देश की राजधानी दिल्ली इन दिनों एक ऐसे सुरक्षा वातावरण से गुजर रही है, जैसा हर वर्ष केवल कुछ बेहद संवेदनशील अवसरों पर ही दिखाई देता है। शहर के अलग-अलग इलाकों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्थाएँ, खुफिया निगरानी, संवेदनशील मार्गों पर यातायात में बदलाव और बड़ी सरकारी तथा रणनीतिक प्रतिष्ठानों के आस-पास पुलिस-बलों की बढ़ी गतिविधियाँ इस बात का संकेत हैं कि आने वाले कुछ दिनों तक राजधानी में सामान्य से अलग स्थिति देखने को मिलेगी।

दिल्ली में यह सुरक्षा व्यवस्था तीन महत्वपूर्ण परिस्थितियों को एक साथ ध्यान में रखते हुए लागू की गई है। पहला, 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद ढांचे के गिराए जाने की बरसी, दूसरा, 13 दिसंबर को संसद हमले की बरसी, और तीसरा, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत आगमन। इन तीन स्थितियों का एक साथ होना सुरक्षा-तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है।
राजधानी के संवेदनशील इतिहास की पृष्ठभूमि
6 दिसंबर भारतीय इतिहास के उन दिनों में शामिल है, जिसने देश की सामाजिक संरचना को गहराई तक प्रभावित किया। बाबरी ढांचे के विध्वंस को तीन दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इसके प्रभावों की चर्चा, विवाद और न्यायिक संदर्भ समय-समय पर आज भी सामने आते रहे हैं। इसी दिन कुछ विशेष समूहों की सक्रियता बढ़ती है और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह तनावपूर्ण समय होता है।
इसके अलावा 13 दिसंबर भारत की संसद पर हुए आतंकवादी हमले का स्मरण है। यह वह घटना थी जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा के परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल दिया। संसद जैसे अत्यंत सुरक्षित केंद्र पर हमले की घटना ने सुरक्षा-संरचना को नए सिरे से विकसित करने की आवश्यकता को जन्म दिया था। अब हर वर्ष यह दिन सुरक्षा-एजेंसियों के लिए अत्यधिक सतर्कता से भरा होता है।
जब दोनों तिथियाँ एक ही सप्ताह के अंतराल में आती हैं, तो स्वाभाविक रूप से सुरक्षा-तंत्र पहले से कहीं अधिक सक्रिय हो जाता है।
पुतिन की भारत यात्रा: राजनीतिक-रणनीतिक महत्व
इसी समय रूस के राष्ट्रपति पुतिन एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय चर्चा के लिए भारत पहुँच रहे हैं। विश्व-व्यवस्था के मौजूदा स्वरूप में भारत-रूस संबंधों का अपना विशिष्ट महत्व है। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और सामरिक सहयोग की दृष्टि से दोनों देश दशकों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसी राष्ट्राध्यक्ष का दौरा सामान्य कूटनीतिक यात्रा नहीं मानी जाती, बल्कि इसे एक व्यापक रणनीतिक बिंदु के रूप में देखा जाता है।
राष्ट्रपति पुतिन का यह दौरा भारत के सामरिक-हितों के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसा माना जा रहा है कि बैठक में कुछ महत्वपूर्ण रक्षा-साझेदारी समझौते, उन्नत लड़ाकू विमान, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग, निर्यात-ढाँचे और व्यापारिक मार्गों पर सहमति बन सकती है। यही कारण है कि उनके आगमन के साथ-साथ सुरक्षा-प्रबंधों को असाधारण स्तर तक उठाया गया।
सुरक्षा-व्यवस्थाओं का बहु-स्तरीय ढांचा
राजधानी में सुरक्षा का दृष्टिकोण केवल पुलिस-बल के स्तर पर नहीं बल्कि कई स्तरों पर फैला है। सबसे पहले बाहरी घेराबंदी उन क्षेत्रों में बनाई गई है जहाँ विदेशी प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम होने हैं। लुटियंस जोन में कई होटल, अतिथि भवन और सरकारी स्थल वर्तमान में निगरानी दायरे में हैं।
