बैतूल जिले के शाहपुर विकासखंड में सोमवार का दिन आध्यात्मिक ज्ञान, सांस्कृतिक गौरव और नैतिक मूल्यों के संदेश से सराबोर रहा। शासकीय एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शाहपुर में आयोजित विकासखंड स्तरीय गीता जयंती महोत्सव ने न केवल विद्यालय परिसर को पावन वातावरण से भर दिया, बल्कि विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और आमजन के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा की एक नई लहर भी जगाई।
मुख्य अतिथि के रूप में इस अवसर पर विधायक गंगा सज्जन सिंह उइके की उपस्थिति ने पूरे कार्यक्रम में विशिष्टता का संचार किया। उन्होंने न केवल छात्रों से संवाद किया, बल्कि गीता के महत्व और उसके जीवनपरक संदेश को गहराई से समझाया।

विधायक उइके का गीता पर दृष्टिकोण
मुख्य अतिथि विधायक उइके ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीमद्भागवत गीता मात्र धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में उचित निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करने वाला मार्गदर्शक है।
उन्होंने कहा कि गीता का सार आंतरिक शांति, कर्मयोग, कर्तव्य, धैर्य और संतुलन का संदेश देता है।
यह कोई ऐसा ग्रंथ नहीं जिसे केवल पूजाघर में रखा जाए, बल्कि ऐसा ज्ञान है जिसे हर मनुष्य को अपने जीवन में उतारना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि युवा पीढ़ी जब गीता के विचारों से प्रेरित होती है, तब उसका जीवन दिशा पाता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और चरित्र में दृढ़ता आती है।
विद्यालय में उत्सव का भव्य आयोजन
गीता जयंती महोत्सव की तैयारियाँ कई दिनों से चल रही थीं। विद्यालय परिसर को पारंपरिक रंगोली, पुष्प सज्जा और सांस्कृतिक प्रतीकों से सजाया गया था। सुबह से ही विद्यालय वातावरण में श्लोकों की मधुर ध्वनि गूंजने लगी।
छात्र-छात्राओं ने गीता के विभिन्न अध्यायों से उद्धरण प्रस्तुत किए, उनके अर्थ बताए और मंच पर संवाद के माध्यम से यह दर्शाया कि गीता का संदेश आधुनिक जीवन में कैसे लागू होता है।
स्थानीय गुरुकुलों के आचार्यों ने भी अपने विचार साझा किए और गीता में बताई गई कर्मयोग की अवधारणा को सरल भाषा में समझाया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और आध्यात्मिक वातावरण
कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई। उसके बाद विद्यार्थियों ने गीत, नृत्य, वाचन और नाट्य-प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें अर्जुन और श्रीकृष्ण के संवादों का मंचन बेहद आकर्षक रहा।
इन प्रस्तुतियों ने गीता के मूल संदेश को और स्पष्ट करते हुए यह दर्शाया कि जीवन में जब भी मनुष्य भ्रमित होता है, तब ज्ञान, धैर्य और आत्मबल ही उसे सही दिशा प्रदान कर सकते हैं।
छात्रों के भीतर नई ऊर्जा का संचार
कार्यक्रम का सबसे प्रेरक पहलू यह रहा कि कई विद्यार्थियों ने मंच पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि कैसे गीता का एक-एक श्लोक जीवन की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है।
कुछ छात्रों ने कहा कि गीता पढ़ने से उनमें आत्म-अनुशासन और आत्मविश्वास का विकास हुआ है।
अभिभावक भी इस बात से प्रसन्न दिखे कि विद्यालय इस प्रकार के आध्यात्मिक कार्यक्रमों से बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा दे रहा है।
शिक्षा और संस्कृति का संगम
विद्यालय के प्राचार्य ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। आध्यात्मिक ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों से बच्चों का व्यक्तित्व समृद्ध होता है।
उन्होंने बताया कि विद्यालय समय-समय पर इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन कौशल, नैतिक शिक्षा और आध्यात्मिक चिंतन से जोड़ने का प्रयास करता रहेगा।
गीता जयंती का ऐतिहासिक महत्व
गीता का जन्म-मोहोत्सव इस दिन इसलिए मनाया जाता है क्योंकि भारतीय परंपरा के अनुसार, यही वह ऐतिहासिक क्षण था जब श्रीकृष्ण ने युद्धभूमि में अर्जुन को वह दिव्य ज्ञान दिया, जिसने न केवल उनके संशय दूर किए बल्कि पूरे विश्व के लिए जीवन दर्शन का मार्ग प्रशस्त किया।
गीता केवल युद्धभूमि का संवाद नहीं, बल्कि मनुष्य की अंतर्मन में चल रही द्वंद्वों की लड़ाई का समाधान है।
यह जीवन के हर क्षेत्र में लागू होती है, चाहे वह शिक्षा हो, व्यापार, राजनीति, परिवार या व्यक्तिगत संघर्ष।
सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश
कार्यक्रम के उपसंहार में विधायक उइके ने कहा कि समाज तभी विकसित हो सकता है जब युवा पीढ़ी मूल्यों के साथ आगे बढ़े। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि गीता का संदेश अपनाने से जीवन का हर निर्णय सरल और स्पष्ट हो जाता है।
उन्होंने विद्यालय को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को मजबूत बनाते हैं और नई पीढ़ी को संस्कारित करते हैं।
महोत्सव का सुंदर समापन
कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया और सभी ने एक स्वर में गीता के संदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
विद्यालय परिसर से निकलते समय हर व्यक्ति के चेहरे पर एक विशेष संतोष और प्रेरणा की चमक दिखाई दे रही थी।
यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आध्यात्मिक श्रेष्ठता, भारतीय परंपरा और जीवन-दर्शन का श्रेष्ठ संगम बन गया।
