि आपके नाम से एक पार्सल डिलीवर होने वाला है, लेकिन डिलीवरी ब्वाय आपका नंबर लगाकर भी संपर्क नहीं कर पा रहा।
यहीं से चाल शुरू होती है।
उस व्यक्ति ने पूरी सहजता से एक नंबर भेजा और कहा कि इस नंबर पर डायल करिए, ताकि डिलीवरी ब्वाय आपसे जुड़ सके। नंबर कुछ यूं था—
*21xxxxxxxxxx
यहां *21 ही असल जाल था। यह कॉल फ़ॉरवर्डिंग एक्टिवेट करने का कोड है, जिसे कई लोग अभी भी नहीं जानते। जैसे ही नांदगांवकर ने यह नंबर डायल किया, उनका फोन उस अनजान नंबर पर फॉरवर्ड हो गया, जिससे आने वाली कॉल्स और मैसेज सीधे ठगों तक पहुंचने लगे।
सिर्फ दस सेकंड में फोन नियंत्रण से बाहर
कोड डायल करते ही उनका फोन अचानक अलग तरह से व्यवहार करने लगा।
वॉट्सएप लॉगआउट हो गया।
स्क्रीन पर संदेश आया कि आपके वॉट्सएप में किसी दूसरे डिवाइस से लॉगिन हुआ है।
वे हैरान रह गए। उन्होंने दोबारा लॉगिन की कोशिश की, लेकिन OTP ठगों के पास जा चुका था।
उन्होंने तुरंत अपनी पत्नी के फोन से लॉगिन करने की कोशिश की, लेकिन साइबर अपराधियों ने उनकी पत्नी के नंबर को भी अपने कब्जे में ले लिया। अब दोनों के वॉट्सएप हैक हो चुके थे।
हैकिंग के बाद ठगों ने शुरू की असली चाल
जैसे ही ठगों को नियंत्रण मिला, उन्होंने दोनों के मोबाइल नंबरों पर मौजूद जान-पहचान वाले लोगों की लिस्ट देखना शुरू कर दिया। फिर उन्होंने उन्हीं नंबरों पर संदेश भेजना शुरू किया।
संदेश था:
मुझे तुरंत थोड़े पैसों की जरूरत है, कृपया मदद कर दें।
कई रिश्तेदार और परिचित इस बात को सच समझते उसके पहले ही नांदगांवकर ने उनके मोबाइल कॉल्स के माध्यम से सबको सूचना दे दी कि उनका फोन हैक हो चुका है। इस तेजी ने बड़े वित्तीय नुकसान को टाल दिया।
‘अनुभवी लोग भी चूक सकते हैं’ — नांदगांवकर ने बताया पूरी घटना की मन:स्थिति
नितिन नांदगांवकर, जिन्होंने पूरी जिंदगी सरकारी और वित्तीय प्रणालियों में कार्य किया है, उन्होंने स्वयं कहा कि यह घटना उन्हें अंदर तक हिला गई।
उन्होंने बताया:
“कॉल करने वाले की आवाज में ऐसा आत्मविश्वास था कि मुझे एक क्षण को भी संदेह नहीं हुआ। जिस सहजता से उसने समस्या बताई, वही पूरे जाल का सबसे खतरनाक हिस्सा था।”
उनका कहना था कि हम अक्सर सोचते हैं कि ठगी केवल अनजान लिंक या संदिग्ध मैसेज से होती है, लेकिन अब ये अपराधी रोजमर्रा की सेवाओं के नाम पर ही जाल बिछा रहे हैं।
डिजिटल अपराधियों का नया तरीका: कॉल फॉरवर्डिंग ट्रैप
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि *21 जैसे कोड का इस्तेमाल करके आपके फोन की कॉल और OTP दूसरी जगह फॉरवर्ड कर दिए जाते हैं।
इसके बाद कोई भी अपराधी आपके फोन पर आने वाले OTP का उपयोग करके आपके वॉट्सएप, ईमेल या बैंकिंग एप्स तक पहुंच बना सकता है।
यह तकनीक बेहद चुपचाप काम करती है।
पीड़ित को अक्सर पूरी जानकारी भी नहीं होती कि क्या हुआ।
डिजिटल खतरे का विस्तार: भोपाल में बढ़ रहे साइबर अपराध
पिछले कुछ वर्षों में भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में डिजिटल धोखाधड़ी तेजी से बढ़ी है।
साइबर सेल के अनुसार अब ठग ऐसे तरीके अपना रहे हैं जो साधारण नागरिकों के साथ-साथ शिक्षित और विशेषज्ञ लोगों को भी भ्रमित कर देते हैं।
साइबर पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में सबसे पहली गलती घबराहट में होती है। जब लोगों को डिलीवरी, बैंकिंग, KYC या OTP से संबंधित संदेश मिलते हैं, तो वे बिना सोचे समझे निर्देशों का पालन कर लेते हैं।
परिवार के लिए कठिन घड़ी, लेकिन संभला समय पर
नांदगांवकर दंपत्ति के फोन हैक होते ही परिवार के सदस्यों और मित्रों में चिंता फैल गई। लोग लगातार कॉल करके पूछने लगे कि क्या वे सच में मदद चाहते हैं।
कुछ ही समय में पूरा मामला स्पष्ट हो गया कि यह एक बड़ा डिजिटल हमला था।
सौभाग्य से, उन्होंने समय रहते अपने सभी संपर्कों को सूचित किया और किसी भी वित्तीय नुकसान से बच गए।
हालांकि मानसिक तनाव काफी बढ़ता गया, क्योंकि निजी चैट, फोटो और संपर्क सूची अपराधियों के पास चली गई थी।
भविष्य के लिए चेतावनी: कोई भी ई-कॉमर्स कंपनी कॉल करके कोड डायल नहीं करवाती
इस घटना के बाद साइबर विशेषज्ञों ने साफ कहा:
न कोई ई-कॉमर्स कंपनी
न कोई बैंक
न कोई सरकारी विभाग
कभी भी कॉल फॉरवर्ड कोड डायल करने को नहीं कहता।
यह तकनीक केवल साइबर अपराधी अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं।
निष्कर्ष: डिजिटल दुनिया में सावधानी सबसे बड़ा हथियार
इस घटना ने एक बार फिर सभी लोगों को यह संदेश दिया है कि तकनीक जितनी आसान जीवन बनाती है, उतना ही खतरनाक दुरुपयोग भी संभव है।
नांदगांवकर जैसे अनुभवी अधिकारी तक को धोखा दिया जा सकता है, तो साधारण लोगों के लिए खतरा कितना बड़ा है, यह समझना मुश्किल नहीं।
डिजिटल अपराधियों का जाल हर दिन नया रूप ले रहा है, और किसी भी छोटी गलती से आपके फोन, आपकी पहचान और आपकी निजी जिंदगी पर खतरा मंडरा सकता है।
