सर्दियों के आगमन के साथ ही राजस्थान के उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर आई है। राज्य में पेट्रोलियम कंपनियों ने 19 किलो वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में दस रुपए की कटौती की घोषणा की है। दिसंबर 2025 की शुरुआत से लागू इस नई दर के मुताबिक, अब कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1618.50 रुपए से घटकर 1608.50 रुपए रह गई है। इस राहत के साथ ही साल की शुरुआत से अब तक कॉमर्शियल सिलेंडरों में कुल 223 रुपए की कमी हो चुकी है।

इस निर्णय से व्यापारिक गतिविधियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसाय जो प्रतिदिन बड़े पैमाने पर गैस का उपयोग करते हैं, उन्हें इस कटौती से लागत कम करने में मदद मिलेगी। सिलेंडर की कीमतों में यह कमी छोटे व्यवसायियों के लिए आर्थिक राहत का बड़ा अवसर है। व्यापारियों का कहना है कि गर्मियों में और सर्दियों में व्यापारिक गतिविधियों की बढ़ती मांग के बीच, गैस की कम लागत से उत्पादन और सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
राजस्थान एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष दीपक गहलोत ने बताया कि पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा जारी लेटेस्ट रेट लिस्ट में यह संशोधन लागू कर दिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू सिलेंडरों की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर अभी भी 856.50 रुपए में उपभोक्ताओं को उपलब्ध रहेंगे। राज्य सरकार बीपीएल और उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को रियायती दरों पर सिलेंडर उपलब्ध करा रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिल रही है।
साल 2025 की शुरुआत में 19 किलो वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1831.50 रुपए थी। धीरे-धीरे कीमतों में कटौती के बाद अब दिसंबर में यह 1608.50 रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, घरेलू सिलेंडरों में इस अवधि में 50 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। जनवरी में 806.50 रुपए में मिलने वाला घरेलू सिलेंडर अब 856.50 रुपए में उपलब्ध है। इसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू वितरण लागत में बदलाव है।
इस नई दर के लागू होने के बाद व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच उम्मीदें बढ़ गई हैं कि आने वाले महीनों में कीमतें स्थिर रहेंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की स्थिति, उत्पादन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के खर्च पर निर्भर करेगा कि कीमतों में कोई बड़ा बदलाव होगा या नहीं।
राजस्थान सरकार ने इस वर्ष कई योजनाओं के तहत गैस सिलेंडर वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के प्रयास किए हैं। उज्ज्वला योजना के तहत गरीब और बीपीएल परिवारों तक रियायती दर पर गैस पहुंचाई जा रही है। इस पहल से न केवल परिवारों को आर्थिक राहत मिली है, बल्कि महिलाओं की घरेलू सुरक्षा और स्वच्छ cooking fuel तक पहुंच सुनिश्चित हुई है।
एलपीजी की कीमतों में इस तरह की कटौती से उपभोक्ता वर्ग में उत्साह देखा गया है। कई व्यवसायी और होटल संचालक सोशल मीडिया और स्थानीय बाजारों में इस खबर को साझा कर रहे हैं। उनकी प्रतिक्रिया में यह देखा गया कि छोटे व्यवसायों के लिए लागत कम होने से उन्हें अपने ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने का अवसर मिलेगा।
सिर्फ कॉमर्शियल सिलेंडर ही नहीं, बल्कि सरकार और कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भी राहत प्रदान करने के प्रयास किए हैं। सालभर में गैस की कीमतों में लगातार बदलाव देखा गया है। सरकार की नीतियों और पेट्रोलियम कंपनियों के फैसलों से यह स्पष्ट है कि जनता को आर्थिक रूप से सहयोग देने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
राजस्थान में एलपीजी की दरों में यह बदलाव केवल उपभोक्ताओं के लिए राहत नहीं बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। गैस की स्थिर दरें व्यापारिक संचालन को आसान बनाएंगी और उपभोक्ताओं को योजना अनुसार घरेलू खर्चों में सहूलियत मिलेगी।
साल 2025 के दौरान राजस्थान की आर्थिक गतिविधियों में गैस की कीमतें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। विभिन्न व्यवसाय, छोटे उद्योग और होटल उद्योग सिलेंडर की कीमतों पर निर्भर करते हैं। कीमतों में कटौती से इन क्षेत्रों को आर्थिक राहत मिली है और भविष्य में उत्पादन और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ी है।
भविष्य की योजनाओं में राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि गैस वितरण और कीमतों में पारदर्शिता बनी रहे। इसके लिए पेट्रोलियम कंपनियों के साथ समन्वय, एलपीजी वितरण नेटवर्क का विस्तार और स्थानीय बाजारों में निगरानी बढ़ाई जा रही है।
उपभोक्ताओं के लिए यह खुशखबरी है कि राज्य सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा की जा रही ये पहलें उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाएंगी। व्यापारियों के लिए यह कटौती उनकी लागत में सुधार और सेवाओं में सुधार का अवसर प्रदान करेगी।
राजस्थान के उपभोक्ता और व्यापारी अब उम्मीद कर सकते हैं कि आने वाले महीनों में गैस की कीमतें स्थिर रहेंगी और उन्हें आर्थिक राहत मिलती रहेगी। सरकार और कंपनियों की पहल से यह स्पष्ट हो गया है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा, व्यापारिक स्थिरता और सामाजिक हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जा रहे हैं।
