भारत की आने वाली जनगणना 2027 को लेकर आधिकारिक समयसीमा और प्रक्रिया का खुलासा कर दिया गया है। सरकार ने देश की संसद में यह जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि आगामी जनगणना पारंपरिक तरीके से अलग और अधिक व्यापक स्वरूप में आयोजित की जाएगी। यह जनगणना दो विस्तृत चरणों में पूरी होगी, जिनमें पहला चरण घरों की लिस्टिंग और आवासीय आंकड़ों को संकलित करने का होगा, जबकि दूसरा चरण आबादी के विस्तृत डेटा संग्रह से जुड़ा होगा। यह भारत के अंदर होने वाला सबसे बड़ा डेटा संग्रह अभियान होगा, जिस पर आने वाले वर्षों की नीति निर्माण, संसाधन आवंटन, आधारिक विकास योजनाओं और जनहित संबंधी निर्णयों का आधार तैयार होगा।

सरकार ने इस प्रक्रिया की शुरुआत अप्रैल 2026 से तय की है, जिसमें आवास सूची तैयार करने का काम शुरू किया जाएगा। यह चरण 30 दिनों की शुरुआती अवधि के भीतर पूरा किया जाएगा। इस समय में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों से संबंधित प्रशासनिक इकाइयों को अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी। इस चरण में घरों की संख्या, घरों की स्थिति, उपलब्ध संसाधन और आधारभूत सुविधाओं की पुष्टि की जाएगी। इस चरण को अत्यंत महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह आगे होने वाली जनगणना प्रक्रिया की नींव रखेगा। इसके बाद फरवरी 2027 में जनगणना का दूसरा चरण शुरू होगा जिसमें देश की कुल आबादी, जनसंख्या वृद्धि दर, परिवारों की संरचना, आर्थिक स्थिति, शिक्षा, सामाजिक वर्ग आदि के बारे में विस्तृत आंकड़े जुटाए जाएंगे। इस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर एक निश्चित संदर्भ तारीख तय की गई है जो 1 मार्च 2027 होगी। इसी तारीख के आधार पर देश की कुल आबादी का आकलन किया जाएगा।
भारत में रहने वाली विभिन्न श्रेणियों, जातीय समूहों, सामाजिक वर्गों और विशेष श्रेणी वाले नागरिकों से जुड़े आंकड़ों को भी इस बार आधिकारिक रूप से दर्ज किया जाएगा। इसको लेकर पहले ही कई राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में जातिगत सर्वेक्षण किए जा चुके हैं। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि तमाम पूर्व अनुभव और मौजूदा प्रशासनिक अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर ही पूछे जाने वाले प्रश्नों को अंतिम रूप दिया जाएगा। एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार किया गया है जिसे क्षेत्रीय परीक्षण के बाद विभिन्न मंत्रालयों और विषय विशेषज्ञों के साथ साझा किया गया है। अंतिम परीक्षण 30 नवंबर 2025 तक पूरा किया जा चुका है और अब जल्द ही प्रश्नावली आधिकारिक रूप से जारी होने की उम्मीद है।
यह जनगणना पारंपरिक कागजी प्रक्रिया से काफी अलग होगी। इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल आधारित डेटा संग्रहण मॉडल का उपयोग किया जाएगा। यह मॉडल पहले चरण में पायलट रूप में लागू किया गया था। इस दौरान देश के कई जिलों में स्वयं जनगणना भरने की सुविधा दी गई थी। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि अब डेटा संग्रहण कार्य में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा जैसे कि इंटेलिजेंट कैरेक्टर रिकगनीशन सिस्टम जो कागज पर लिखे डेटा को स्वत: डिजिटल फॉर्म में परिवर्तित कर देगा। प्रत्येक आवासीय स्थान का डिजिटल टैग बनाया जाएगा। जीपीएस लोकेशन के आधार पर उसके सटीक भौगोलिक स्थान को दर्ज किया जाएगा। सभी उत्तरों के लिए ड्रॉपडाउन मेन्यू उपलब्ध होंगे जिससे मानव त्रुटि की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।
देश के कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था भी लागू की जाएगी। लद्दाख, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय तथा बर्फ से ढके इलाकों में आबादी की गणना फरवरी 2027 से पहले ही कर ली जाएगी। इन क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि वर्ष की शुरुआत में यहां बड़े पैमाने पर बर्फबारी होती है जिसके कारण कर्मचारियों का पहुंचना कठिन होता है और स्थानीय नागरिकों की आवाजाही भी प्रभावित होती है।
जनगणना के दौरान यह भी दर्ज किया जाएगा कि देश में कितने लोग अपने वास्तविक स्थान से बाहर रह रहे हैं। इन आंकड़ों के आधार पर शहरीकरण, प्रवासन, रोजगार आधारित परिवहन और सामाजिक संतुलन की स्थिति का आकलन किया जाएगा। सरकार ने यह भी बताया कि जनगणना केवल संख्यात्मक आधार पर नहीं होगी, बल्कि यह देश के सामाजिक और सांस्कृतिक स्वरूप की एक जीवंत तस्वीर भी पेश करेगी। देश में तेजी से बदलते शिक्षा स्तर, रोजगार की स्थिति और महिलाओं की भागीदारी से जुड़े पहलुओं को भी इसमें स्थान दिया जाएगा।
सरकार ने इस दौरान संसद में अन्य संबंधित सूचनाएं भी साझा कीं। कई लाख राशन कार्डों को रद्द कर दिया गया क्योंकि वे या तो अवैध थे या उन पर फर्जी लाभार्थी दर्ज किए गए थे। दूसरी ओर सहकारी समितियों से जुड़े लाखों जमाकर्ताओं को उनके पैसे की वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। कफ सिरप निर्माताओं की जांच में गलत रासायनिक तत्व मिले और कार्रवाई भी हुई। इसके अलावा यह भी स्पष्ट हुआ कि पिछले कुछ वर्षों में हजारों स्टार्टअप बंद हुए हैं जिनका डेटा भी शासन के पास मौजूद है। यह बातें इस बात का संकेत हैं कि जनगणना प्रक्रिया महज डेटा संग्रहण नहीं है, बल्कि इसके आधार पर आने वाले वर्षों में देश की योजनाओं और संसाधनों को नियंत्रित करने की प्रक्रिया भी आकार लेती है।
आने वाले समय में भारत का सामाजिक ढांचा काफी हद तक इस जनगणना से प्रभावित होगा। तकनीकी साधनों के इस्तेमाल से यह प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी। इस जनगणना के आंकड़े स्वास्थ्य योजनाओं, शिक्षा बजट, स्थानीय निकायों के विकास, राज्यों को दी जाने वाली सहायता और रोजगार संबंधित नीतियों की दिशा तय करेंगे। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि नागरिक भी इसमें जागरूकता से भाग लेंगे। सरकार व्यापक जनजागरूक कार्यक्रम चलाएगी ताकि हर परिवार अपनी जानकारी कठोर सत्यता एवं जिम्मेदारी के साथ दर्ज करे।
