मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई पहल की जा रही है, जो न केवल ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करेगी बल्कि प्रदेश को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हाल ही में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, जिनका उद्देश्य डॉक्टरों की कमी को दूर करना और आम जनता तक उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाओं को पहुंचाना है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में निजी डॉक्टरों की सेवाएं
प्रदेश में कई जिलों में पीएचसी और सीएचसी में डॉक्टरों की कमी लंबे समय से एक बड़ी समस्या रही है। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार ने निजी डॉक्टरों से अनुबंध करने और उन्हें आवश्यकता पड़ने पर कॉल पर बुलाने का निर्णय लिया है। निजी डॉक्टरों को इस सेवा के लिए मानदेय भी दिया जाएगा। इससे न केवल ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा तक आसानी से पहुंच मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मॉडल कई अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण स्थापित कर सकता है। इसे लागू करने से स्थानीय समुदाय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास भी बढ़ेगा और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की क्षमता में वृद्धि होगी।
बांडेड डॉक्टरों को विशेषज्ञ के समान वेतन
सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों से एमडी और एमएस करने वाले बांडेड डॉक्टरों को सेवा के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों के बराबर वेतन मिलेगा। वर्तमान में पीजी बांडेड डॉक्टरों को 59,000 रुपये मानदेय मिलता है, जबकि पीजी के दौरान उन्हें 77,000 रुपये मिलते हैं। नई नीति के तहत बांडेड डॉक्टरों को विशेषज्ञों के समान वेतन और प्रोत्साहन दिया जाएगा, ताकि वे प्रदेश में सेवाएं जारी रखें।
मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि बांड वाले डॉक्टरों को दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में आकर्षक मानदेय देकर सेवाओं के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया को तेज कर प्रदेश में मेडिकल स्टाफ की कमी को कम करने पर जोर दिया गया।
मेडिकल टूरिज्म हब का विकास
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के एक जिले को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने का भी निर्देश दिया। इसका उद्देश्य है कि प्रदेश में आयुष्मान योजना का लाभ अधिकतम लोगों तक पहुंचे और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो। इसके तहत राज्य के सरकारी अस्पतालों को योजना में शामिल करने के साथ ही निजी अस्पतालों को भी जोड़ा जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, मेडिकल टूरिज्म हब बनने से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा की पहुँच बढ़ेगी, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी।
निजी अस्पतालों में सीजेरियन ऑपरेशन और एम्बुलेंस सेवा पर नियंत्रण
बैठक में मुख्यमंत्री ने निजी अस्पतालों में बेवजह सीजेरियन ऑपरेशन की शिकायतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही 108 एम्बुलेंस के चालकों द्वारा मरीजों को जबरदस्ती निजी अस्पतालों में ले जाने की शिकायतों को रोकने के लिए भी कार्रवाई की जाएगी।
पिछले दो वर्षों में प्रदेश में 84,000 से अधिक कार्डियक सर्जरी शासकीय अस्पतालों में सफलतापूर्वक संपन्न हुई हैं। इसके अलावा, देहदान करने वाले 38 मृतकों को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
कैथलैब और मेडिकल कॉलेज में नई सुविधाओं का विस्तार
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि अगले तीन वर्षों में सीएम-केयर योजना के तहत कई बड़े काम किए जाएंगे। 2028 तक राजगढ़, मंडला, छतरपुर, उज्जैन, दमोह और बुधनी में शासकीय मेडिकल कॉलेज और संभागीय मुख्यालयों में कैथलैब प्रारंभ किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य मातृ मृत्यु दर को 100 प्रति लाख जीवित जन्म तक लाना है।
खाद्य प्रशासन के सुदृढ़ीकरण के लिए एफएसएसएआइ द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए 41.07 करोड़ रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत की गई है। औषधि प्रशासन में लैब निर्माण और अन्य सुविधाओं के लिए 211 करोड़ रुपये की पांच वर्षीय योजना केंद्रीय ड्रग स्टैंडर्ड एवं कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन को भेजी गई है।
नई मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों का निर्माण
पीपीपी मोड पर कटनी, धार, पन्ना और बैतूल जिलों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा जल्द ही इन कॉलेजों का भूमिपूजन करेंगे। इसके अलावा, मैहर, मऊगंज और पांढुर्ना जिलों में नए जिला चिकित्सालयों का निर्माण भी मंजूरी मिल चुकी है।
उन्नत चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता
मेडिकल कॉलेजों में रेडियोथैरेपी और ब्रैकीथेरेपी मशीनें स्थापित की जा रही हैं। इंदौर, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में आधुनिक ड्यूल एनर्जी लीनियर एक्सीलरेटर मशीनें खरीदी जा रही हैं। भोपाल, इंदौर, रीवा और सागर में रेडियोथैरेपी के लिए ब्रैकीथेरेपी मशीनें लगाई जा रही हैं।
सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और सागर मेडिकल कॉलेजों में स्थापित की जा रही हैं। ग्वालियर, रतलाम और विदिशा के मेडिकल कॉलेजों के लिए भी समान मशीनें खरीदी जा रही हैं।
सरकार का स्वास्थ्य क्षेत्र में समग्र दृष्टिकोण
इस व्यापक योजना से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर ऊँचा होगा। निजी डॉक्टरों की सेवाओं का समावेश, बांडेड डॉक्टरों को विशेषज्ञ वेतन, मेडिकल कॉलेजों में उन्नत सुविधाओं का विकास और नए जिला अस्पतालों की स्थापना से प्रदेश में स्वास्थ्य क्रांति संभव है।
मुख्यमंत्री की इस पहल से न केवल चिकित्सकों को प्रोत्साहन मिलेगा बल्कि आम जनता को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से मध्यप्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है।
