मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक ने कई महत्वपूर्ण फैसलों को जन्म दिया। लेकिन इन्हीं निर्णयों के बीच एक ऐसा प्रस्ताव सामने आया जिसने प्रदेश भर के उन युवाओं की उम्मीदों को नई दिशा दी, जो राज्य सेवा परीक्षा 2022 के माध्यम से परिवहन उप-निरीक्षक पद पर चयनित हुए थे। कैबिनेट ने इन चुनिंदा उम्मीदवारों को नियुक्ति की अनुमति तो दी, लेकिन इसके साथ जो शर्तें जोड़ी गईं, उन्होंने इस फैसले को जितना राहत देने वाला बनाया, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी।

राज्य सेवा परीक्षा 2022 में परिवहन उप-निरीक्षक के लिए कुल 29 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। इनमें से 25 अभ्यर्थियों को उस पात्रता के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाने को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, जो विभागीय भर्ती नियमों में अनिवार्य मानी जाती है। ये दो प्रमुख पात्रताएं हैं—एक वर्ष का कंप्यूटर डिप्लोमा और वैध ड्राइविंग लाइसेंस।
कैबिनेट के समक्ष यह प्रश्न लंबे समय से उठा हुआ था कि क्या बिना इन प्रमाणपत्रों के भी नियुक्ति प्रदान की जाए, या फिर चयन सूची से ही इन अभ्यर्थियों को हटाकर वैकल्पिक प्रक्रिया अपनाई जाए। काफी मंथन और कानूनी मानदंडों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया कि चयनित युवा अपनी पात्रता पूरी करने का अवसर पाएंगे, लेकिन यह अवसर बेहद सख्त शर्तों के बंधन में होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया कि 25 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र तो दिए जाएंगे, पर यह नियुक्ति एक प्रकार से सशर्त होगी। उन्हें दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि प्रदान की जाएगी, जिसके भीतर उन्हें अनिवार्य रूप से दोनों पात्रताओं के प्रमाणपत्र विभाग के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। यदि कोई भी अभ्यर्थी दो वर्ष की इस अवधि में दस्तावेज जमा नहीं कर पाता, तो उसकी सेवा बिना किसी विस्तार के तत्काल समाप्त कर दी जाएगी।
यह निर्णय उम्मीदवारों के लिए एक ओर राहत है, क्योंकि चयन सूची से बाहर होने का खतरा टल गया है। वहीं दूसरी ओर यह कठोर दायित्व भी है, क्योंकि निर्धारित अवधि के भीतर पात्रता पूरी करने के लिए मेहनत, समय और संसाधनों का निवेश करना अनिवार्य होगा।
मध्य प्रदेश की भर्ती प्रणाली में इस प्रकार का निर्णय बहुत कम देखने को मिलता है। ज्यादातर मामलों में चयन के समय जरूरी पात्रताओं को पूरा नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाता है। लेकिन इस मामले में कैबिनेट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए अवसर और अनुशासन, दोनों को समान रूप से महत्व दिया।
25 युवाओं के लिए यह एक नई शुरुआत का अवसर है। यह मौका है साबित करने का कि कठिन परिस्थितियां भी अगर दृढ़ संकल्प के साथ सामना की जाएं, तो सपनों तक पहुंचने का रास्ता जरूर निकलता है। सरकार के इस निर्णय ने यह भी संदेश दिया कि योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिलना चाहिए, लेकिन सरकारी सेवा में दक्षता और योग्यता के मानक से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
अब प्रदेश में परिवहन विभाग की नजर इन उम्मीदवारों की प्रगति पर रहेगी। विभाग को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि परिवीक्षा अवधि के दौरान उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे निर्धारित समय में आवश्यक प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकें। इस बीच, उम्मीदवारों के सामने यह चुनौती भी है कि वे नौकरी के शुरुआती दौर में पूरी क्षमता से योगदान दें और साथ ही अपनी शैक्षणिक और तकनीकी पात्रताओं को भी मजबूत बनाएं।
परिवहन विभाग का काम न केवल तकनीकी या प्रशासनिक है, बल्कि सड़क सुरक्षा, वाहन प्रबंधन और लाइसेंसिंग जैसी गंभीर जिम्मेदारियों से जुड़ा है। ऐसे में विभाग के कर्मचारियों के पास कंप्यूटर ज्ञान और ड्राइविंग दक्षता होना अत्यंत आवश्यक है। शायद यही कारण है कि कैबिनेट ने इन पात्रताओं से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया।
इस फैसले ने यह भी साबित किया है कि सरकार भर्ती प्रक्रिया में गुणवत्ता और उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। नियुक्ति में राहत देना मानवीय कदम है, लेकिन सेवाओं को उच्च स्तर पर बनाए रखना जनता के हित में है। इसलिए दोनों पक्षों का संतुलन बनाना जरूरी था, जो इस फैसले में साफ झलकता है।
प्रदेश के रोजगार की स्थिति पर भी यह निर्णय सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यह कदम यह भी संदेश देता है कि राज्य सरकार युवाओं को बेहतर अवसर देने के लिए प्रयासरत है, बशर्ते अभ्यर्थी स्वयं भी अपने दायित्वों को समझें और समय पर पूरा करें।
इन 25 युवाओं के सामने आने वाले दो वर्ष सिर्फ नौकरी का समय नहीं, बल्कि एक परीक्षा होगी, जिसमें उन्हें सिद्ध करना होगा कि वे न केवल चयन के योग्य थे, बल्कि सरकारी जिम्मेदारी निभाने की क्षमता भी रखते हैं। परिवीक्षा अवधि का हर दिन उनके भविष्य की सेवा यात्रा का आधार बनेगा।
इस निर्णय के साथ, राज्य सरकार ने एक ऐसा रास्ता अपनाया है, जो न तो पूरी तरह उदार है न पूरी तरह कठोर। यह रास्ता संतुलन का है, जो न केवल सिस्टम को मजबूत करता है बल्कि योग्य अभ्यर्थियों को उनके सपनों के द्वार तक पहुंचाने में भी मदद करता है।
आने वाले समय में यह मॉडल अन्य विभागों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है, जहां पात्रता संबंधी दुविधाएं अक्सर विवाद का कारण बनती हैं। अगर अभ्यर्थी समय पर अपने दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं, अच्छी सेवाएं प्रदान करते हैं और परीक्षाएं सफलतापूर्वक पास करते हैं, तो यह निर्णय राज्य की भर्ती प्रणाली को और मजबूत करने का उदाहरण बन जाएगा।
फिलहाल, पूरे प्रदेश की नजर इस फैसले पर और इन 25 युवाओं की तैयारी पर टिकी हुई है। सरकार ने अवसर दे दिया है, अब आगे का रास्ता इन अभ्यर्थियों के संकल्प और जिम्मेदारी पर निर्भर है।