प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा में रूसी सुरक्षा-बल भी सक्रिय रहेगा। प्रारम्भिक सुरक्षा-स्तर उन्हीं के नियंत्रण में होगा। उसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड और केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात रहेंगे ताकि किसी भी प्रकार की अप्रत्याशित घटना पर त्वरित नियंत्रण किया जा सके।
हवाई निगरानी के लिए विशेष टीमें नियुक्त की गई हैं। राजधानी के ऊपर हवाई सुरक्षा-ग्रिड स्थापित किया गया है, जिसके तहत ड्रोन, संदिग्ध उड़ान-वस्तु और रेडियो-सिग्नल आधारित गतिविधियों की पहचान की जा सकेगी। कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए गए हैं, जिनका उद्देश्य किसी भी हवाई घुसपैठ को समय रहते रोकना है।
हाल की घटनाओं से सावधानी
कुछ सप्ताह पहले राजधानी में एक कार के भीतर विस्फोटक सामग्री मिलने की घटना ने सुरक्षा-एजेंसियों को अधिक सक्रिय कर दिया। जांच में सामने आया था कि वाहन कुछ संवेदनशील स्थलों के आस-पास भी गुजरा था। इस घटना ने एक गंभीर संकेत दिया कि असामाजिक या आतंकी तत्व राजधानी जैसी जगह में भी अपनी गतिविधियों को संचालित करने की कोशिश कर सकते हैं।
इसी घटना के बाद दिल्ली पुलिस और खुफिया-एजेंसियों ने उन रणनीतिक स्थानों पर सीसीटीवी की संख्या बढ़ाने, पेट्रोलिंग-यूनिट तैनात करने और अतिरिक्त बल लगाने का निर्णय लिया।
आतंक-संबंधी समूहों की धमकियाँ
इस समय सुरक्षा एजेंसियों को एक और चिंता का सामना करना पड़ रहा है। एक समूह ने 13 दिसंबर को कथित रूप से संसद पर निशाना साधने की घोषणा की है। हालांकि सुरक्षा-एजेंसियों ने ऐसी किसी भी धमकी को गंभीरता से लेते हुए अलर्ट बढ़ा दिया है।
यह भी कहा जा रहा है कि कुछ अलग-अलग मतधाराओं वाले समूह अपने मुद्दों को वैश्विक स्तर पर उठाने की कोशिश करते हुए उग्र बयान दे रहे हैं। कई नेताओं को लिखी गई सार्वजनिक अपीलों से सुरक्षा-तंत्र की चिंता और बढ़ी है।
सुरक्षा-व्यवस्था में आम नागरिकों की भूमिका
राजधानी के नागरिक इस समय अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पुलिस-तंत्र ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी व्यक्ति को यदि कोई संदिग्ध गतिविधि, बैग, वाहन या वस्तु दिखाई दे तो तुरंत सूचित करें। कई जगहों पर महिला कर्मियों सहित दल तैनात किए गए हैं ताकि सामान्य परिस्थितियों में भी चुपचाप निगरानी होती रहे।
प्रशासन की प्राथमिकता
इस पूरे समय प्रशासन की केंद्रीय प्राथमिकता यह है कि कोई भी भीड़-भाड़ वाला स्थल असुरक्षित न रह जाए। बाजार, धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक स्मारक, व्यापारिक केंद्र, मेट्रो स्टेशन और सरकारी संस्थान सभी उच्च निगरानी के दायरे में हैं।
गुप्त-सूचना स्रोतों को सक्रिय किया गया है और लगातार खुफिया-इनपुट विकसित कर सुरक्षा-एजेंसियों तक पहुंचाए जा रहे हैं।
आने वाले दिनों की स्थिति
अगले कुछ दिनों तक दिल्ली में यातायात व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकता है। अनेक मार्गों पर डायवर्जन होंगे, कई जगह बार-बार सुरक्षा-जांच होगी और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर प्रवेश-प्रक्रिया कुछ धीमी रह सकती है। अधिकारियों ने नागरिकों से सहयोग करने की अपील की है।
इन परिस्थितियों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर एक बात साफ है कि सुरक्षा-तंत्र किसी भी स्थिति के समाधान के लिए पूर्णतः तैयार है।
