मध्यप्रदेश के हरदा जिले में इस वर्ष बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस अत्यंत गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। यह सिर्फ स्मृति दिवस नहीं रहा, बल्कि सामाजिक चेतना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को केंद्र में लाने वाला एक प्रेरक आयोजन साबित हुआ। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में शहर और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र से लोग पहुँचे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शिक्षा, सामाजिक समानता, सरकारी योजनाओं तक पात्र लोगों की पहुँच, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के आर्थिक और सामाजिक अधिकारों पर विस्तृत चर्चा हुई।

श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए सुबह से ही लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुँचना आरम्भ हो गए थे। नगर के प्रमुख सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी समूहों, शैक्षणिक संस्थानों और युवा मंचों ने मिलकर आयोजन में भागीदारी की। हरदा जिले में पहली बार इस आयोजन को इतने बड़े स्वरूप में आयोजित किया गया, जिससे इसकी भव्यता और प्रभाव और अधिक बढ़ गया।
महापरिनिर्वाण दिवस: एक ऐतिहासिक संदर्भ
बाबासाहेब अंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस भारत में उन महान व्यक्तियों की याद दिलाता है, जिन्होंने सामाजिक परिवर्तन की नींव रखी। 6 दिसंबर 1956 को उनका शरीर भले ही पंचतत्व में विलीन हो गया, लेकिन उनकी वैचारिक सम्पदा आज भी करोड़ों लोगों के लिए मार्गदर्शन है। इसी तिथि को देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम, जागरण गोष्ठियाँ, जागरूकता सम्मेलन और सामाजिक प्रतिज्ञा सभाएँ आयोजित होती हैं।
इस वर्ष हरदा जिले में महापरिनिर्वाण दिवस कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज भी समाज के विभिन्न वर्ग शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्वावलंबन के क्षेत्र में संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में अंबेडकरवाद के मूल सिद्धांतों पर चलने की आवश्यकता पहले से ज्यादा है।
कार्यक्रम का आयोजन और प्रमुख वक्तव्य
कार्यक्रम में समाज के कई प्रमुख वक्ताओं ने बाबासाहेब की नीतियों और विचारधारा पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि आज भी शिक्षा ही वह शक्ति है, जिसके माध्यम से समाज में समानता आ सकती है। एक वक्ता ने कहा कि यदि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय होता है, तो समाज को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। यही अंबेडकरवाद का मूल उद्देश्य है।
वक्ताओं ने यह भी बताया कि सामाजिक उत्थान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि सामूहिक सोच और सकारात्मक प्रयासों से संभव है।
SC/ST वर्ग के अधिकारों और सरकारी योजनाओं पर चर्चा
कार्यक्रम में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रति विशेष संवेदनशीलता दिखाई दी।
वक्ताओं ने बताया कि सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन को समाप्त करने के लिए जारी सरकारी योजनाओं तक वास्तविक लाभार्थियों की पहुँच अत्यंत आवश्यक है। चर्चा में शिक्षा के अधिकार, रोजगार के अवसर, छात्रवृत्तियाँ, आवासीय योजनाएँ, स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाएँ, उद्यमिता प्रशिक्षण, स्वरोजगार योजनाएँ और अनुसूचित वर्ग कल्याण कार्यक्रम शामिल रहे।
वक्ताओं ने उपस्थित युवाओं से अपील की कि वे तकनीकी शिक्षा, स्किल ट्रेनिंग और प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं की तैयारी करें, ताकि सरकारी नौकरियों में उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
युवाओं के लिए प्रेरणादायी संदेश
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए, जिनके लिए वक्ताओं ने विशेष रूप से संदेश दिया।
युवाओं को बताया गया कि डॉ. अम्बेडकर ने अपने जीवन भर शिक्षा को मानव मुक्ति और आत्मनिर्भरता का मुख्य साधन माना। यदि समाज के युवा पढ़ेंगे, तो समाज आगे बढ़ेगा।
युवाओं से कहा गया कि इंटरनेट उपलब्ध है, डिजिटल प्लेटफार्म पर ज्ञान उपलब्ध है, लाइब्रेरी हैं, ऑनलाइन कोर्स हैं, ऐसे में अवसर पहले के मुकाबले काफी अधिक हैं।
युवाओं से यह भी कहा गया कि मानसिक रूप से मजबूत बनकर, प्रतिस्पर्धा के स्तर तक स्वयं को तैयार करें, यही सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त मार्ग है।
सामूहिक संकल्प: अन्याय के खिलाफ आवाज
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक सामूहिक संकल्प लिया। यह संकल्प सामाजिक न्याय, समान अवसर और मानवाधिकारों को सुरक्षित रखने के प्रति समर्पित था।
लोगों ने शपथ ली कि जहाँ भी किसी के साथ भेदभाव होगा, उसके खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।
लोगों ने कहा कि जाति, धर्म, भाषा, आर्थिक स्थिति जैसी सीमाओं के पीछे छिपकर समाज को बांटना भारत की विविधता को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए समाज को एकजुट रहते हुए विकासशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
स्थानीय विकास और सामाजिक भागीदारी की आवश्यकता
हरदा जिले में विकास को लेकर कई उठते मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
जिलावासी चाहते हैं कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक अवसरों और ग्रामीण विकास की योजनाओं के क्षेत्र में और सशक्त रूप से काम किया जाए।
इस दौरान यह भी कहा गया कि हरदा जिले में कन्या शिक्षा, कॉलेज सुविधाओं, तकनीकी शिक्षा, स्वरोजगार समर्थन और कृषि आधारित व्यवसायों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी योजनाएँ तभी प्रभावी होती हैं, जब स्थानीय समाज उन्हें जानता है और उनका उपयोग करता है।
इसलिए आगामी दिनों में जन-जागरूकता कार्यक्रम, सहायता शिविर और समाज के सामूहिक लाभ हेतु विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।
बाबासाहेब की विचारधारा आज भी क्यों प्रासंगिक
डॉ. अंबेडकर को सिर्फ संविधान निर्माता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने समाज में समानता का अधिकार दिया
उन्होंने शिक्षा को प्राथमिक अधिकार बनाया
उन्होंने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों को समझकर समाधान दिए
उन्होंने मजदूरों, महिलाओं और वंचित समुदायों को अधिकार दिलाए
भारत आज विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे समय में सामाजिक मूल्यों की पुनर्स्थापना आवश्यक हो जाती है।
इसलिए कार्यक्रम में वक्ताओं ने राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और समावेशी विकास पर बल दिया।
समापन और सामूहिक संवेदना
कार्यक्रम शांति और एकजुटता के साथ समाप्त हुआ।
लोगों ने बाबा साहब को नमन किया और समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए स्वयं को प्रतिबद्ध किया।
हरदा में यह आयोजन आने वाले वर्षों में और बड़े रूप में आयोजित करने का संकल्प लिया गया।
