शीत युद्ध की छाया में दोबारा सक्रिय हुआ परमाणु शक्ति संतुलन, जानिए मिनटमैन-III की तकनीक, रेंज और रणनीतिक महत्व

अमेरिकी मिसाइल परीक्षण से फिर बढ़ा वैश्विक तनाव
दुनिया एक बार फिर परमाणु शक्ति संतुलन की दहलीज पर खड़ी दिख रही है।
अमेरिकी वायु सेना (US Air Force) ने हाल ही में मिनटमैन-III अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का सफल परीक्षण किया है, जिसने वैश्विक राजनीतिक हलचलों को तेज़ कर दिया है।
यह परीक्षण वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस (Vandenberg Space Force Base) से किया गया और मिसाइल ने 4200 मील (लगभग 6700 किमी) की दूरी तय कर मार्शल द्वीप समूह में स्थित रोनाल्ड रीगन मिसाइल डिफेंस टेस्ट साइट के पास लैंड किया।
अमेरिकी ग्लोबल स्ट्राइक कमांड (AFGSC) के अनुसार, यह परीक्षण पूरी तरह से बिना हथियारों के (unarmed) किया गया और इसका उद्देश्य मिसाइल की विश्वसनीयता, सटीकता और परिचालन तत्परता की जांच करना था।
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क्यों महत्वपूर्ण है यह परीक्षण?
यह सिर्फ एक मिसाइल लॉन्च नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश भी है।
यह परीक्षण ऐसे समय में किया गया जब पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस, चीन, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया पर गुप्त परमाणु परीक्षण करने का आरोप लगाया था और अमेरिका को भी 33 साल बाद फिर से न्यूक्लियर टेस्ट शुरू करने का संकेत दिया था।
हालांकि अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने यह स्पष्ट किया कि इन परीक्षणों में कोई वास्तविक विस्फोट (nuclear detonation) नहीं होगा। फिर भी, इस घटना ने परमाणु हथियारों की होड़ को लेकर रूस और चीन की चिंता बढ़ा दी है।
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मिनटमैन-III: शीत युद्ध की विरासत से आधुनिक युग तक
मिनटमैन-III (Minuteman III) अमेरिका की ICBM प्रणाली का सबसे पुराना और मजबूत स्तंभ है। इसे शीत युद्ध (Cold War) के दौर में विकसित किया गया था ताकि अमेरिका के पास तेज जवाबी हमला करने की क्षमता बनी रहे।
यह मिसाइल सिस्टम अमेरिका की “Nuclear Triad” (परमाणु त्रिकोण) का हिस्सा है —
1. ICBM (Intercontinental Ballistic Missiles) – ज़मीन से दागी जाने वाली मिसाइलें
2. SLBM (Submarine-Launched Ballistic Missiles) – पनडुब्बी से दागी जाने वाली मिसाइलें
3. Nuclear Bombers (परमाणु बमवर्षक विमान)
इन तीनों के संयोजन से अमेरिका दुनिया का सबसे सक्षम परमाणु प्रतिरोधक (Nuclear Deterrence) नेटवर्क बनाए हुए है।
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मिनटमैन-III की प्रमुख खूबियां
इस मिसाइल की क्षमताएं हैरान कर देने वाली हैं —
🔸 रेंज: 13,000 किलोमीटर (लगभग 8,000 मील)
🔸 गति: प्रति घंटे 15,000 मील तक
🔸 हथियार क्षमता: तीन परमाणु वॉरहेड (independently targetable re-entry vehicles – MIRVs)
🔸 इंजन: ठोस रॉकेट ईंधन (Solid Propellant)
🔸 सटीकता: 200 मीटर से कम विचलन (CEP)
इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह “क्विक लॉन्च मिसाइल” है — यानी आदेश मिलते ही मिनटों में दागी जा सकती है।
इसे विशेष रूप से “जवाबी हमले” (Retaliatory Strike) के लिए डिज़ाइन किया गया है। यही कारण है कि इसे अमेरिकी रणनीति में “Doomsday Weapon” यानी कयामत की मिसाइल कहा जाता है।
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20 मिनट में मॉस्को या बीजिंग तक हमला
अमेरिका से मॉस्को की दूरी लगभग 4,900 मील (7,880 किमी) और बीजिंग की लगभग 6,000 मील (9,600 किमी) है।
मिनटमैन-III की स्पीड इतनी अधिक है कि यह दोनों राजधानियों तक 20 मिनट से भी कम समय में पहुंच सकती है।
इसका मतलब है कि अगर परमाणु संघर्ष होता है, तो अमेरिका के पास इतनी तेज़ जवाबी क्षमता है कि किसी भी हमले का तुरंत प्रतिकार किया जा सके।
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परीक्षण नियमित था, लेकिन संकेत गंभीर
अमेरिकी सेना ने बयान में कहा कि यह परीक्षण वर्षों पहले से निर्धारित नियमित प्रक्रिया का हिस्सा था।
लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा वैश्विक हालात —
रूस-यूक्रेन युद्ध,
चीन-ताइवान तनाव,
उत्तर कोरिया की मिसाइल गतिविधियां —
इन सबके बीच यह परीक्षण रणनीतिक चेतावनी के रूप में भी देखा जा सकता है।
यह अमेरिका की उस क्षमता को प्रदर्शित करता है कि वह दुनिया के किसी भी कोने तक परमाणु हमला करने में सक्षम है।
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अमेरिका के परमाणु परीक्षणों पर रोक
अमेरिका ने 1992 के बाद से किसी भी विस्फोटक परमाणु परीक्षण पर रोक लगा रखी है।
इसके बावजूद, वह लगातार अपने परमाणु हथियारों और मिसाइल प्रणालियों का “नॉन-न्यूक्लियर टेस्ट” करता रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसकी सैन्य तकनीक अद्यतन और भरोसेमंद बनी रहे।
इस नीति को अमेरिका “Stockpile Stewardship Program” के तहत संचालित करता है, जो पुराने हथियारों की विश्वसनीयता जांचने और आधुनिकता बनाए रखने की अनुमति देता है।
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भू-राजनीतिक प्रभाव: क्या शुरू हो रही है नई हथियार दौड़?
यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया में नए भू-राजनीतिक गठबंधन बन रहे हैं।
रूस और चीन एक दूसरे के करीब आ रहे हैं,
उत्तर कोरिया ने लगातार मिसाइल लॉन्च किए हैं,
ईरान ने भी मिसाइल तकनीक में तेजी दिखाई है।
ऐसे में, अमेरिका का यह कदम स्पष्ट संदेश देता है कि वह सैन्य और परमाणु दोनों मोर्चों पर अपनी बढ़त बनाए रखना चाहता है।
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निष्कर्ष: ‘संतुलन या संकट’ की ओर दुनिया?
मिनटमैन-III मिसाइल परीक्षण ने एक बार फिर वैश्विक शक्ति संतुलन की बहस को हवा दी है।
तकनीकी रूप से यह एक नियमित टेस्ट है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह परमाणु शक्ति प्रदर्शन (Nuclear Signaling) का हिस्सा है।
यह स्पष्ट करता है कि 21वीं सदी में भी दुनिया अभी तक पूरी तरह “Post-Nuclear World” में प्रवेश नहीं कर पाई है।
बल्कि, नई तकनीक और पुरानी प्रतिस्पर्धा मिलकर हमें फिर से शीत युद्ध जैसे दौर की याद दिला रही हैं।
